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#goodmorning
*राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह दिनकर*
*।। कोई अर्थ नहीं।।*
नित जीवन के संघर्षों से

जब टूट चुका हो अन्तर्मन,

तब सुख के मिले समन्दर का

*रह जाता कोई अर्थ नहीं*।।
;;;; जब फसल सूख कर जल के बिन

;;;; तिनका -तिनका बन गिर जाये,

;;;; फिर होने वाली वर्षा का

;;;; *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*
सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन

यदि दुःख में साथ न दें अपना,

फिर सुख में उन सम्बन्धों का

*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*
;;;; छोटी-छोटी खुशियों के क्षण

;;;; निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,

;;;; फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का

;;;; *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*
मन कटुवाणी से आहत हो

भीतर तक छलनी हो जाये,

फिर बाद कहे प्रिय वचनों का

*रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*
;;;; सुख-साधन चाहे जितने हों

;;;; पर काया रोगों का घर हो,

;;;; फिर उन अगनित सुविधाओं का

;;;; *रह जाता कोई अर्थ नहीं।।*
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Harshmita Walia

Good morning:)

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