स्तनपान कराने का सही तरीका और इससे जुड़ी जानकारियाँ: ब्रेस्टफीडिंग गाइड

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स्तनपान कराने का सही तरीका और इससे जुड़ी जानकारियाँ: ब्रेस्टफीडिंग गाइड

डिलीवरी के ठीक बाद स्तनपान कराने के लिए कौन सी पोज़ीशन सही रहेगी?

 

नॉर्मल डिलीवरी

डिलीवरी के तुरंत बाद आप बैठ कर बच्चे को स्तनपान करवा सकती हैं.

अगर टाँकों में दर्द हो, तो लेट कर भी फ़ीड करवाया जा सकता है.

 

सीज़ेरियन डिलीवरी

शुरुआत में माँ को लेट कर, एक साइड करवट लेकर फ़ीड कराने में आसानी होती है.

अगर बैठने में दिक्कत नहीं, तो फ़ुटबॉल पोज़ीशन बेहतर है. इससे बच्चे के वज़न से टाँकों पर असर नहीं पड़ता।

एक बार टाँकों का दर्द कम हो जाये, तो किसी भी तरह से स्तनपान करवा सकती हैं.

 

स्तनपान की अलग-अलग पोज़ीशन कौन सी होती हैं?

 

  क्रेडल      
माँ की पोज़ीशन चेयर या बिस्तर पर बैठ जाएँ, सहारे के लिए तकिये का इस्तेमाल करें चेयर या बेड पर बैठ जाएँ  चेयर या बेड पर बैठ जाएँ माँ एक तरफ़ करवट लेकर लेटती है
बच्चे की पोज़िशन  जिस स्तन से उसे दूध पीला रही हैं, उसी तरफ़ उसका मुंह हो उसे दूध पीला रही हैं बच्चे को अपनी तरफ़ लेटा जिस तरफ़ से फ़ीड करवा रही हैं, उलटे हाथ की साइड उसे पकड़ें उसी तरफ़ उसका मुंह हो  जिस स्तन से उसे दूध पीला रही हैं बच्चे को अपनी तरफ़ लेटा कर फ़ीड करवाएँ जिस स्तन से उसे दूध पीला रही हैं बच्चे को अपनी तरफ़ लेटा
पोज़ीशन की डिटेल C का आकार बनाते हुए, 4 उँगलियां स्तन को सपोर्ट करते 

  हुए नीचे और अँगूठा ऊपर

बच्चे के सिर को अँगूठे और बच्चे का शरीर माँ के दोनों हाथों बच्चे के सिर को अँगूठे और बच्चे का शरीर माँ के दोनों हाथों के बच्चा और माँ आमने-सामने
कौन सी पोज़ीशन  आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली   छोटे बच्चे या वो जिन्हें दूध पीने में दिक्कत हो सीज़ेरियन डिलीवरी, जुड़वाँ बच्चे, सीज़ेरियन के बाद, रात में सीज़ेरियन के बाद, रात में पीने में दिक्कत हो जो शिशु किसी एक स्तन से फ़ीड करते हों



बच्चे को फ़ीड करवाने के लिए कौन सी पोज़ीशन बेहतर है?

जिस भी पोज़ीशन में माँ और बच्चा सहज महसूस करें, वो बेहतर है.

 

ज़रूरत के हिसाब से आप अलग-अलग पोज़ीशन इस्तेमाल करें:

 

क्रेडल पोज़ीशन

 

ज़्यादातर बच्चे इस पोज़ीशन में सहज रहते हैं.

 

क्रॉस क्रेडल पोज़ीशन

छोटे बच्चे, जिन्हें सपोर्ट की ज़रूरत होती है.

वो बच्चे, जो स्तन पर पकड़ नहीं बना पाते, जिस वजह से उन्हें फ़ीड करने में दिक्कत होती है.

 

फ़ुटबॉल पोज़ीशन

 

दोनों में से सिर्फ़ किसी एक स्तन से स्तनपान करने वाले शिशुओं के लिए. अगर वो राइट साइड किसी जगह लेफ़्ट ब्रैस्ट से दूध पीता है, तो ये मुद्रा कारगर होगी।

 

ट्विन्स

दोनों बच्चों को एक-साथ स्तनपान कराने के लिए ये मुद्रा बेहतर है.

सीधे बैठने की जगह थोड़ा टेढ़ा हो कर बैठें।

 

रात में स्तनपान:

जब माँ को रेस्ट की ज़रूरत हो.

 

स्तनपान कराने का सही तरीका क्या है?

स्तनपान कराते वक़्त सबसे ज़रूरी है कि बच्चा ढंग से Latch (लैच) कर पाए. Latch यानि निप्पल को उसका मुँह छूना चाहिए। इसके अलावा इन ज़रूरी बातों पर ध्यान दीजिये।

हाथ धोने के बाद स्तन को सही दिशा में रखें

 

C शेप बनाते हुए उँगलियों और अँगूठे की मदद से ब्रैस्ट को थामें।

निप्पल को बच्चे के गाल या होंठों से टच करें।

 

इसके बाद बच्चा अपना मुँह निप्पल की तरफ़ करने और मुँह खोलने की कोशिश करेगा। इसे रूटिंग रिफ्लेक्स (Rooting Reflex) कहा जाता है. इसके बाद बच्चा अपना मुँह और खोलेगा।

 

बच्चे के मुँह में निप्पल डालने की कोशिश करें, लगभग एक इंच तक और उसे अपने स्तन की तरफ़ मूव करें। ये ठीक से करने से बच्चे के दोनों होंठों के बीच निप्पल होगा। लगभग 120 डिग्री पर.

 

इस तरह बच्चा पूरा निप्पल अपने मुँह में रख लेगा और उसके पास का हिस्सा भी.



सही लैच होने पर:

पोज़ीशन सही होगी।

आपको बच्चे के मुँह पूरा खुला दिखेगा और निप्पल से घिरा हुआ सर्कल (Areola) उसके मुँह में होगा।

आप बच्चे को अच्छे से दूध पीते हुए सुन-देख पाएंगी और इस सेशन के बाद उसका पेट भी भर जाएगा।

उसे फ़ीड कराने से पहले स्तनों का भारीपन उसके तुरंत बाद गायब हो जाएगा।

आपको स्तनों में किसी तरह का कोई दर्द, सूजन या क्रैक नहीं मिलेगा।

न ही स्तनों में गाँठ होगी या बच्चा के काटे की निशान।

 

ग़लत तरह से लैच करने पर:

दूध पीने की आवाज़ की जगह सिर्फ़ जीभ की आवाज़ सुनाई देगी।

ऐसे में बच्चा जब स्तनपान करेगा, तो आपको ज़्यादा दर्द होगा।

अगर लैच सही नहीं है, तो बच्चे को दूध से हटाकर, दोबारा कोशिश करें। अंदर से बच्चे के गाल की तरह ऊँगली डालने से स्पेस ज़्यादा मिलता है. इससे बचा दूध छोड़ देगा। एक बार दोबारा कोशिश करें, सही तरह से.

 

लैच पर ये वीडियो

 

स्तनपान के सही तरीके को समझने के लिए स्टैनफ़ोर्ड चिल्ड्रन हॉस्पिटल का ये वीडियो देख सकती हैं.

 

कुछ बच्चे ढंग से लैच नहीं करते या उन्हें दूध से हटाने पर ज़बरदस्ती करते हैं:

 

इसलिए फ़ीड शुरू करने से पहले दूध की एक बूंद गिर कर देखें। बच्चा दूध की ख़ुशबू से स्तन की तरफ आकर्षित हो सकता है और ऐसे में ज़्यादा बेहतर तरह से आप फ़ीड करवा सकती हैं.

 

उसे थोड़ी देर ऐसे ही स्तनों के पास रहने दें, एक बार सहज होने पर ही आगे बढ़ें। उसके साथ ज़बरदस्ती न ही करें तो बेहतर है. एक बार वो नॉर्मल हो जाएगा, तो फ़ीडकराना आसान होगा।

 

सही लैच क्यों ज़रूरी है?

ग़लत लैच की वजह से माँ को सूजन, दर्द, क्रैक को सकते हैं.

स्तन में दूध रह जाने से गाँठ बनने के चान्सेस बढ़ जाते हैं.

कम दूध की वजह से बच्चा भूखा रह जाएगा और बार-बार फ़ीड करेगा।

 

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