प्रेगनेंसी में इस्तेमाल होने वाले इन शब्दों को अगर पहली बार सुन रहे हैं, तो इनका मतलब भी जान लीजिये

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प्रेगनेंसी में इस्तेमाल होने वाले इन शब्दों को अगर पहली बार सुन रहे हैं, तो इनका मतलब भी जान लीजिये

प्रेगनेंसी एक कपल के लिए बहुत नया अनुभव होता है. ज़िन्दगी के बारे में नए सिरे से जानने के साथ-साथ ऐसे-ऐसे शब्दों से पाल पड़ता है, जो कभी सुने ही नहीं। गर्भावस्था के दौरान सामने आने वाले ऐसे ही मेडिकल शब्दों के मतलब यहाँ दे रहे हैं, आपकी जर्नी थोड़ी आसान होगी।

 

 

1. Braxton Hicks Contraction

इसे एक तरह से नकली कॉन्ट्रैक्शन या संकुचन कहते हैं, लेकिन ये नकली नहीं होते। बस इनका असर सर्विक्स पर नहीं पड़ता। ये संकुचन अचानक होता है, कम समय के लिए होता है और इनमें दर्द नहीं होता। ऐसा संकुचन ज़्यादातर तीसरी तिमाही में दिखता है. कई दफ़ा गर्भ एक एकदम से रिलैक्स होना, टाइट होना इसी वजह से होता और लोग इसे बच्चे का मूव करना समझ कर ग़लती कर देते हैं.

 

2. Cervix

योनि के आखिर में, ये गर्भाशय का मुँह होता है. ये काफ़ी मोटा और लंबा होता है और गर्भावस्था के दौरान बंद ही रहता है. बच्चे होने के समय, सर्विक्स बाहर ही जगह थोड़ा अंदर हो जाता है, इसकी मोटाई कम हो जाती है और ये बच्चे की डिलीवरी के लिए खुल जाता है.

 

3. Fundus

फौन्डुस, गर्भाशय का ऊपरी भाग होता है. कई महिलाओं को पेट में होने वाला मरोड़ यहाँ तक महसूस होता है. डिलीवरी के वक़्त डॉक्टर बच्चा पुश करने के लिए फौंडल प्रेशर लगाते हैं. फौन्डुस को धीरे-धीरे मसाज भी किया जाता है, ताकि प्लेसेंटा डिलीवर कर सके.

 

4. कॉन्ट्रैक्शन

इसे संकुचन भी कहा जाता है. असली संकुचन प्रेगनेंसी के 37 हफ़्ते में शुरू होता है. इसका पैटर्न एक तरह से सेम ही होता है. संकुचन की मदद से सर्विक्स खुलता है और बच्चे की डिलीवरी आसान होती है. लेबर में होने वाला संकुचन लम्बे समय के लिए होता है और ज़्यादा स्ट्रॉन्ग भी होता है.

 

5. Effacement

इसका अर्थ होता है सर्विक्स का पतला और छोटा होना। लेबर से पहले होने वाले दर्द के दौरान ऐसा होता है और ये कुछ समय तक रहता है. पूरी तरह से खुला हुआ सर्विक्स काग़ज़ जितना पतला होता है और डॉक्टर इसे आराम से खोल सकते हैं.

 

6. Dilatation
सर्विक्स जब जीरो से 10 सेंटीमीटर तक खुले, तो ये बच्चे के सिर का माप होता है. कई दफ़ा ये प्रक्रिया संकुचन से पहले शुरू हो जाती है, जिससे संकुचन थोड़ा दर्दभरा हो सकता है.

 

7. Lightening

प्रेगनेंसी के दौरान बच्चा पूरे गर्भ में मूव करता है और डिलीवरी नज़दीक आने के समय उसका सिर नीचे की तरफ होने लगता है. डिलीवरी या लेबर पेन से कुछ समय पहले बच्चा थोड़ा और नीचे की तरफ़ आता है और पेल्विस में घुसता है. इसी को लाइटनिंग कहा जाता है, क्योंकि इस वक़्त बच्चे का सिर फ़िक्स हो चुका होता है.

 

8. Station

इसका अर्थ हुआ पेल्विस में बच्चे की पोज़ीशन। ये नेगेटिव 5 से पॉज़िटिव 5 में गिनी जाती है. -5 यानि बच्चा अभी भी गर्भाशय में घूम रहा है और अभ पेल्विस तक नहीं पहुँचा है. 0 पर बच्चा पेल्विस की तरफ़ बढ़ रहा है. +5 यानि बच्चे की क्राउनिंग शुरू हो गयी है और किसी भी वक़्त डिलीवरी हो सकती है.

 

9. Induction

इसका मतलब जब लेबर शुरू करवाया जाता है. अगर माँ तय डेट के अनुसार फुल टर्म पूरी कर चुकी है और बच्चे या माँ की कंडीशन ऐसी होती है, कि डिलीवरी ज़रूरी बन जाए, तो इंडक्शन का इस्तेमाल किया जाता है लेबर देने के लिए. इसकी शुरुआत सर्विक्स को सॉफ्ट करने से होती ह, जिसके लिए डॉक्टर prostaglandins का इस्तेमाल करते हैं. अगर ये भी काम नहीं करता, तो सिंथेटिक ऑक्सीटोसिन देकर IV की जाती है,

 

10. Augmentation

अगर लेबर इतना नहीं होता कि डिलीवरी की जा सके, तो सिंथेटिक ऑक्सीटोसिन, जिसे पिटोसिन कहा जाता है, देकर लेबर संकुचन बढ़ाया जाता है.

 

11. Mucus Plug

सर्विक्स एक तरह के म्यूकस प्लग से भी ब्लॉक्ड रहता है. जब भी सर्विक्स खुलता है, तो ये म्यूकस, थक्कों या टुकड़ों में गिरता है. ये ख़ून से सने होते हैं. जैसे ही म्यूकस गिरता है, डिलीवरी उसके फ़ौरन बाद भी हो जाती है, या कभी-कभो हफ़्ते भी लग सकते हैं.

 

12. Forceps

ये एक तरह का चिमटे जैसा इंस्ट्रूमेंट होता है. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है, जब बच्चे को बाहर आने में दिक्कत होती है, वो किसी ग़लत जगह पर फंस जाता है और माँ पुश करते-करते थक जाती है, इनकी मदद से बच्चे का पकड़ कर उसे बाहर निकाला जाता है.

 

13. Ventuose/ Vaccum

ये भी डिलीवरी में मदद करने वाला एक उपकरण है. इसमें एक तरह का सक्शन कप लगा होता है, जो बच्चे को बाहर निकालने में मदद करता है. अगर बच्चा बर्थ कनाल के काफ़ी अंदर होता है या माँ को पुश करने में ज़्यादा दिक्कत होती है, या फिर बच्चे का हार्ट रेट कम ज़्यादा होता है, तो वैक्यूम के माध्यम से उसे बाहर निकलते हैं.

 

14. Epidural

एपिडुरल अनलजेसिया एक तरह का का दर्द निवारक होता है. इसे पीठ के पिछले हिस्से में डालकर उस हिस्से में सुन्न किया जाता है, ताकि नसें दिमाग तक किसी तरह का पेन मैसेज न लेकर जाएँ। डिलीवरी के लिए इस्तेमाल होने वाले तरीकों में ये प्रमुख है, इससे माँ को बेहोशी नहीं होती और बच्चे पर भी कोई असर नहीं पड़ता।

 

15. Episiotomy

ये एक तरह का कट है, जो Anus (मलमार्ग) के ऊपर लगता है. कई दफ़ा जब बच्चा तेज़ी से बाहर आ रहा हो और मां के शरीर में संकुचन तेज़ी से हों, तो ये हिस्सा कट सकता है और उसके बाद कभी रिपेयर नहीं होता। इसलिए डॉक्टर इसमें एक छोटा चीरा लगाते हैं, ताकि बाद में इसे ठीक किया जा सके.

 

16. भ्रूण/ शिशु से जुड़े कुछ और मेडिकल शब्द

डिलीवरी के दौरान बच्चे का कौन सा हिस्सा बाहर है, इसी से डिलीवरी में लगने वाला समय और पीड़ा निर्धारित होती है.

 

 

Vertex/ Cephalic

यानि बच्चे का सिर बाहर है. इससे नॉर्मल डिलीवरी में आसानी होती है और ये सबसे सही पोज़िशन भी मानी जाती है.

 

Breech

यानि बच्चे के पैर या उसके हिप्स  बाहर हैं.
कम्पलीट ब्रीच मतलब बच्चा किसी तरह बैठा हुआ है, उसके पैर क्रॉस में हैं.
फुटलिंग ब्रीच यानि बच्चा गर्भाशय में खड़ा है और उसके पैर बाहर की तरफ हैं.
फ्रैंक ब्रीच मतलब बच्चे के हिप्स बाहर है, लेकिन उसके पैर छाती की तरफ़ मुड़े हुए हैं.

Transverse

इसका मतलब बच्चा लम्बाई की जगह, सिधाई में लेटा है.

Aslyinctic

यानी उसका सिर पेल्विस की किसी हड्डी की तरफ़ है और बाहर की तरफ़ उसके कंधे हैं.

Brow Presentation

ये भी हेड डाउन पोज़िशन है, लेकिन इस बार वो पेल्विस की तरफ़ मुड़ा हुआ है.

 

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