पहला तिमाही तो आपने संभाल लिया लेकिन दूसरी तिमाही कुछ कम नहीं. ये स्कैन्स ज़रूर कराइये I

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पहला तिमाही तो आपने संभाल लिया लेकिन दूसरी तिमाही कुछ कम नहीं. ये स्कैन्स ज़रूर कराइये I

प्रेगनेंसी के दूसरे तिमाही के दौरान कराये गए स्कैन्स, गर्भ में पल रहे शिशु के विकास का आकलन करने के साथ-साथ चिंताजनक परिस्थितियों का पता लगाने में सहायता करता है.

 

पहले तिमाही के बाद, दो और महत्वपूर्ण तिमाही की बारी आ जाती है. प्रेगनेंसी के पहले कुछ हफ़्तों में मतली और सुबह की बीमारी आमतौर पर दूसरे तिमाही की शुरुआत में होती है जो प्रेगनेंसी के सुख को कम कर देती है. ये वो समय है जब पेट बढ़ जाता है और शिशु के लात मारने का एहसास शुरू हो जाता है. यह वह समय भी है जब बच्चे और मां, दोनों के स्वास्थ्य का नियमित मूल्यांकन किया जाता है जिससे एक सुरक्षित प्रेगनेंसी होने में मदद मिलती है.



प्रेगनेंसी में अल्ट्रासोनोग्रफ़ी:

 

अल्ट्रासोनोग्रफ़ी जिसे आम तौर पर बच्चे के स्कैन से जाना जाता है, उस में एक सही फ़्रीकवेन्सी की साउंड वेव्स को मशीन के द्वारा गर्भशय में भेजा जाता है जो पेल्विक रीजन के कई हिस्सों से बाउंस हो कर वापिस आता है. इसकी मदद से कंप्यूटर एक चित्र बनाता है जिसके ज़रिये डॉक्टर फ़ीटस की ग्रोत और विकास को पहचानता है और कोई भी होने वाले असामान्यताएं को चेक करता है.  



दुसरे तिमाही में किये गए अल्ट्रासाउंड: अनॉमलि स्कैन

 

एनॉटमी स्कैन या अनॉमलि स्कैन दुसरे तिमाही का सबसे महत्वपूर्ण स्कैन है.

एनॉटमी स्कैन आम तौर पर प्रेगनेंसी के 18 से 22 सप्ताह के बीच में किया जाता है जिस वक़्त फ़ीटस के सभी ज़रूरी अंग बढ़ रहे होते हैं लेकिन फिर भी ज़रुरत पड़ने पर कसी प्रकार का सुधार किया जा सकता हो. जैसा कि नाम से पता चलता है, यह स्कैन्स बच्चे की अनॉटमी और ज़रूरी अंगों के विकास की जांच करता है.

 

अनॉमलि स्कैन्स से ये निम्नलिखित फ़ायदे होते है:

 

  • फ़ीटस के मूवमेंट को चेक करता है
  • उसके विकास को चेक करता है  
  • शरीर के सारे अंदरूनी अंगों को चेक करता है. दिल से ले कर किडनी और रीढ़ की हड्डी तक.
  • बच्चे का आराम से मूवमेंट होता रहे, इसके लिए गर्भशय में मौजूद एमनीओटिक फ़्लूइड को चेक करता हैं.
  • प्लसेंटा और अम्बिकल कॉर्ड की पोज़िशन को चेक करता है.
  • किसी भी प्रकार के क्रोमोज़ोमल असामान्यताओं के बारे में पता करता है.
  • सर्विक को चेक करता है और बर्थ कनाल को नाप कर आरामदायक वजाइनल डेलिवरी का अंदाजा लगाता है.



इन सबके साथ डॉक्टर ये सारी चीज़ें भी चेक करता है:

 

1) गर्भशय में कितने बच्चे हैं जिसकी पुष्टि कभी-कभी बीसवें हफ़्ते के बाद होती है.

2) बच्चे के सर का स्ट्रक्चर और आकार.

3) बच्चे के कटे हुए होंठों को चेक करता है.

4) बच्चे के हाथ-पैर की उंगलियों की गिनती करता है.

 

कभी-कभी बच्चे की पोज़िशन स्कैन के अनुकूल सही नहीं होती है. ऐसी परिस्थिति में सोनोग्राफ़र फिर से अपॉइंटमेंट देता है लेकिन स्कैन के साथ किसी भी प्रकार का रिस्क नहीं लेता.

 

इस स्टेज पर बच्चे का लिंग पता करने की संभावना होती है लेकिन भारत में इस पर प्रतिबंध है. भ्रूण हत्या की वजह से हर सोनोग्राफ़र आपसे हस्ताक्षर करवाता है जिस पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि आप बच्चे के लिंग क बारे में पूछताछ नहीं करेंगे.

 

दुसरे तिमाही के दौरान अन्य स्कैन्स

आम तौर पर अगर एनॉटमी स्कैन कुछ असामान्यता दिखाता है, तो डॉक्टर आपको उसके बाद एक या एक से अधिक स्कैन के लिए जाने के लिए कह सकता है. इस परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए. ऐसे में डॉक्टर के साथ अपने सभी विकल्पों की चर्चा करके उनके बताये गया सही उपाए को समझ कर आगे बढ़ना ही उचित  होता है.

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