जानिए ओवुलेशन क्या होता है?

जानिए ओवुलेशन क्या होता है?

20 Jan 2022 | 1 min Read

Mousumi Dutta

Author | 45 Articles

 

हर लड़की के लिए माँ बनना उसके नारी जीवन की पूर्णता का सूचक होता है। यह तो सभी को पता है कि माँ बनने की प्रक्रिया बहुत लंबी होती है। इस प्रक्रिया को समझने के लिए गर्भधारण कैसा होता है, इस बात को पहले समझने की जरूरत है। वैसे तो बहुत कम लड़कियों को ही शरीर में होने वाले परिवर्तनों या हार्मोनल बदला‍व होने के कारणों के बारे में सही तरह से पता होता है। इसलिए गर्भधारण करने के लिए शरीर के जरूरतों और बदलावों को समझने की पहले जरूरत है।

वैसे तो प्रेग्नेंट होना और गर्भ का ठहरना बहुत लंबी प्रक्रिया होती है। हमें पता है कि आपके मन में कई तरह से सवाल चल रहे होंगे जैसे, ओवुलेशन क्या होता है, कैसे और कब ओवुलेशन (Ovulation) होता है? क्या ओवुलेशन के प्रक्रिया के ऊपर ही गर्भधारण करना निर्भर करता है। ओवुलेशन होने के लक्षण और संकेत क्या होते हैं, प्रेगनेंसी में इसका क्या महत्व है आदि अनेकों सवालों का जवाब हम आगे धीरे-धीरे देंगे।

बहुत लड़कियों के मन में गर्भधारण करने की प्रक्रिया के बारे में जानने की जिज्ञासा रहती है, लेकिन वे इसके बारे में डॉक्टर से या दूसरों से खुलकर पुछ नहीं पाती। तो फिर देर किस बात की, चलिए आपकी जिज्ञासाओं का शमन एक-एक करके करते हैं। सबसे पहले जानते हैं कि आखिर यह ओवुलेशन क्या होता है?

ओवुलेशन (Ovulation) क्या होता है?

ओवुलेशन मासिक धर्म चक्र का अंग है। ओवुलेशन को डिंबोत्सर्जन भी कहते हैं, यह प्रक्रिया तब शुरू होती है जब अंडाशय (Ovary) में से अंडा निकलता है। वैसे तो हर बार पीरियड्स के दौरान शरीर से रिप्रोडक्शन हार्मोन्स ओवरी को उत्साहित करते हैं, जिसके कारण अपरिपक्व 15-20 अंडे जिन्हें ओसाइट्स (oocytes) कहते हैं, उनमें परिपक्व होने की प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन उनमें से एक ही अंडा परिपक्व होता है, वह स्पर्म यानि वीर्य के साथ मिलने के लिए तैयार होता है यानि फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया शुरू होती है। अगर अंडा फर्टिलाइज्ड हो गया तो वह यूटेरस में चला जाता है और फिर विकसित होने लगता है। जो अंडा फर्टिलाइज्ड नहीं होता है, वह पीरियड्स के माध्यम से निकल जाता है। यानि महिला के गर्भाशय से अंडे के निकलने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। अब आपको ओवुलेशन क्या होता है, इसके बारे में थोड़ी जानकारी मिल गई होगी।

ओवुलेशन साइकिल कब शुरू होता है?

जैसा कि सभी जानते हैं कि लड़कियों में आम तौर पर मासिक धर्मचक्र या ॠतुचक्र 28 दिनों का होता है। उसके हिसाब से ओवुलेशन साइकिल पीरियड 14वें दिन से शुरू होगा। लेकिन सभी महिलाओं का पीरियड्स 28 दिनों का नहीं होता, इसलिए ओवुलेशन भी 14वें दिन के आगे-पीछे जा सकता है। यहाँ तक कि कई तरह के बीमारियों की वजह से या दवाईयों के कारण ओवुलेशन का समय इधर-उधर होना सामान्य बात होता है।

क्या आप जानती हैं कि अक्सर लड़कियों का मासिक धर्म 10-15 वर्ष की आयु में ही शुरू हो जाता है। पीरियड्स शुरू होते ही वह ओवुलेट करना शुरू कर देती हैं यानि गर्भधारण करने की क्षमता उनमें आ जाती है।

कहने का मतलब यह है कि पीरियड्स शुरू होने के 10-15 दिन के बीच अंडा निकलने लगता है, इस प्रक्रिया या समय अंतराल को ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में ओवुलेशन 11वें से 21वें दिनों के बीच में कभी भी हो सकता है।

आम तौर पर मेनोपॉज होना 50 साल के बाद शुरू हो जाता है, और तब से ओवुलेशन होना बंद होने लगता है। यानि ओवुलेशन बंद होने के स्थिति को मेनोपॉज या रजोनिवृत्ति (menopause) कहते हैं।

 

ओवुलेशन कितने दिनों तक रहता है?

ओवुलेशन की प्रक्रिया तब शुरू होती है जब शरीर से फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (follicle-stimulating hormone) निकलता है। यह विशेषकर पीरियड्स होने के 6 से 14 दिनों के बीच होता है। यह हार्मोन ओवरी के भीतर अंडे को परिपक्व होने और अंडे को निकलने की प्रक्रिया में मदद करता है।

एक बार जब अंडा मैच्योर हो जाता है तब शरीर ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) रिलीज करता है, जिससे अंडा शरीर के बाहर निकलता है यानि ओवुलेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। एलएच के बढ़ने के बाद 28 से 36 घंटों में ओवुलेशन हो सकता है।

जब पुरूष और स्त्री एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करते हैं, तब पुरूष का स्पर्म सेल या शुक्राणु महिला के शरीर में 5 दिनों तक रहता है। ओवरी से जो अंडा निकलता है, वह 12-24 घंटे तक फर्टिलाइज होने के लायक रहता है।

पीरियड के समय जब अंडाणु ओवरी से निकलता है, ओवुलेशन के उस वक्त को फर्टाइल विंडो या ओवुलेशन पीरियड फॉर प्रेगनेंसी कहा जाता है। कहने का मतलब है कि ओवुलेशन के 5 दिन पहले और ओवुलेशन के दिन सेक्स करने से प्रेग्नेंट होने की संभावना बढ़ जाती है। क्या आपको पता है कि पुरूष का वीर्य महिला के प्रजनन पथ में
संयोग के बाद 5 दिनों तक रहता है। यानि पुरूष का शुक्राणु ओवुलेशन के समय महिला के फैलोपियन ट्यूब में रहने पर प्रेगनेंसी की संभावना कुछ हद तक बढ़ जाती है।

ओवुलेशन होने के क्या लक्षण या संकेत होते हैं?

यह हर महिला का सवाल होता है प्रेग्नेंट होने के लिए ओवुलेशन को कैसे ट्रैक करें? कैसे पता चलेगा कि ओवुलेशन का सही समय आ गया है? ओवुलेशन के समय सेक्स करने पर प्रेग्नेंट होने का चांस बढ़ जाता है। इसके लिए आपको ओवुलेशन होने के लक्षणों यानि अपने शरीर में होने वाले बदलावों की तरफ नजर रखना होगा और ओवुलेशन होने के लक्षणों या संकेतों को समझना होगा। तो चलिए ओवुलेशन होने के लक्षणों को समझने के लिए निम्नलिखित बदलावों को समझते हैं-

  • वैसे तो जिन महिलाओं का पीरियड्स समय पर होता है, उनका ओवुलेशन का समय निश्चित होता है।
  • कहने का मतलब है कि जिन महिलाओं का मासिक धर्मचक्र 28 दिनों का होता है, उनका ओवुलेशन का समय पीरियड्स होने के 14वें दिन होता है।
  • जिन महिलाओं का पीरियड्स रेगुलर नहीं होता है, उनका ओवुलेशन का समय भी अनिश्चित होता है। लेकिन इसके लिए मायुस होने की जरूरत नहीं, बस शरीर में होने वाले बदलावों को महसूस करना होगा।

 

ओवुलेशन होने के लक्षण-शरीर का बेसल तापमान का बढ़ जाना:

अगर सुबह के समय आपके शरीर का तापमान सामान्य से ज्यादा होता है तो यह ओवुलेशन की प्रक्रिया शुरू होने का संकेत होता है।

 

ओवुलेशन होने के लक्षण- सेक्स संबंध बढ़ाने की प्रबल इच्छा:

अगर इन दिनों आप में सेक्स करने की इच्छा बढ़ गई है तो आपको ओवुलेशन का संकेत समझ जाना चाहिए। असल में फर्टाइल फेज होने के कारण शरीर में इसकी इच्छा जागृत होती है।

 

ओवुलेशन होने के लक्षण- स्तन का संवेदनशील होना:

जब आपका स्तन संवेदनशील हो जाता है, यह ओवुलेशन शुरू होने का संकेत होता है। इसके लिए अपने स्तनों को स्पर्श करके देखें।

ओवुलेशन होने के लक्षण-सर्विकल म्यूकस:

ओवुलेशन प्रक्रिया के दौरान सर्विकल म्यूकस में बदलाव होते हैं। इस दौरान अंडे की सफेदी के समान चिकना और पतला योनि स्राव होता है।

  • ओवुलेशन के प्रक्रिया के दौरान सर्विक्स या गर्भाशय ग्रीवा नरम होकर खुल जाता है।
  • इस दौरान ब्लड स्पॉटिंग भी होते हुए देखा जा सकता है।
  • ओवुलेशन की प्रक्रिया के दौरान योनि या वजाइना में सूजन हो सकती है।

ओवुलेशन के समय गर्भाशय ग्रीवा (cervix) में क्या बदलाव होते हैं?

शायद आपको पता नहीं कि सामान्य अवस्था में सर्विक्स थोड़ा नीचे की तरफ, कठोर और बंद होता है। जैसे-जैसे ओवुलेशन का समय आता है, वैसे-वैसे सर्विक्स का मुँह नरम होकर थोड़ा ऊपर की ओर उठ जाता है। सर्विक्स में दो उंगलियों से इस बदलाव को जाँचा जा सकता है। इसके अलावा ओवुलेशन को ट्रैक करने के लिए ओवुलेशन चार्ट का भी सहारा ले सकते हैं।

  • यदि दो मासिक धर्म चक्र के बीच आपको हल्का स्पॉटिंग दिखाई पड़ता है तो यह ओवुलेशन के कारण हो सकता है।
  • शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाने के कारण इस समय स्पॉटिंग देखा जाता है।
  • रक्त स्राव अगर हल्का गुलाबी रंग का हो तो यह संकेत होता है कि ब्लड में सर्वाइकल फ्लूइड मिला हुआ है, जो ओवुलेशन के दौरान निकलता है।

 

ओवुलेशन पेन क्या होता है? क्या ओवुलेशन पेन के लक्षण भी होते है?

अक्सर आपने महसूस किया होगा कि पीरियड शुरू होने के कुछ दिन पहले पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसा महसूस होने लगता है। इस दर्द को ओवुलेशन पेन कहते हैं। इस प्रकार का पेट दर्द पीरियड शुरू होने के लगभग दो सप्ताह पहले महसूस होता है। कुछ महिलाओं में यह दर्द पल भर के लिए होता है तो कुछ में यह दर्द बहुत देर के लिए रहता है।

चलिए अब बात करते हैं कि ओवुलेशन पेन के क्या लक्षण होते हैं-

आपको पता ही होगा कि महिला के गर्भाशय के दोनों तरफ अंडाशय होता है। प्रत्येक बार पीरियड्स के दौरान एक अंडाशय से अंडा निकलता है। जिसके कारण हर बार पेट में दर्द कभी दाहिने तरफ होता है तो कभी बाएं तरफ होता है। क्योंकि एक बार अंडा यदि बाएं अंडाशय से निकलता है तो दूसरी बार दाहिने अंडाशय से निष्कासित होता है।

ओवुलेशन का पता लगाने के लिए किस प्रकार के किट और टेस्ट या ओवुलेशन पीरियड कैलकुलेटर का इस्तेमाल किया जाता है?

  • आप ओवुलेशन का पता ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट के माध्यम से भी लगा सकते हैं। आप घर पर रहकर ही ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट या ओपी के जरिए ओवुलेशन का पता लगा सकते हैं। ओवुलेशन के दौरान शरीर में ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (Luteinizing hormone) का स्तर बढ़ जाता है, इस प्रेडिक्टर किट के माध्यम से इस हार्मोन के प्रोडक्शन में बढ़ोत्तरी के बारे में पता लगा सकते हैं।
  • बीबीटी यानि बेसल बॉडी टेम्परेचर (Basal Body Temperature) के माध्यम से भी ओवुलेशन का पता लगाया जा सकता है। जैसा कि हमने पहले की बताया है कि ओवुलेशन के दौरान सुबह उठने के बाद शरीर का तापमान कम से कम 0.2० सेंटीग्रेड बढ़ जाता है। इसके लिए कम से कम 2 घंटे की भरपूर नींद की जरूरत होती है।
  • आप ओवुलेशन का पता लगाने के लिए ओवुलेशन पीरियड कैलेंडर का भी सहारा ले सकते हैं। आजकल कई तरह के मोबाइल एप या वेबसाइट हैं जिसके द्वारा इसका पता लगाया जा सकता है।

अब तक के विश्लेषण के आप समझ ही चुके होंगे कि आखिर ओवुलेशन होता क्या है और प्रेगनेंसी में इसकी क्या भूमिका है। हमने इस लेख में आपके मन में चलने वाली सारी संभावित प्रश्नों का जवाब देने की कोशिश की है। आशा करते हैं यह जानकारी आपके जिज्ञासाओं को शांत कर पाई होगी।

#swasthajeevan #momhealth #planningababy

Home - daily HomeArtboard Community Articles Stories Shop Shop