क्या गलत है देसी होने में ?

आज मैंने सोशल मीडिया पर एक माँ का पोस्ट देखा | उसमे उन्होंने अपने बेटे के बारे लिखा था जो कि कांटे और चम्मच से भोजन करने का प्रयास कर रहा था | अनुशीर्षक था "मेज़ पर खाने के शिष्टाचार सीखता हुआ मेरा बेटा" | पढ़ कर मानो मेरे मन में एक तार छिड़ गया | ऐसा नहीं है कि मैं कांटे और चम्मच से भोजन करने के विरुद्ध हूँ पर क्या हाथ से भोजन करना (जो कि वो बच्चा अभी तक करता रहा था) शिष्टाचार में नहीं आता ? भारत के तकरीबन 99 प्रतिशत लोग (अत्यंत ही अभिजात वर्ग को छोड़ कर जो कि हाथ से खाने को पिछड़ापन समझते हैं) हाथ से ही भोजन करते हैं | और इसमें गलत क्या है ? वैसे आप रोटी और सब्ज़ी को कांटे और चम्मच से कैसे खाते हैं ? क्या आप पहले उसका पिज़्ज़ा बनाते हैं और फिर खाते हैं ?

 

क्या यह अजीब नहीं है कि हर भारतीय तरीके को नाक मुँह सिकोड़ कर देखा जाता है ? जब भारतीयों ने योग त्याग कर जिम जाना शुरू किया तो विश्व योग करने और सीखने सिखाने में लीन हो गया | जहाँ हम संस्कृत के बारे कुछ जानना ही नहीं चाहते, वहीँ सुप्रसिद्ध हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड जैसे विश्वविद्यालय उसको पढ़ाते है और उससे देव-भाषा भी कहते हैं | हमने घी खाना बंद कर दिया यह कह कर कि उससे वज़न बढ़ता है, पर अमरीका अभी भी उसको ख़राब चर्बी को कम करने के लिए बेच रहा है | आजकल देखती हूँ कि बच्चे और बड़े दोनों ही भारतीय शौचालय को देख कर मुँह बनाते हैं, पर क्या आपको पता है कि ताज़ा अध्ययन कहता है कि उसके बैठने के तरीके से आँतों को शारीरिक कचरा बाहर निकालने में आसानी होती है जबकि इंग्लिश शौचालय के बैठने के तरीके से कब्ज़ होने की अधिक सम्भावना रहती है |

 

कोई कैसे भी खाने खाये मुझसे इससे कोई समस्या नहीं है, क्यूंकि यह एक निजी चयन है | मेरा सिर्फ इस बात से मतभेद है कि देसी तरीके से खाना खाने का अपमान करें और खाने वाले को असहज और नीचे महसूस कराएं | पांच सितारा होटल इसके सटीक उदहारण हैं |

 

आशा करती हूँ कि हम अपने बच्चों को इस तरह कि गलत सोच नहीं सिखाएंगे जिससे वो झूठे गौरव में जियें |

 

बाद का विचार: अतिशीघ्र ही विश्व अपनी उँगलियों का प्रयोग करेगा क्यूंकि उनमे असाधारण मात्रा में चिकित्सकीय गुण हैं |

#blogathon #hindi #swasthajeevan
स्वस्थ जीवन

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Comments (10)



Trusha Patadia

Very true...

suman tiwari

100% right.....I agree

Sarita singh

पढ़ने में बड़ा मज़ेदार है!

rekha

Main AAP ki baat se pori tarah sahmat hu

rekha

Bharatiya parmpra Ko Bura manna aur uske prati heen Bhavna rkhna ek chhoti mansikta h aur kuch nahi

shiva

it's a nice article

shweta kesarwani

Hmare bharat ke gaurav ar sanskar ke hi badaulat pura desh tika h

Neera Chaturvedi

Very true Priyanka ji
Hamari panch anguliya panch tatva ki pratik he inse esa Ras peda hota h bhojan aasani SE each jaye

Varsha Rao

That's really true

KULDEEP SINGH

Western culture Hamare Desh Mein Puri Tarah Se heavy ho chuka hai

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