बच्चों के लिए यौन शिक्षा क्यों ज़रूरी है

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बच्चों के लिए यौन शिक्षा क्यों ज़रूरी है

हाल ही में एक खबर पढ़ने को मिली -घटना के अनुसार एक 12 साल की लड़की के साथ उसके पिता यौन शोषण करते थे। लेकिन वह जानती नहीं थी कि उसके साथ जो हो रहा है वह गलत है। जब स्कूल में गुड टच और बेड टच के बारे में बताया गया तो उसे पता चला कि इस बारे में गलत और सही क्या है।


न्यूज़ के अनुसार पीड़िता ने स्कूल में गुड टच बेड टच की जानकारी मिलने के बाद ,अपनी सहेली के साथ घर पर होने वाले यौन शोषण की बात की तो सहेली ने अपने स्कूल के प्रिंसिपल को सूचित किया। पोस्को अधिनियम, 376 और 506 के आईपीसी की धारा 4 के तहत पीड़िता के पिता के खिलाफ गुड़गांव के बाजघरा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में लड़की की माँ को पता भी था लेकिन वह भी दबाव में बच्ची के लिए कुछ ना कर पाई। अगर स्कूल में ये बातें न हो पाती तो यह सब हमेशा की तरह चलता रहता।


यह विशेष मामला महत्वपूर्ण है क्योंकि शोध से पता चला है कि ज़्यादातर बच्चों को उनके करीबी द्वारा दुर्व्यवहार किया जाता है। यौन शिक्षा की कमी के कारण अक्सर बच्चे इस दुर्व्यवहार से अनजान होते हैं।


यह दुखद है कि भारत में भी इस तरह की घटनाओं का बड़ा इतिहास और लम्बा चौड़ा वर्तमान है। दिन-प्रतिदिन बढ़ने वाली इन निर्मम और अमानवीय घटनाओं के प्रति कोई बदलाव आता नहीं दिखाई दे रहा है। इसमें दोनों ही लिंग के बच्चे प्रभावित है जिसमे लड़कियों की स्थिति ज़्यादा खराब है।


हम इन घटनाओं के बारे में खुलकर बात नहीं करना चाहते, न ही इन बच्चों के माता-पिता करना चाहते है। अधिकतर मामलों में बच्चों के साथ इस तरह का दुर्व्यवहार कोई नज़दीकी सम्बन्धी या रिश्तेदार ही कर राहा होता है। इसलिए यह सब बातें एक परिवार की गरिमा को ठेस पहुँचाती है। इसे परिवार के बीच ही ख़तम करना ठीक माना जाता है।


इस बात से इन निर्दयी लोगों की हिम्मत और बढ़ती है। बच्चो के साथ वैसे भी सेक्शुएलिटी को लेकर कोई बात घर में नहीं की जाती और उस पर इन बातों को छुपाने के लिए डराया भी जाता है। इसलिए ये मामले उभरकर सामने नहीं आ पाते। इस तरह ऊपर से सामान्य दिखने वाले सम्बन्ध भी इतनी भयानक तस्वीर को छुपाकर बैठे हुए हो सकते है।


इस तरह की घटनाएँ बच्चों के मन में डर बनाती है, उनके मानसिक विकास को अवरुद्ध करती है, सेक्शुएलिटी को लेकर असामान्य व्यवहारों को बढ़ावा देती है। इसलिए माता-पिता को चाहिए की वह अपने बच्चो से इस बारे में खुलकर बात करने का प्रयास करें।


सेक्शुएलिटी और शिक्षा


कई लोग सेक्स शिक्षा को सामान्य शिक्षण में जोड़ना गलत मानते है। यह कहना बिलकुल गलत नहीं होगा की ऐसे लोगो में यौन शिक्षा के लिए गंभीरता नहीं है। जब ये लोग सत्ता में होते है और इस तरह के निर्णयों को दबाव में पूरा करवाया जाता है, तब वे भी समाजिक दोषी ठहराए जा सकते है। एक रिपोर्ट के अनुसार एक फरमान जारी किया गया था कि सारी किताबों से सेक्स, सेक्शुएलिटी से सम्बन्धित सारे शब्द हटा दिए जाए। बेशक इन लोगो को न तो शिक्षा का कोई इल्म है और न ही यौन शोषण की घटनाओं को कम या ख़त्म का कोई उद्देश्य।


सामाजिक दबाव


हर हालत में इन बातों को छुपाना गलत है। इस बारे में खुलकर बात करना और बच्चों को सिखाना ज़रुरी है। जब वे अपने साथ हो रहे व्यवहार का विश्लेषण कर गुड टच और बेड टच को पहचानते है, तो ही वह अपने साथ हो रहे गलत व्यव्हार के बारे में बता पाएंगे। इसके लिए स्कूल शिक्षा में इस बात को शामिल करना एक बेहतर उपाय है। इसे हमारी संस्कृति की अवहेलना मानना एक ख़राब मानसिकता को दर्शाता है। संस्कृति का नाम जोड़कर इस तरह की घटनाओं को बढ़ावा देना गलत है।


इसके साथ ही पारिवारिक माहौल में बदलावों की ज़रुरत महसूस होती है। जागरूकता से माता- पिता और बच्चे  दोनों ही इस तरह की घटनाओं को रोक सकते है।

 

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