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क्या बच्चे को डिब्बे का दुध देना सही है।
आपको जीवन की सबसे बड़ी खुशी, जो है माँ बनने की, मुबारक हो” शुभकामनाओं से भरा यह संदेश आप उस पल से सुन रहीं है जब से एक नन्ही जान आपके हाथों में आई है। इस नन्ही जान के जब मासूम हाथों ने आपको छूकर एक नयी जिंदगी दी है। उसके मासूम होठों को जब आपने अपनी छाती से लगाया तब एक अनोखे एहसास से आप भर गईं। अब अगला सवाल बहुत से नवप्रसूता के मन में आता है कि नवजात को डिब्बे का दूध देना चाहिए या नहीं? इस प्रश्न को हल करने में हम आपकी मदद करते हैं।
1)डिब्बे के दूध से जुड़े कुछ तथ्य
बाजार में मिलने वाले बच्चों को पिलाने के लिए डिब्बे के दूध को अँग्रेजी में फोर्मूला मिल्क भी कहते हैं। वैसे तो नवप्रसूता के लिए बच्चे को स्तनपान करवाना हर स्थिति में उपयुक्त होता है। लेकिन कभी-कभी कुछ स्थितियाँ ऐसी होती हैं जब नवजात शिशु को फोर्मूला मिल्क या डिब्बे का पाउडर वाला दूध देना पड़ सकता है। यह स्थितियाँ निम्न में से कोई भी हो सकती हैं:
2)माँ की सुविधा
कभी-कभी नवप्रसूता को आवश्यकता से अधिक आराम की ज़रूरत हो सकती है। ऐसे में स्तनपान उस आराम में बाधा बन जाता है। इसलिए इस स्थिति में माँ को थोड़ा आराम का समय देने के लिए नवजात को डिब्बे का दूध दिया जा सकता है।
3)स्तनों में दर्द
कुछ महिलाओं के स्तनों में सूजन और दर्द होने के कारण वो नवजात को स्तनपान करवाने में मुश्किल महसूस करती हैं। इसलिए इस हालत में डिब्बे का दूध उनकी मदद कर सकता है।
4)समय पर दूध अनिवार्य
नवजात शिशु को पहले कुछ समय तक हर थोड़े अंतराल पर भूख लगती है और से दूध की आवश्यकता होती है। ऐसे में महिलाएं बाजार में मिलने वाले मिल्क-पंप की मदद से स्तन का दूध फ्रिज में रख कर बाद में इस्तेमाल कर सकतीं हैं। लेकिन यह सुविधा भी कामकाजी महिलाओं के लिए कभी-कभी बहुत तकलीफदेह होती है। इसलिए इस अवस्था में दिन में ज़रूरत पड़ने पर नवजात शिशु को डिब्बे का दूध देने में कोई बुराई नहीं है।
5) भोजन पर प्रतिबंध
स्तनपान करवाने वाली महिला के भोजन पर प्रतिबंध होता है। यह प्रतिबंध उस प्रत्येक भोजन पर होता है जिसके सेवन से शिशु को किसी भी प्रकार से नुकसान होने की संभावना होती है। जैसे मछ्ली पसंद करने वाली महिलाएं इसे स्तनपान की अवधि में नहीं खा सकतीं हैं। इसका कारण मछ्ली में पारे की मात्रा अधिक होती है जो बच्चे को स्तनदूध के रूप में नुकसान कर सकती है। यही स्थिति चाय-काफी में कैफीन की मात्रा होने के कारण भी होती है। इसलिए इनमें से किसी भी स्थिति में नवप्रसूता डिब्बे का दूध शिशु को दे सकती है।
6) किसी बीमारी के कारण
कभी-कभी नवजात शिशु माँ के दूध को हजम नहीं कर पाते हैं। इसी प्रकार माँ को भी कभी-कभी ऐसा कोई रोग हो सकता है जिसके इलाज से स्तन का दूध नवजात के लिए हानिकारक हो सकता है। इसलिए ऐसा कुछ भी होने पर नवजात को डिब्बे का दूध दिया जा सकता है।
वैसे तो माँ के स्तनदूध का कोई प्रतिस्थापन हो नहीं सकता है। लेकिन यदि किसी प्रकार की आपतस्थिति उत्पन्न हो जाये तो डिब्बे के फॉर्मूला दूध को अपनाने में कोई नुकसान नहीं होता है।


Roop Tara

Helpful post

Isha Pal

बहुत उपयोगी जानकारी है

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