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;;;;;;; अम्मा, तुम हम सबको बहुत डाँटती थी -
“नल धीरे खोलो... पानी बदला लेता है!
अन्न नाली में न जाए, नाली का कीड़ा बनोगे!
;;;;;;;;; सुबह-सुबह तुलसी पर जल चढाओ,
;;;;;;;;; बरगद पूजो,
;;;;;;;;; पीपल पूजो,
;;;;;;;; आँवला पूजो,
;;;;; मुंडेर पर चिड़िया के लिए पानी रखा कि नहीं?
;;;; हरी सब्जी के छिलके गाय के लिए अलग बाल्टी में डालो।
; अरे कांच टूट गया है। उसे अलग रखना। कूड़े की बाल्टी में न डालना, कोई जानवर मुँह न मार दे।
;;;;; सत्यानाश... ये हरे छिलके कूड़े में किसने; डाले, नरक में भी जगह नहीं मिलेगी........
;;;;; माफ़ करना माँ, तुम और तुम्हारी पीढ़ी इतनी पढ़ी नहीं थी पर तुमने धरती को स्वर्ग बनाए रखा,
;;;;;; और हम चार किताबे पढ़ कर स्वर्ग-नरक की तुम्हारी कल्पना पर मुस्कुराते हुए धरती को नर्क बनाने में जुटे रहे।
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;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; जिसने भी लिखा 👆
;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;; बहुत अच्छा लिखा😊 #babychakra #hindileaderboard #hindimoms #hindihappyhours


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