एमनीओटिक फ्लूइड कितना होना चाहिए - गर्भवस्था से लेकर डिलीवरी को बेहतर बनाने में साथ निभाने वाला ज़रूरी साथी

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एमनीओटिक फ्लूइड कितना होना चाहिए - गर्भवस्था से लेकर डिलीवरी को बेहतर बनाने में साथ निभाने वाला ज़रूरी साथी

मां बनना सिर्फ़ एक मानसिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इस पड़ाव में एक औरत के शरीर में ढेरों बदलाव होते हैं. जितना ज़रूरी उसके लिए अपने खान-पान पर ध्यान देना है, उतना ही ज़रूरी है अपने शरीर से जुड़ी हर जानकारी के बारे में सतर्क होना.

 

गर्भ में पल रहे बच्चे और मां की हेल्थ कई तरह के पहलुओं पर निर्भर करती है, जैसे बच्चे का वज़न, मां का वज़न, उसका हार्ट रेट, उसके सिर का आकार आदि. रेगुलर Checkup में इन्हीं पहलुओं को ध्यान में रख कर ये अनुमान लगाया जाता है कि डिलीवरी ठीक होगी, बच्चा स्वस्थ है कि नहीं. ये बातें लगभग हर मां और उसकी केयर करने वाले जानते होंगे. एक स्वस्थ बच्चे और स्मूथ प्रेगनेंसी पीरियड के लिए ज़रूरी एक और मापदंड है, जिसे कहा जाता है एमनीओटिक फ्लूड इंडेक्स (Amniotic Fluid Index).

 

एमनीओटिक Fluid

 

जिस नेचुरल थैली में बच्चा पल रहा होता है, उसी के अंदर होता है एक लिक्विड, जिसे एमनीओटिक Fluid कहा जाता है. क्लियर या फिर हल्के पीले रंग का ये Fluid गर्भधारण के शुरुआती 12 दिनों में एमनीओटिक थैली में बनने लगता है. ये लिक्विड रक्त-पोषक तत्वों का मिक्स होता है. ये भ्रूण के विकास में बेहद सहायक है. एक मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिए ज़रूरी इस Fluid की मात्रा से ही प्रेगनेंसी और डिलीवरी कैसी होगी, इसका अंदाज़ा लग जाता है. प्रेगनेंसी बढ़ने के साथ ही एमनीओटिक Fluid बढ़ने लगता है. अमूमन 34 से 36 वीक की प्रेगनेंसी में इसकी मात्रा लगभग 600 ml होनी चाहिए. डिलीवरी डेट के करीब आते ही, ये 600 ml तक पहुंच जाता है. इसकी बेहद कम और बहुत ज़्यादा मात्रा होने की वजह से ही डिलीवरी में दिक्कतें आती हैं.

 

एमनीओटिकFluid इंडेक्स - इसकी कितना मात्रा मां और बच्चे के लिए अच्छी होती है

 

एमनीओटिक Fluid की मात्रा को एक इंडेक्स द्वारा मापा जाता है, जिसे एमनीओटिक Fluid इंडेक्स कहा जाता है. इस इंडेक्स से आप प्रेगनेंसी पीरियड में बच्चे की ग्रोथ का पता लगा सकते हैं. रूटीन चेकअप के दौरान हुए अल्ट्रासाउंड से ही इसका पता चल जाता है. एमनीओटिक Fluid इंडेक्सcm में मापा जाता है. इसके लिए डॉक्टर जो प्रक्रिया अपनाते हैं, उसे 'एमनीओटिक Fluid इंडेक्स सिंगल डिपेस्ट पॉकेट' या 'फ़ोर क्वाड्रेंट एमनीओटिक Fluid इंडेक्स' मेथड कहा जाता है. फ़ोर क्वाड्रेंट एमनीओटिक Fluid इंडेक्स प्रक्रिया में चारों क्वाड्रेंट्स में सबसे गहरी पॉकेट मापी जाती है, ताकि एमनीओटिक Fluid का वॉल्यूम पता चल सके. नार्मल केस में एमनीओटिक Fluid Index 8 से 24 cm के बीच होता है.

 

अगर एमनीओटिक Fluid इंडेक्स काम हुआ तो?

 

अगर एमनीओटिक Fluid वॉल्यूम 500 ml से कम या एमनीओटिक Fluid Index 5 cm से कम हो, तो उस अवस्था को ओलिगोहाईड्रमनिओस कहा जाता है. ये अवस्था प्रेगनेंसी में किसी भी वक़्त हो सकती है, लेकिन इसके Chances गर्भावस्था के आख़री तीन महीनों में ज़्यादा बढ़ जाते हैं. एमनीओटिक Fluid बच्चे की ग्रोथ, उसकी मांसपेशियों, उसके फेफड़ों, डाईजेस्टिव सिस्टम के विकास में कारगर होती है. इसकी कमी से Premature (अकाल) बर्थ, गर्भपात, पैदा होते ही बच्चे की मृत्यु जैसे कॉम्प्लीकेशन्स बढ़ जाते हैं और डिलीवरी का रिस्क भी. इसके बावजूद बच्चे की डिलीवरी नॉर्मल होती है, तो उसे जन्म के साथ ही कई शारीरिक बीमारियां पकड़ लेती हैं. हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, Preeclampsia (प्रेगनेंसी के दौरान ज़्यादा रक्तचाप और लीवर-किडनी जैसे अंगों को नुक्सान पहुंचना) जैसी बीमारियां ओलिगोहाईड्रमनिओस का ही नतीजा होती हैं. ओलिगोहाईड्रमनिओस से जूझ रही एक गर्भवती को काफ़ी देखभाल और जांच-पड़ताल की ज़रूरत होती है.

 

एमनीओटिक Fluid इंडेक्स के ज़्यादा होने पर

अगर एमनीओटिक Fluid की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा और एमनीओटिक Fluid इंडेक्स 24 cm से अधिक है, तो इसे Polyhydramnios पॉलीहाईड्रमनिओस कहा जाएगा.  इसके लक्षण शरीर के हिस्सों में Fluid का भरना, वज़न बढ़ना, सांस लेने में दिक्कत जैसी परेशानियां होती हैं. गर्भ की कुछ कंडीशंस, गर्भवती को डायबिटीज़, इंफेक्शन्स से भी कई दफ़ा एमनीओटिक Fluid बढ़ जाता है.

 

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अस्वीकरण : इस लेख में कही गयी बातें किसी भी तरह से प्रोफ़ेशनल मेडिकल सलाह, ट्रीटमेंट और मूल्यांकन का Substitute नहीं हैं. सबसे पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें.  हमारा मकसद सिर्फ़ आप तक सही जानकारी पहुंचाना है.

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