क्या आप अपने बच्चे के दांतो से जुडी ये बातें जानते हैं?

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क्या आप अपने बच्चे के दांतो से जुडी ये बातें जानते हैं?

स्वस्थ दांत , स्वस्थ बचपन का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।

 

बच्चों के विकास और संपूर्ण स्वास्थ्य में दांतों का स्वस्थ होना एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चे में बोलने के विकास के लिए दांत महत्वपूर्ण हैं और यह बच्चों को खाना चबाने में भी सहायक हैं।

 

दांतो की सड़न बच्चों में देखी जाने वाली एक आम पुरानी बीमारी है। पूरी दुनिया में, 5 साल से कम उम्र के 50% प्रतिशत दांतो की सड़न अथवा कैविटी से प्रभावित होते हैं। कैविटी दांतों में छेद के रूप में दिखाई देती है जो दर्द का कारण बनती है या दांतों में पाए जाने वाले पदार्थ जैसे कैल्शियम के हटने -डिमिनरलिरिजेशन (विखनजीकरण)-के कारण सफेद धब्बे के रूप में दिखाई देती है।

 

विभिन्न शोध अध्ययनों के अनुसार, जिन बच्चो के दूध के दांतो (शिशु दन्त) में सड़न होती है, उन्हें बड़े होकर अपने स्थायी दांतों (परमानेंट टीथ ) में भी यह तकलीफ झेलनी पड़ सकती है।बचपन में दांतो का स्वास्थ्य, वयस्कता(एडल्टहुड) में भी दांतों के स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है ।

 

 

स्वस्थ दांत और दांतो की सड़न की रोकथाम के लिए शिशु में मुँह की स्वच्छता और उसका खान पान  महत्वपूर्ण है। एक कुपोषित बच्चे की तुलना एक स्वस्थ बच्चे में दांत की समस्याएं विकसित होने की संभावना कम होती है।

 

बच्चों में दांतों की सड़न (कैविटी)  के कारण:

 

शुरुआती बचपन की कैविटी  आमतौर पर प्लाक , मुँह की गन्दगी , और खाने पीने में अधिक चीनी के कारण होती है।

  • प्लाक एक पतली परत है जो दिन के दौरान दांत पर बनती है। इसमें बैक्टीरिया, खाने के कुछ टुकड़े, और लार (थूंक) शामिल हैं। प्लाक में मौजूद बैक्टीरिया खाने के छोटे टुकड़ों को तोड़ देता है और एसिड बनाता है जो बच्चे में संवेदनशील दांत की ऊपरी परत ( इनामेल) को नष्ट कर देता है। बच्चों में दांत की ऊपरी परत का हट जाना एक सामान्य रूप से पाई जाने वाली समस्या है ,जो गंदे दांतो और गंदे मुँह में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के कारण होती  है।
  • जूस, मिठाई, मीठे दूध इत्यादि जैसे अधिक चीनी वाली खाने की चीज़ों का लगातार सेवन बच्चों में कैविटी का मुख्य कारण है। जब दांत साफ नहीं होते हैं, तब चीनी बैक्टीरिया की तादात को बढ़ाने में सहायक होती है ।
  • मुंह में लार या थूंक, कार्बोहाइड्रेट को चीनी में बदल देता है। इसलिए, कार्बोहाइड्रेट, खमीर उठा कर बनाए गए (फर्मेन्टेड) खाद्य पदार्थ इत्यादि, बच्चों में दांतों की सड़न को बढ़ावा देते हैं ।
  • पहला दांत आने के बाद, बच्चों को सोते समय बोतल से दूध पिलाकर सुलाना या स्तनपान करना भी, कैविटी का कारण बनता है ।
  • कम पोषण के परिणामस्वरूप, दांतो ऊपरी परत (इनामेल) का कम विकास और कमजोर दांत,  बैक्टीरिया के जल्दी पनपने का अवसर बन जाते हैं और बाद में दांतों की सड़न का कारण बनते हैं।
  • कुछ मामलों में,बच्चों में बैक्टीरिया, संक्रमित माँ या बच्चे का ध्यान रखने वाले किसी इंसान से भी आ सकता है । गर्भावस्था के दौरान मां के दांतो का स्वस्थ होना, बच्चे के दांतों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

बच्चों के दांतो की देखभाल :

बच्चों के दांतो की देखभाल के लिए अनिवार्य बातें :

 

. मुँह को अच्छी तरह साफ़ रखना-

  • यदि आपका बच्चा टूथपेस्ट थूकने में सक्षम है, तो उसे दिन में २ बार दांत साफ़ करवाएं।इसके लिए आप फ्लोराइड टूथपेस्ट का प्रयोग करें।
  • बच्चों में दांतों की सड़न को रोकने में फ्लोराइड मिला हुआ पानी, फ्लोराइड वार्निश या पेस्ट  और सीलेंट (दांतो पर डेंटिस्ट द्वारा लगाई जाने वाली परत) भी सहायक होती हैं।
  • बच्चे के दांत आने से पहले ही बच्चों के मसूड़ों को गरम पानी में भीगे कपडे से साफ़ करते रहने से कैविटी को दूर रखा जा सकता है ।
  • दांतों के बीच फ़्लॉस से सफाई करने से प्लाक की समस्या कम की जा सकती है ।
  • दांत का सड़ा हुआ भाग निकल कर वहाँ एक पदार्थ भर दिया जाता है, जिससे बैक्टीरिया आस पास के दांतो में नहीं फैलता ।
  • बच्चे का पहला दांत आने के बाद से ही दन्त चिकित्सक (डेंटिस्ट) के पास जाना तथा समय समय पर जांच करवाना ज़रूरी होता है, इससे शुरुआत में ही दांतों की सड़न को पहचाना और रोका जा सकता है ।

 

२ . बच्चो को सही आहार देना  भी दांतो को स्वस्थ रखने में सहायक है। इसमें ये बातें ज़रूरी हैं :

  • सप्लीमेंट्स (दवा के रूप में) अथवा भोजन में ऐसे खाद्य पदार्थ हों, जिनमे कैल्शियम और फ्लोराइड जैसे खनिज (मिनरल) की मात्रा अधिक हो, इनसे हड्डियां और दांत मज़बूत बनते हैं  ।
  • बच्चे को संतुलित आहार दें जिसमे चीनी की सही मात्रा हो । यह बच्चों के दांतो के लिए लाभकारी है।

 

३ . बच्चों के दांतों और मुँह को स्वस्थ रखने के लिए अच्छी आहार संबंधी आदतों को बनाए रखना आवश्यक  है।

  • अपने बच्चे को अक्सर चीनी न खिलाएं ।
  • सोते समय बच्चे को मीठे जूस या मीठा दूध, बोतल में न दें ।
  • 1 वर्ष की उम्र में एक बाद अपने बच्चे के लिए एक बोतल के बजाय एक सिपर का उपयोग करें।
  • बच्चे को लंबे समय तक चुसनी (पैसिफायर) न दें खासकर जब उसमे शहद या कोई और मीठा पदार्थ भरा हो ।

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