जब माँ ने पूछे बैक-टू-बैक सवाल और हमने दिए धड़ाधड़ जवाब

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जब माँ ने पूछे बैक-टू-बैक सवाल और हमने दिए धड़ाधड़ जवाब

माँ बनने से पहले हर औरत को सौ तरह इ सुझाव, हिदायतें मिलती हैं. लेकिन सच्चाई से सामना होने के बाद ही समझ में आता है कि मां बनना कैसा होता है. आप चाहे दो बार माँ बन चुकी हों, लेकिन दोनों बार आपका एक्सपीरियंस अलग होगा। हालांकि हर बार माँ अपने बच्चे के लिए बेस्ट चाहती है. उसकी हेल्थ को लेकर वो सजग रहती है और अपना बेस्ट देने की कोशिश करती है.

 

माँ बनने जा रही हर महिला के मन के कई सवालों के जवाब तलाशने की हमने कोशिश की है अपने एक्सपर्ट्स और एक्सपीरियंस होल्डर मम्मी की मदद से:

 

Q: मेरा बेटी फ़ीड करने के फ़ौरन बाद हिचकियाँ लेती है, क्या उसकी हिचकी रोकने का कोई तरीका है? हिचकी की वजह से कई बार उसके मुँह से सारा दूध बाहर आ जाता है. मिल्क फ्लो कंट्रोल किया जा सकता है? दूध कई बार इतना ज़्यादा होता है कि इसकी वजह से वो उलटी कर देती है.

 

A: नेहा मणि मिश्रा: उसको डकार मरवाने के लिए उसे कंधे पर रखें और धीरे-धीरे कर उसकी गर्दन से लेकर पीठ थप-थप करें। उसके डकार मारने के 10-15 मिनट तक उसे कंधे पर ही रखें। इससे दूध शरीर में जाएगा। रही बात हिचकी की, तो वो नॉर्मल है, ऐसा बढ़ते बच्चों में होता है.

 

Q: अपने बच्चे और उसके पिता के बीच एक रिश्ता कैसे बनाऊं? मेरे हस्बैंड बच्चे को गोद में लेने से डरते हैं, इसलिए वो जब भी उनकी गोद में होती है,  रोने लगती है. अगर वो गहरी नींद में भी हो, तो भी उनकी गोदी में उठ जाती है. हेल्प!

 

A: अक्षया नरेश: मेरे पति ने अपनी बच्ची को 2 महीने बाद देखा। मुझे भी यही डर था कि वो एक-दूसरे को पहचान पाएंगे। लेकिन सब ठीक हुआ, इन चीज़ों की वजह से मुझे मदद मिली:

 

बातें करें, बच्चे से उसके पिता के बारे में खूब बात करें। उसे बताएं कि उसके पिता उसे कितना पसंद करते हैं. जैसे मैं अपने बच्चे को कहती थी कि उसके लिए सारे खिलौने पापा लेकर आते हैं.

 

अगर उन्हें बच्चा पकड़ने में असहजता महसूस होती है, तो उन्हें बच्चे के बगल में लेटने को कहें। मेरे हस्बैंड भी यह करते थे, कभी फनी एक्सप्रेशंस बनाते, कभी उसका एंटरटेनमेंट करने के लिए अजीब सी आवाज़ें निकालते।

 

बच्चे के लिए पिता का चेहरा पहचाना ज़रूरी है. उन दोनों को एक साथ समय दें, खेलना-वॉक पर जाना।

 

स्वेडेल बेड का इस्तेमाल करें, इससे आपके पति को उसे इधर-उधर ले जाने में सहूलियत होगी।

 

Q: मेरा 2 महीने का बेटा मेरी गोद में तो आराम से सो जाता है, लेकिन बिस्तर पर लिटाते ही रोना शुरू कर देता है. उसका पेट भी भरा रहता है और उसको कोई प्रॉब्लम भी नहीं, फिर ऐसा क्यों होता है?

 

A: ऋतू सिंघल: पहली बात, ऐसा नॉर्मल है, तो घबराएं नहीं। मुझे नहीं पता कि आप उसे बेड के किस साइड लेटा रहे हैं. लेकिन हो सकता है, वो ऐसा कम्फर्ट के लिए कर रहा हो. ख़ास कर सर्दियों में बच्चा गोद में ज़्यादा बेहतर सोता है. या हो सकता है, उसे लिटाते समय उसकी नींद खुल रही हो, जिस वजह से वो रोता है. आप पालने का इस्तेमाल करें। मैंने भी ऐसा ही किया था. बस थोड़े समय बाद वो नोर्मल हो जाते हैं.

 

Q: प्लीज़ मेरी मदद करें।।। मुझे बच्चे को फीड करवाने में बहुत दर्द होता है. मैं लगभग रो रही होती हूँ और मेरे निपल्स पूरी तरह सूज जाते हैं. जबकि मेरा बच्चा सिर्फ़ 2.8 किलो का है. डॉक्टर्स ने कहा है कि उसका वज़न बढ़ाने के लिए मुझे उसे और फ़ीड करवाना होगा।

 

A: एक्सपर्ट सोनाली शिवलानी: मैं आपकी प्रॉब्लम समझ सकती हूँ. अगर आप हॉस्पिटल में हैं, तो एक बार नर्स की मदद लें. फ़ीड करवाने का तरीका और पोजीशन सही है, तो दर्द नहीं होता, बल्कि ये आनंदमयी होता है. अगर आप घर पर हैं, तो किसी लैक्टेशन स्पेशलिस्ट की मदद लें. थोड़े टिप्स: बच्चे को अपने स्तनों के आस-पास ही रखें, अगर वो झूल रहा होगा तो स्वाभाविक तौर से आपको दर्द होगा। उसे ढंग से फ़ीड करने के लिए अपने हाथ से उसका निचला जबड़ा बड़ा करें। ये इसलिए ताकि उसका मुंह ढंग से खुला रहे. फ़ीड करवाने के बाद निपल्स पर क्रीम लगाएं, वो उसे हवा में सूखने दें. अगर निपल्स में फिर भी दर्द हो तो एक्सप्रेस (दूध निकाल कर स्टोर करना) करें।

 

Q: मैं अपनी डिलीवरी के बाद से कुछ महीने अपनी माँ के घर में थी और उसी वजह से मेरी बेटी अपनी नानी से काफ़ी ज़्यादा Attached है. अपने ससुराल आने के बाद से वो अपने दादी-दादा के पास बिलकुल नहीं रहती और मुझे छोड़ती नहीं है. मेरे पति ऑफिस जाते हैं तो बेटी को मुझे ही संभालना पड़ता है. वो  गाने सुन कर भी चुप नहीं होती। क्या वो मेरी माँ को मिस कर रही है?

 

A: रम्या चकरी: मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ था. बच्चे जिन्हें नहीं पहचान पाते हैं, उनके साथ असहज महसूस करते हैं और इसलिए रोते हैं. स्मार्ट बच्चे चेहरे जल्दी पहचान लेते हैं और चेहरों को लेकर उनकी पसंद-नापसंद भी होती है. बच्चे के लिए आपके सास-ससुर को पहचाना ज़रूरी है, इसलिए उनके बारे में बताएं। इसमें थोड़ा वक़्त लगेगा लेकिन धैर्य रखें, मैंने भी ऐसा ही किया था.

 

Q: मेरा बच्चा 9 दिन का है लेकिन मुझे बुखार और ज़ुकाम हो गया है. क्या मैं तब भी बच्चे को दूध पिला सकती हूं?

A: एक्सपर्ट शिल्पिता संथप्पा: बिलकुल, आप आराम से उसे फ़ीड करवा सकती हैं. बस ब्रेस्टफ़ीड सेफ़ दवाईयां लें, गरम सूप, गर्म पाने पिएं। बच्चे को छूने से पहले हाथ ज़रूर धोएं और साफ़ रखें।

 

Q: मेरा 10 हफ़्ते का बच्चा बायीं साइड से दूध पी लेता है, लेकिन दायीं साइड से नहीं। ऐसा क्यों?

A: एक्सपर्ट सोनाली शिवलानी: ऐसा हो सकता है कि दायीं साइड मिल्क फ़्लो कम हो, इसलिए बच्चे को ज़्यादा मेहनत लगती हो और वो निपल खींचता हो.  इसके लिए बच्चे को फ़ीड करवाने के बाद, एक्सप्रेस करें। इससे मिल्क फ़्लो बेहतर हो जाएगा। हो सकता है आपकी फ़ीड पोज़िशन सही न हो, उससे भी बच्चे को मुश्किल हो सकती है. हो सकता है बच्चे को कान में कोई इन्फ़ेक्शन हो.

 

मैं दो दिन तक पहले दो ऑप्शन देखने को कहूंगी।

 

Q: हम अपने बच्चे को 6 हफ़्ते वाला टीका लगवाने जा रहे हैं. डॉक्टर ने हमें पेनलेस और पेनफ़ुल टीकों के ऑप्शन दिए हैं. मेरा बच्चा गैस की प्रॉब्लम से ग्रस्त यही, जिसकी वजह से वो रोता रहता है और उसका वज़न भी नहीं बढ़ा है. ऐसे में कहीं पेनफुल टीके से उसकी परेशानी न बढ़े?

 

A: ऋतु सिंघल: मैंने अपने केस में दो डॉक्टर्स से कंसल्ट किया था. एक न कहा पेनलेस में दर्द कम होने के साथ-साथ, बच्चे को स्ट्रेस कम रहता है और वो थोड़ी महंगी होती हैं. अगर आप कम दर्द वाला टीका लगवाती हैं, तो आपको कुछ समय बाद एक टीका और लगवाना होगा, क्योंकि इसका असर 7-8 साल की उम्र तक ख़त्म हो जाता है. लेकिन दर्द वाले टीके में बच्चे को बुखार रहता है और चिडचिड़ापन भी. काम दोनों ही वैसा करते हैं. इसलिए बेहतर वो थोड़े पैसे देकर पेनलेस टीका लगवा लिया जाये।

 

Q: क्या ये सच है कि जन्म के समय बच्चों का जो स्लीप पैटर्न होता है, वो 2 साल की उम्र तक वैसा ही रहता है. क्योंकि मेरी बेटी अभी रात को 1 बजे उठ जाती है, चाहे मैं कुछ भी कर लूं, उसकी नींद इस वक़्त खुल जाती है. अभी मैं मैनेज कर पा रही हूं क्योंकि मेरी माँ मेरे साथ हैं, लेकिन तीन महीने बाद वो चली जाएंगी तो मैं अकेले मैनेज नहीं कर पाऊँगी। काफ़ी परेशान हूँ मैं इसे लेकर।

 

A: एक्सपर्ट सोनाली शिवलानी: माँ के गर्भ में बच्चे दिन में सोते हैं और रात में जब वो रेस्ट करती है, तब उठ जाते हैं. इसीलिए जन्म के बाद शुरुआती कुछ हफ़्तों में यही पैटर्न रहता है. उसकी आदत बदलने के लिए स्लीप ट्रेनिंग ज़रूरी है. जब बच्चा रात में उठे, तो चीज़ें शांत रखें और उजाला न करें। उसे फ़ीड करवाते समय भी अँधेरा रखें या बहुत कम लाइट। इस समय बच्चे के सतह न तो ज़्यादा बात करें, न उसे खिलाएं। दिन में ठीक इसका उल्टा करें। धीरे-धीरे आपका बच्चा रात और दिन के अंतर को समझ जाएगा और रात में ही  सोने लगेगा।

 

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