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जब से इस जमीन पर आई हूं

तब से नए नए किरदार जी रही हूं

कभी बेटी तो कभी बहन

कभी बहू तो कभी भाभी

कभी पत्नी तो कभी माँ

समय के साथ मैं भी बदल गयी

जीती गयी मेरे इन किरदारों को

हर मुकाम पर अकेली थी

सब थे फिर भी खाली थी

जीवन मे सबको जीतना है

तो पहले खुद को अपनाना सीख लो

किरदार बदलो पर अपनी आत्मा

को मत बदलो
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Santosh Joshi

Very nice dear

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Vineeta Dhiman

Thanks to all

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Bhavna Anadkat

Nice lines

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Madhavi Cholera

Very nice dear..

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Durga salvi

Bhut hi sunder likha hai apne 😍

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