ऐसा क्यों होता है: नवजात शिशुओं को होने वाले पीलिया के लक्षण और उपचार

नवजात बच्चों  में जॉन्डिस अथवा पीलिया क्या होता है ?

 

बच्चों में नवजात जॉन्डिस यानी जांदी को चिकित्सकीय रूप से हाइपरबिलीरुबिनेमिया कहा जाता है | यह बच्चे के खून में बिलीरुबिन नामक पदार्थ के बढ़ते स्तर के कारण होता है |

इसके कारण त्वचा का रंग अथवा आंखों का सफ़ेद हिस्सा पीला पड़ जाता है |

बिलीरुबिन आमतौर पर बच्चों के अलावा वयस्कों में भी मौजूद होता है, लेकिन जब इसका स्तर साधारण स्तर को पार कर जाता है तो इससे त्वचा का रंग बदलने लग जाता है और अन्य समस्याओं का कारण भी बनता है।

 

नवजात जॉन्डिस आमतौर पर जीवन के पहले सप्ताह में होता है। जब तक इसके लक्षण पता चलते हैं तब तक बहुत से नवजात शिशु अपने अभिभावकों के साथ घर जा चुके होते हैं | इसलिए बाल चिकित्सक जन्म के 3 से 5 दिन के बाद जांच करते हैं |

 

ज्यादातर बच्चों में आमतौर पर पीलिया के हल्के लक्षण दिखते हैं जो बीमारी का संकेत नहीं है | यह आमतौर पर किसी भी तकलीफ के बिना एक या दो सप्ताह के भीतर ठीक हो जाता है | हालांकि, कुछ मामलों में, यदि बिलीरुबिन का स्तर लंबे समय तक ऊँचा रहता है और इलाज नहीं किया जाता है, तो वे कर्निकटेरस नामक एक अवस्था का कारण बन सकते हैं जो मस्तिष्क के नुकसान और अन्य स्थाई समस्याओं का कारण बन सकता है

इसलिए, सभी मामलों में, इस तरह के उच्च स्तर के लिए अंतर्निहित कारण अथवा लक्षण की उपस्थिति के लिए जॉन्डिस (पीलिया ) को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और इससे हो सकने वाली क्षति का मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

 

नवजात शिशुओं में पीलिया के क्या कारण है ?

पीलिया तब होता है जब शरीर पचाने और निकालने की अपनी क्षमता से अधिक बिलीरुबिन पैदा करता है। बिलीरुबिन एक पीले रंग का पदार्थ है, यह तब बनता है जब शरीर में पुरानी लाल रक्त कोशिकाएं बूढ़ी या बेकार होकर टूट जाती हैं | शरीर की क्षमता के अनुकूल स्तर बनाए रखने के लिए आमतौर पर बिलीरुबिन को मूत्र और मल के माध्यम से शरीर से निकाल दिया जाता है। गर्भावस्था के दौरान, बिलीरुबिन को प्लेसेंटा के माध्यम से बच्चे के शरीर से निकाल दिया जाता है।

 

नवजात शिशुओं में पीलिया के अधिकांश मामलों में बच्चे शारीरिक पीलिया से ग्रस्त पाए जाते हैं | यह भ्रूण की लाल रक्त कोशिकाओं के अत्याधिक मात्रा में टूटने के कारण होता है, और अतिरिक्त बिलीरुबिन को पूरी तरह हटाने में बच्चे के यकृत की अक्षमता के कारण होता है| इस तरह का पीलिया जन्म के 24 घंटे के भीतर देखा जाता है। यह तीसरे या चौथे दिन बढ़ता है, और एक हफ्ते के भीतर ही ठीक हो जाता है

अन्य मामलों में, संक्रमण, एंजाइम की कमी, या बच्चे और मां के रक्त समूहों के बीच असंगतता के कारण नवजात काल में पैथोलॉजिकल पीलिया देखा जा सकता है।

नवजात पीलिया के लक्षण क्या होते हैं ?

अगर किसी बच्चे को नवजात पीलिया होने का संदेह है, तो त्वचा और आंखों के सफेद भाग में हल्का पीला रंग में दिखाई देता है। पीले रंग की मलिनकिरण शुरू में चेहरे और छाती में जन्म के 1 से 5 दिन बाद देखी जाती है।

एक बच्चे में बिलीरुबिन के बढ़े हुए स्तर का पता निम्नलिखित लक्षणों से हो सकता है :

त्वचा और आंखों के सफ़ेद भाग का पीलापन

सुस्ती

खाने की इच्छा करना

चिड़चिड़ापन

पीठ को पीछे की तरफ मोड़ना

ज़ोर ज़ोर से रोना

वज़न गिरना

 

नवजात पीलिया का निदान कैसे किया जाता है?

 

डॉक्टर शारीरिक परीक्षा करेगा और मां और बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करेगा। वह उनके रक्त समूहों (ब्लड ग्रुप ) के बारे में पूछताछ कर सकता है | बिलीरुबिन के स्तर को निर्धारित करने के लिए बिलीरुबिन की जांच करने के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है और यह आकलन करने के लिए कि क्या बच्चे को और उपचार की आवश्यकता है | बढ़ी हुई बिलीरुबिन के अंतर्निहित कारण के निदान के लिए अतिरिक्त परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है

शिशुओं में पीलिया का इलाज कैसे किया जाता है?

हल्का पीलिया दो से तीन हफ्तों के भीतर सहजता से हल होता है, और कोई इलाज की आवश्यकता नहीं होती है। मध्यम से गंभीर मामलों के लिए, बच्चे को हेल्थकेयर सुविधा में भर्ती कराया जा सकता है। पीलिया के इलाज के लिए बच्चे को एक प्रकार के फ्लोरोसेंट लाइटिंग के नीचे रखा जाता है। इसे फोटोथेरेपी के रूप में जाना जाता है। त्वचा फ्लोरोसेंट रोशनी को सोख लेती है जो बिलीरुबिन अणुओं पर काम करती है, जिससे उन्हें मूत्र और मल में तेजी से उत्सर्जित किया जा सकता है। सूर्य के प्रकाश के नीचे बच्चे का इलाज करने से बचना चाहिए पीलिया के इलाज के लिए विशेष रोशनी और नियंत्रित सेटिंग्स की आवश्यकता होती है।

यदि ऐसी अन्य स्थितियां हैं जो पीलिया का कारण बनती हैं, तो उन्हें उपचार के अन्य रूपों की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आरएच असंगतता के कारण पीलिया हुआ है तो बच्चे को रक्त संक्रामण (ब्लड ट्रांस्फ्यूशुन) की आवश्यकता हो सकती है।

नवजात पीलिया आमतौर पर एक बच्चे की विकास प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि,  बिलीरुबिन के स्तर में वृद्धि यदि एक हफ्ते के भीतर सामान्य स्तर पर ना पहुंचे तो यह एक अच्छा संकेत नहीं है और किसी बीमारी की और इशारा कर रहा है। इसलिए, तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना और इसका इलाज करना सबसे अच्छा है।

 

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Comments (12)



Sarita Rautela

Very helpful article

Vishwa Pratap Singh

very nice information share with us online medicine order

Vishwa Pratap Singh

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राजीव कुमार

डाक्टर ने धूप में ही इलाज करने को कहा और आराम भी मिला

Vijay Kumar

Thanks for the information

Avi S

महत्वपूर्ण जानकारी

Sonali Kiran Palande

piliya hone ke bad ma ko non - veg khana chahiye yap nahi ?

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