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स्तनपान ज़रूरी है, लेकिन कब और कितना... ये जानना और भी ज़्यादा ज़रूरी है

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स्तनपान ज़रूरी है, लेकिन कब और कितना... ये जानना और भी ज़्यादा ज़रूरी है

किसी ख़ूबसूरत तस्वीर से कम नहीं होती स्तनपान कराती एक मां.

 

प्रकृति ने औरत को कई तौहफ़ों से नवाज़ा है, उनमें से एक है स्तनपान कराना. एक मां और उसके बच्चे के लिए स्तनपान एक-दूसरे से जुड़ने की प्रक्रिया भी है. बच्चे के पूर्ण विकास के लिए मां का दूध ही सबसे ज़रूरी माना गया है, इसलिए इससे जुड़ी ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में एक मां को पता होना चाहिए.

 

बच्चे के जन्म से लेकर उसके बढ़ने तक, उसे कैसे स्तनपान कराना है, हमने इसकी एक सूची तैयार की है:

 

जन्म के ठीक दो घंटे बाद

ये समय मुश्किल पहला पड़ाव होता है, क्योंकि अभी तक मां-बच्चा, दोनों ही इससे अछूते रहे हैं. अगर आप दूसरी बार मां बन रही हैं, तो इससे पड़ाव के बारे में जानती होंगी, लेकिन फ़र्स्ट टाइम Mothers के लिए ये एक नया एहसास होता है. जन्म के दो घंटे बाद आप बच्चे को स्तनपान कराना शुरू कर सकती हैं. इस समय तक बच्चा थोड़ा एक्टिव होता है. शुरुआत है, इसलिए ज़्यादा से ज़्यादा स्किन कॉन्टैक्ट होने दें. धीरे-धीरे शिशु एडजस्ट कर लेगा. आप अपने डॉक्टर से पहली बार ठीक से स्तनपान के लिए सुझाव या मदद ले सकती हैं.

 

जन्म से 15 दिनों तक

बच्चे को दिन भर थोड़ा-थोड़ा फ़ीड करवाती रहें और उसका पैटर्न नोट कर लें कि उसे किस वक़्त भूख लग रही है. वैसे, इस समय आपको बच्चे को हर 24 घंटे में कम से कम 10-12 बार फ़ीड (स्तनपान) करना ज़रूरी है.

 

15 दिनों से 2 महीने तक

अभी उसका पेट और भूख दोनों बढ़ रही हैं, इसलिए उसे दिन भर में आपको स्तनपान कराना होगा. आपको हर 2 से 3 घंटे में उसे फ़ीड कराना है. पहले के मुक़ाबले अब वो ज़्यादा समय दूध पिएगा, ये टाइम पीरियड 25 से 45 मिनट तक हो सकता है. लंबा टाइम होने के कारण बच्चा फ़ीड करते हुए सो भी सकता है, ऐसे में उसे प्यार से जगा कर फ़ीड कम्पलीट करवाएं.

 

15 दिनों से 6 महीने तक

ये समय होता है, जब बच्चा भूख लगने पर उसे दर्शाना शुरू कर देता है. जैसे वो अपने होंठ मूव करना लगेगा, दूध पीने के इशारे करने लगेगा, चिढ़ने लगेगा और रोने लगेगा (ये भूख का सबसे बड़ा सिग्नल होता है)

 

2 से 6 महीने तक

इस समय तक बच्चा बढ़ने लगता है, स्तनपान करने की उसकी क्षमता और दूध पीने की लिमिट भी बढ़ जाती है. अब तक वो दिन भर में 7-8 बार फ़ीड करेगा और लगभग 15 से 25 मिनट के अंदर ख़त्म कर लेगा. इस समय तक बच्चे अपने आस-पास के माहौल को समझने लगते हैं और इसी वजह से कई बार दूध पीते हुए उनका ध्यान इधर-उधर होगा. बेहतर हो आप एकांत और शांत जगह पर ही उसे फ़ीड करवाएं ताकि उसका पेट भरा रहे.

 

6 माह से ज़्यादा

ये सबसे बेहतर समय होता है उसे दूध के अलावा कुछ अन्न देने का (जैसे सॉलिड फ़ूड). इसकी शुरुआत एक-एक कर के करें, यानी अगर आप दिन भर में 6-7 बार उसे फ़ीड कर रही हैं, तो 7 में से किसी 1 टाइम उसे सॉलिड फ़ूड दें. ध्यान रहे, अभी भी उसके लिए सबसे ज़रूरी मां का दूध है.

 

9 माह से ज़्यादा

इस समय तक बच्चे को 50 % पोषण खाने से और 50 % आपके दूध से मिलना चाहिए.

 

12 माह से ज़्यादा

WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइज़ेशन) के हिसाब से बच्चे को 2 साल का होने तक स्तनपान कराते रहना चाहिए. इस उम्र तक बच्चे को दिन में 4 दफ़ा (दलिया/ खिचड़ी) सॉलिड फ़ूड और बाकी समय मां का दूध देना बेहतर होगा. वैसे इस समय तक अधिकतर मां बच्चे का दूध छुड़वा देती हैं.

 

एक ज़रूरी बात, हर बच्चा अलग होता है और उसकी ज़रूरतें भी, इसलिए उसके हिसाब से हर चीज़ प्लैन करें. वो अपनी ज़रूरत के लिए आपको हर संकेत देगा, बस आपका उन संकेतों को पढ़ना ज़रूरी है. बस थोड़ी सी सतर्कता, और ये प्रक्रिया आप दोनों के लिए यादगार  रहेगी.

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