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बच्चा अगर एक ही कहानी को बार-बार पढ़ कर सुनाने को कहे, तो उसे मना मत करना। ये उसके लिए फ़ायदेमंद है

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बच्चा अगर एक ही कहानी को बार-बार पढ़ कर सुनाने को कहे, तो उसे मना मत करना। ये उसके लिए फ़ायदेमंद है

हर बच्चे की तरह आपके हीरो/प्रिंसेस की भी कोई पसंदीदा स्टोरीबुक या किताब होगी। इस किताब को वो इतना पसंद करते होंगे, कि बार-बार इसमें लिखी हुई चीज़ें पढ़ते होंगे। या आपको उस किताब को बार-बार पढ़ कर सुनाने को कहते होंगे। मुझे याद है मेरी फेवरेट स्टोरी हाथी-चींटी की कहानी थी. ये कहानी मुझे मेरी बुआ ने सुनाई थी। गर्मियों की छुट्टियों में मैं जितनी बार बुआ से मिलने जाती, ये कहानी ज़रूर सुनती थी। हालांकि कुछ समय बाद बुआ मेरी इस आदत से परेशान हो गयी थी। मुझे भले ही ये कहानी सुनते हुए बोरियत नहीं होती थी, लेकिन बुआ अब इसे सुनाते हुए पक चुकी थी। उन्हें समझ नहीं आता था कि मैं उस एक ही स्टोरी को बार-बार क्यों सुनना चाहती हूँ. जवाब मेरे पास भी नहीं था, लेकिन आज है।

बच्चों का किसी ख़ास कहानी, किताब को बार-बार सुनना, पढ़ना एक फ़ायदेमंद आदत है। इसके फ़ायदे हैं:

उनका शब्दकोष बढ़ता है
शब्दों की समझ होती है  
शब्दों के उच्चारण को पकड़ पाते हैं
चीज़ों के ख़ास पैटर्न को समझते हैं
पढ़ने का प्रवाह, बोलने का प्रवाह सही होता है

हालांकि, इसके अलावा भी इस एक्सरसाइज़ के कुछ ऐसे महीन फ़ायदे हैं। जैसे, बार-बार एक ही स्टोरी को पढ़ने-सुनने से बच्चे को सुरक्षित महसूस होता है। उसे बार-बार एक ही तरह की तस्वीरें और शब्द पढ़ने से उसे आराम मिलता है और वो इसमें होने वाली घटनाएं प्रेडिक्ट (पूर्वागम) कर पाता है। बार-बार पढ़ कर घटनाओं के बारे में उसे पहले से पता रहता है और इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है।

वो जब भी उस कहानी को दोबारा सुनता है, उस कहानी से जुड़े बाकी पहलुओं के बारे में भी सोचता है, क्योंकि उसे स्टोरी पहले से पता रहती है. वो शब्दों, ड्रॉइंग्स पर ध्यान दे पाता है. इस प्रक्रिया में वो नए सवाल कर पता है।

बच्चों के लिए किसी स्टोरी को दोबारा पढ़ना एक तरह का मेडिटेशन है। उन्हें स्टोरी पहले से पता है इसलिए उस कहानी में खोने के बाद भी वो जगह उनके लिए अनजान नहीं है। उन्हें कहानी सुनाने वाले आप अनजान नहीं हैं। इसलिए वो इस प्रोसेस में अपने मन के साथ इधर-उधर भटक पाते हैं।

जब हम साथ में कोई कहानी पढ़ते हैं, तो हमारा कनेक्शन साथ पढ़ने वाले के साथ गहरा हो जाता है। शायद यही वजह है कि हमें बचपन की कहानियां अभी भी प्यारी लगती हैं। साथ पढ़ने से आपका फ़ोकस सिर्फ़ उस कहानी पर नहीं, बल्कि उसके आस-पास आपकी अपनी समझ और बातचीत भी होता है। ये चीज़ पढ़ने को और बेहतर बनाती है। शोधकर्ताओं के हिसाब से भी, कहानी को बार-बार पढ़ने के सेशन में बच्चे बेहतर परफॉर्म कर पाते हैं। दुनिया को समझने के लिए वो ज़्यादा प्रयास करते हैं।

जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता जाता है, वो दौड़ता है, भागता है, अपने वातावरण को समझने की कोशिश करता है। रीडिंग सेशन आप दोनों के लिए एक खूबसूरत याद तैयार कर के रखता है। उसका पढ़ते हुए आपसे सवाल पूछना या कहानी सुनते हुए सो जाना आप हमेसाह याद रखेंगी। ये आपको एक काम की तरह नहीं, बल्कि उस पल की तरह लगेगा, जो आप दोनों के रिश्ते को और गाढ़ा कर देगा। बच्चा ज़िन्दगी भर सोते हुए अपने बचपन की बेडटाइम स्टोरीज़ को याद करेगा।

ये बात बड़ों पर भी लागू होती है. 40 साल की उम्र में पढ़ने का एक्सपीरियंस आपके 20वें साल से बिलकुल अलग होगा। आपने 20वें साल में जो किताब पढ़ी होगी, 40 तक आते-आते उसके मायने बदल जाएंगे। इसमें आपके अनुभव, उतार-चढ़ाव जुड़ जाएंगे।

पानी और क़िताब के लिए एक बात कही जाती है, कि आप कभी उसी नदी को दोबारा पार नहीं कर सकते और कभी उस किताब को दोबारा नहीं पढ़ सकते हैं। हर बार किताब के मायने बदल जाते हैं, नदी का पानी बदल जाता है. और आप बदल जाते हैं।

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