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1. डेयरी उत्पाद

चूंकि आप गर्भवती हैं, तो आपको अपने और अपने शिशु के विकास के लिए ज़्यादा प्रोटीन और कैल्शियम की ज़रूरत होगी। 19 से 50 साल तक की उम्र वाली गर्भवती महिला के शरीर को रोज़ाना 1,000mg कैल्शियम की ज़रूरत होती है। (1) इसलिए आप अपने खान-पान में डेयरी उत्पादों को ज़रूर शामिल करें। दही, छांछ, दूध, आदि जैसे डेयरी उत्पाद गर्भवती महिला और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद होते हैं। ध्यान रहे कि गर्भवती महिला को पाश्चुरीकृत डेयरी उत्पादों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। (2)

2. ब्रोकली और हरी पत्तेदार सब्ज़ियां

गर्भवती महिलाओं को अपने खान-पान में हरी पत्तेदार सब्ज़ियां ज़रूर शामिल करनी चाहिए। इसलिए, आप पालक, पत्तागोभी, ब्रोकली (एक प्रकार की गोभी), आदि जैसी सब्ज़ियां ज़रूर खाएं। पालक में मौजूद आयरन गर्भावस्था के दौरान खून की कमी को दूर करता है। (3)

3. सूखे मेवे

गर्भावस्था में सूखे मेवों को भी अपने खान-पान में शामिल करें। मेवों में कई तरह के विटामिन, कैलोरी, फ़ाइबर, ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, आदि पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफ़ी अच्छे होते हैं। अगर आपको एलर्जी नहीं है, तो अपने खान-पान में काजू, बादाम, अखरोट, आदि को शामिल करें। अखरोट में भरपूर मात्रा में ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड होता है। इसके अलावा, बादाम और काजू भी गर्भावस्था में फ़ायदा पहुंचाते हैं। (4)

4. शकरकंद

गर्भावस्था में शकरकंद (स्वीट पोटैटो) खाना भी काफ़ी फ़ायदेमंद होता है। इसमें विटामिन-ए होता है, जो शिशु की देखने की शक्ति को विकसित करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन-सी, फ़ोलेट और फ़ाइबर भी मौजूद होते हैं। (5) (4)

5. साबूत अनाज

गर्भावस्था के दौरान साबूत अनाजों को अपने आहार में ज़रूर शामिल करें। खासतौर पर गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही के दौरान साबूत अनाजों का सेवन फ़ायदेमंद होता है। इससे आपको भरपूर कैलोरी मिलती है, जो गर्भ में शिशु के विकास में मदद करती है। आप साबूत अनाज के तौर पर ओट्स, किनोआ, भूरे चावल, आदि को अपने आहार में शामिल कर सकती हैं। इन अनाजों में प्रोटीन की प्रचूर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा, इनमें फ़ाइबर, विटामिन-बी और मैग्नीशियम भी मौजूद होता है, जो गर्भावस्था में फ़ायदा पहुंचाते हैं। (6)

6. एवोकाडो (रुचिरा)

एवोकैडो एक ऐसा फल है, जिसे हर गर्भवती महिला को खाने की सलाह दी जाती है। इसमें भरपूर मात्रा में फ़ोलेट होता है, जो गर्भ में पल रहे शिशु के मस्तिष्क और उसकी रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए बेहद फ़ायदेमंद होता है। इसके अलावा, एवोकैडो में विटामिन-के, पोटैशियम, कॉपर, मोनोअनसैचुरेटेड वसा, विटामिन-ई, आदि भी मौजूद होता है। इसलिए, गर्भवती महिला को रोज़ाना एक एवोकैडो खाने की सलाह दी जाती है। (7)

7. कॉड लीवर तेल

गर्भावस्था में कॉड लीवर तेल का सेवन भी फ़ायदेमंद होता है। यह तेल कॉड मछली के लीवर से बनाया जाता है। इसमें प्रचूर मात्रा में ओमेगा 3 फ़ैटी एसिड, विटामिन-डी और विटामिन-ए होता है, जिन्हें शिशु की आंखों और दिमाग के विकास के लिए ज़रूरी माना जाता है। इसके अलावा, कॉड लीवर तेल गर्भ में पल रहे शिशु को टाइप-1 मधुमेह के खतरे से भी बचाता है। एक शोध में यह साबित हुआ है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कॉड लीवर तेल का सेवन करती हैं, उनके शिशु को मधुमेह होने का खतरा कम होता है। (8) ध्यान रखें कि गर्भावस्था में उतनी ही मात्रा में कॉड लीवर तेल का सेवन करें, जिससे आपके शरीर को 300 माइक्रोग्राम विटामिन-ए और 100 माइक्रोग्राम विटामिन-डी की आपूर्ति हो जाए। इससे ज़्यादा मात्रा में कॉड लीवर तेल का सेवन करने से भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। (9)

8. अंडा

अंडा पौष्टिक तत्वों का खज़ाना होता है। रोज़ अंडा खाने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है। इसलिए, गर्भवती महिलाओं को भी अपने आहार में अंडे को शामिल करना चाहिए। अंडे में प्रोटीन, कोलीन, बायोटीन, कोलेस्ट्रोल, विटामिन-डी और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके अलावा एक बड़े अंडे में 77 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसलिए, अंडे को गर्भवती महिलाओं के लिए काफ़ी फ़ायदेमंद माना जाता है। (10)

9. बिना वसा का मांस

अगर गर्भवती महिला मांसाहारी है, तो उन्हें अपने खान-पान में मीट को ज़रूर शामिल करना चाहिए। मांस में भरपूर मात्रा में लौह तत्व (आयरन), ज़िंक और विटामिन-बी 12 होता है। अक्सर गर्भवती महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी हो जाती है। इसकी वजह से उनके खून में हीमोग्लोबिन का स्तर गिरने लगता है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं के लिए मांस का सेवन काफ़ी फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, गर्भवती महिलाओं को बिना वसा वाले मांस को ही अपने खान-पान में शामिल करना चाहिए। (11)

10. ज़्यादा से ज़्यादा पानी पिएं

हर व्यक्ति को दिन में कम स


बहुत अच्छी जानकारी है

Nice information

Thanks all mom's to like my post


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