स्तन पान की मूल बातें

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स्तन पान की मूल बातें

स्तन पान एक प्राकृतिक प्रक्रिया है लेकिन हर माँ इससे जुड़े जानकारियों से लैस नहीं होती है, विशेषकर जो पहली बार माँ बनी है। स्तन पान कराने की प्रक्रिया शुरुआत में काफी जटिल लग सकती है लेकिन धैर्य और दृढ़ता से आप इस कला में निपुण हो कर  इसकी मूलभूत बातों को समझने में सक्षम हो सकते हैं।

 

यद्यपि आपका नवजात शिशु सहजता से जानता है कि उसे स्तन पान कैसे करना है, आपको पता होना चाहिए कि स्तन पान कराने की प्रक्रिया को सक्षम करने के लिए बच्चे को सही तरीके से और आराम से कैसे पकड़ना है। यहां कुछ स्तनपान की जानकारियाँ  दी गई है जो प्रारंभिक चरण में आपकी मदद करेगा।

 

नई माताओं के लिए स्तन पान की जानकारियाँ:

 

दूध का स्राव

आपका दूध तीन अलग अलग चरणों में आएगा:

 

कोलोस्ट्रम

यह गाढ़ा  पीला पदार्थ है जो प्रसव के तुरंत बाद आता है। यह आपके बच्चे के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सभी आवश्यक विटामिन और प्रोटीन का मिश्रण है जो आपके बच्चे की  प्रतिरक्षा प्रणाली की रक्षा करने में मदद करेगा। इस चरण के दौरान नियमित रूप से चूसने से आपके शरीर को अधिक दूध पैदा करने का प्रोत्साहन मिलेगा।

 

संक्रमणकालीन दूध

आपकी डिलीवरी के दूसरे से पांचवें दिन के बीच कभी भी संक्रमणकालीन दूध का उत्पादन होगा। यह कोलोस्ट्रम की तुलना में थोड़ा पतला होता है और प्रोटीन की  मात्रा भी थोड़ी कम होती है। ये वसा और शक्कर का उच्च खुराक है। यह आपके बच्चे के वजन बढ़ाने के लिए आवश्यक है।

 

परिपक्व दूध

प्रसव के दो हफ्तों के बाद, आप एक पतले और सफ़ेद या पीले  दूध का उत्पादन शुरू कर देंगे जो स्किम्ड दूध की तरह होता है। यह पोषक तत्वों से भरा हुआ है जो आपके बच्चे के विकास के लिए आवश्यक है और बच्चे को जलय भी प्रदान करता है।

 

स्तन पान की प्रक्रिया

प्रारंभिक दिनों के दौरान इसके लिए बहुत दृढ़ता की आवश्यकता होती है। सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा ठीक से और आराम से आपके स्तनों के सामने है। आसानी से निगलने के लिए बच्चे का सिर आपके शरीर के बाकी हिस्से के साथ लाइन में रहना चाहिए।

 

स्तन के पास लाते ही आपका बच्चा खुद चूसना शुरू कर देगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो कुछ कोलोस्ट्रम बच्चे के होठों  पर निचोड़ने का प्रयास करें जिससे स्तन पान शुरू हो पाए। बच्चे को आपके पास आने दें जिससे वो बिना किसी ज़ोर के सही स्तन पान की प्रक्रिया सिख पाए।

 

अगर आप लगातार चूसने और निगलने की आवाज़ सुनती है तो आपको पता चल पायेगा की बच्चा सही तरीके से स्तन पान कर रहा है। जांच करे की बच्चे का होठ बाहर की तरफ निकला हुआ है और ना की उसके जीभ और होठो में टकराव है। अगर स्तन पान सही तरीके से नहीं होगा तो बच्चे को पर्याप्त दूध नहीं  मिलेगा और वो जल्दी थक सकता है।

 

स्तन पान की अवधि

इस पर कोई नियम नहीं है की आपके बच्चे को कितनी देर और कितनी बार स्तन पान कराना चाहिए। आप अपने सहजवृत्ति पर भरोसा करे और बच्चा जब भी भूखे होने का संकेत दे तब स्तन पान कराये। कुछ प्रचलित संकेतों में शामिल हैं:

बेचैनी के साथ कम आवाज में रोना

मुट्ठी चूसना या होठो पर मारना

आपके तरफ मुड़ना या स्तनों के पास लेटना जब आप बच्चे के गालो को सहलाते है।  इसे रूटिंग भी कहते है।

 

याद रखें

  • आपके फीड कराने का समय २०-३० मिनट के बिच हो सकता है। फीड कराने से पहले आप कुछ पिए और सुनिश्चित करे की बच्चे को आरामदायक स्तिथि में रखा है।
  • सुनिश्चित करे की पहला स्तन खाली होने पर दूसरा दें। बच्चे को फोरमिल्क और हिंदमिल्क दोनों की जरूरत है।

विचार व्यक्त

स्तनपान एक बहुत ही प्राकृतिक प्रक्रिया है और अंततः आप परीक्षण और त्रुटि के कुछ दौर के बाद इसे सही तरीके से प्राप्त करेंगे। हालांकि, यदि आपको यह मुश्किल लगता है तो आप अपने आस-पास के लोगो की सहायता प्राप्त कर सकते हैं। यदि आप अभी भी चिंतित हैं, तो एक लैक्टेशन सलाहकार से मिले जो आपको इस प्रक्रिया में  मदद कर सकता है।

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