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क्या बच्चों के नए दाँतों को लेकर आप भी ये धारणाएँ बनाये बैठी हैं?

क्या बच्चों के नए दाँतों को लेकर आप भी ये धारणाएँ बनाये बैठी हैं?

20 Jun 2018 | 1 min Read

revauthi rajamani

Author | 44 Articles

बच्चों के दाँत आने से जुड़ी कई बातें और भ्रांतियाँ हैं. इनमें से कुछ ऐसी हैं, जो आपस में कॉनफ्लिक्ट करती हैं. हालांकि हम कुछ आम परेशानियों और उनके समाधानों पर बात कर सकते हैं.

 

धारणा: मेरे बच्चे के दाँतों को ज़्यादा देखभाल की ज़रूरत नहीं, क्योंकि वैसे भी कुछ दिनों में टूट जाएंगे।

 

फैक्ट: ये भीड़ ग़लत धारणा है, बच्चों के दाँतों को उस समय से देखभाल की ज़रूरत होती है, जब से वो उगना शुरू करते हैं. बच्चे को हँसने, बात करने, चबाने के लिए अच्छे दाँतों की ज़रूरत पड़ती है. अच्छे दाँत उनके कॉन्फिडेंस के लिए भी ज़रूरी होते हैं. इसलिए दाँतों की देखभाल उसी समय से शरू कीजिये, जब वो छोटे-छोटे सफ़ेद हिस्से उनके मसूड़ों पर दिखने लगें।

 

धारणा: बच्चों के दाँतों में कीड़े नहीं लगते

फैक्ट: ये ग़लत धारणा है, सच्चाई ये है कि दाँत कैसे भी हों, उनमें कीड़े लगने का डर हमेशा रहता है. बच्चों के दूध के दाँतों के बाद आने वाले दाँत इस वजह से खराब हो सकते हैं. दूध के दाँतों में अगर कीड़े लगे, तो इसका असर उनसे ठीक नीचे उगने वाले परमानेंट दाँतों में भी होता है. देखभाल के अलावा इससे बचने के लिए बच्चे को बिस्तर में किसी भी तरह का लिक्विड या सॉलिड देना बंद करें। साथ ही धीरे-धीरे उसे रात में फ़ीड करवाना भी कम कर दें. कुछ समय बाद ऐसा करना छोड़ ही दें.

 

धारणा: दाँत आने पर बच्चे को बुखार, दस्त, पेट में इन्फेक्शन (संक्रमण) होता है.

 

फैक्ट: कई एक्सपर्ट्स इस बात को नहीं मानते। उनका ये मानना है कि दाँत आने की वजह से सो रही खुजली और असहजता की वजह से बच्चे चीज़ें काटना या अपने मसूड़े दबाना ज़रूर शुरू करते हैं. वो अपने आस-पास मौजूद चीज़ों को मुँह में डालने की कोशिश करते हैं, इससे बैक्टीरिया आसानी से अंदर आ जाते हैं. इसी वजह से बच्चे दस्त या इन्फेक्शन का शिकार होते हैं. कुछ डॉक्टर्स का ये मानना है कि हल्का बुखार भी होता है, लेकिन 101 फारेनहाइट से ज़्यादा खतरनाक हो सकता है, सीधे डॉक्टर को दिखाएँ।

ये लक्षण दाँत आने के संकेत देते हैं:

ढंग से न सो पाना
चिड़चिड़ापन
अपने आसपास की हर चीज़ को काटने, मुँह में दबाने की कोशिश करना
खाना न खाना
कान खींचना या गाल और ठोडी को रगड़ना
कुछ बच्चों को इस दौरान डायपर रैश भी होते हैं
101 डिग्री फारेनहाइट का बुखार
मुँह से बार-बार थूक आना

 

कुछ भी गड़बड़ लगे, तो निस्संदेह किसी अच्छे डेंटिस्ट को दिखाएँ। इसके अलावा नियमित तौर पर डेंटिस्ट को दिखाएं ताकि बच्चे को कोई दिक्कत न हो.

 

डिसक्लेमर: इस आर्टिकल का मकसद किसी भी तरह से डॉक्टरी जाँच को कमतर आँकना नहीं है. न ही ये किसी तरह से डॉक्टर,  ट्रीटमेंट या सलाह का सब्स्टीट्यूट है. हमेशा पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें. 

 

#hindi #shishukidekhbhal

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