बच्चे का सोते समय सीटी जैसी आवाज़ निकलने का ये मतलब होता है - इसे ऐसे ठीक करें I

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बच्चे का सोते समय सीटी जैसी आवाज़ निकलने का ये मतलब होता है - इसे ऐसे ठीक करें I

Wheezing या साँस लेते हुए अजीब आवाज़ कई बच्चों को होती है. ये सीटी जैसी आवाज़ होती है. ये ख़ास कर तब आती है, जब साँस बाहर छोड़ रहे हों.  कई बार इसे अस्थमा से जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन असल में ये साँस लेने से जुड़ी बात है.




बच्चों के मुँह से साँस लेते हुए आपने कभी अजीब आवाज़ सुनी? हो सकता है बहुत सी माँ इस वजह से परेशान भी हुई हों. ये क्या है, इस बारे में जानना सभी के लिए ज़रूरी है.

 

Wheezing या साँस लेते हुए अजीब आवाज़ कई बच्चों को होती है. ये सीटी जैसी आवाज़ होती है. ये ख़ास कर तब आती है, जब साँस बाहर छोड़ रहे हों.  कई बार इसे अस्थमा से जोड़ कर देखा जाता है, लेकिन असल में ये साँस लेने से जुड़ी बात है.

 

क्या कारण हैं Wheezing के?

 

साँस आराम से जब श्वास नली से होकर गुज़रे, तो एक अलग तरह की आवाज़ आती है. ये Stethoscope की मदद से सुनाई देती है. लेकिन जब एयर पैसेज क्लियर न हो, तो साँस पास होते हुए ऐसी आवाज़ करती है, जो सीटी की तरह सुनाई देती है. साँस लेते हुए भी ऐसी आवाज़ सुनाई दे सकती है, लेकिन ऐसा कम देखा गया है.

 

ये समस्या अनुवांशिक भी होती है, ख़ास कर उन बच्चों को, जिनके परिवार में किसी को साँस लेने में दिक़्क़त, किसी तरह की कोई एलर्जी या एग्ज़ीमा जैसी प्रॉब्लम होती हैं. धुएँ से एलर्जी, Premature बर्थ, दूध से एलर्जी, ट्विन बच्चे होने से भी ये समस्या होती है.

 

अस्थमा के अलावा जिन कारणों से इसकी शुरुआत होती है, वो हैं: सही से नींद न लेना, ब्रोंकाइटिस, इन्फेक्शन, निमोनिया, जन्म से ही छाती में कुछ दिक्कत, साँस की नाली में ट्यूमर।

 

सूखी और ठंडी हवा में बच्चे को थोड़ी देर रखने से ही ये आवाज़ बढ़ने लगती है और थोड़े ही जैसे ही उसे किसी नमी वजह जगह में लेकर आया जाता है, वो ख़त्म हो जाती है.

 

व्हीज़िंग बच्चों में रात को ही देखने को मिलती है क्योंकि इस वक़्त बच्चा लेटा होता है, उसके आस-पास का वातावरण ठंडा होता है. Epinephrine हार्मोन रात में ही निकलता है.

 

अस्थमा और व्हीज़िंग

 

अस्थमा व्हीज़िंग का सबसे बड़ा कारण होता है. ये बीमारी कभी खत्म नहीं होती ज़्यादातर 6 साल से नीचे के बच्चों में देखने को मिलती है. रक्षातंत्र प्रणाली में डिफेक्ट की वजह से धुल या धुएँ से ऐसे लोगों को एलर्जी होने लगती है. इससे उनकी साँस की नली में सूजन आने लगती है और वो फूलने लगती है. कोई ख़ास ख़ुश्बू, तापमान में वृद्धि या कमी, धूल-मिट्टी के कारण भी व्हीज़िंग की शुरुआत होती है.

 

व्हीज़िंग का इलाज

 

इसके ट्रीटमेंट के लिए जो दवाई दी जाती है, उन्हें ब्रोन्कोडिलेटर कहा जाता है और इनका काम साँस की नली से  कंजेशन कम कर, साँस लेने को आसान बनाना है. इसके अलावा एंटी-इन्फ़लेमेटरी दवाईयों की मदद से सूजन कम करने की कोशिश की जाती है, ताकि छाती और गले को आराम मिले। इसके अलावा किसी तरह की ब्लॉकेज को हटाने से भी राहत मिलती है.

 

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