हर माँ के लिए ज़रूरी हैं पहली तिमाही में ये टेस्ट करवाना

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हर माँ के लिए ज़रूरी हैं पहली तिमाही में ये टेस्ट करवाना

माँ और बच्चे की सेहत को ध्यान में रखते हुए ही इस दौरान कई तरह के टेस्ट होते हैं, जिन्हें मोटे तौर पर प्रेगनेंसी ब्लड टेस्ट कहा जाता है. गर्भावस्था के दौरान कई तरह की कंडीशंस बनती हैं, जो बच्चे और माँ के लिए सही न हों. लेकिन ब्लड टेस्ट की सहायता से इस तरह की किसी भी स्थिति का पता लगाया जा सकता है. इसलिए प्रेगनेंसी की हर तिमाही में कुछ ज़रूरी टेस्ट करवाने होते हैं, हम अभी उन्हीं का ज़िक्र करेंगे।



पहली तिमाही में करवाए जाने वाले स्क्रीनिंग ब्लड टेस्ट

इस दौरान जिन रूटीन टेस्ट की हिदायत दी जाती है, वो हैं:

 

1. CBC (कम्पलीट ब्लड काउंट)

 

ये सबसे बेसिक टेस्ट होता है और ख़ून मं मौजूद सेल्स की जानकारी देता है. ये टेस्ट ख़ून की कमी, जिसे एनीमिया कहते हैं, उसका पता लगाने के लिए भी होता है. एनीमिया हीमोग्लोबिन के कम होने पर होता है. ये बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता भी दर्शाता है, जो वाइट ब्लड सेल से पता चलता है कि वो संक्रमण से लड़ प् रहा है या नहीं। प्लेटलेट्स भी इस में चेक होती हैं, जिससे ख़ून में धब्बे बनने की आशंका चेक की जाती है.

 

2. ब्लड टाइपिंग (या ब्लड ग्रुपिंग)

 

ख़ून में एक प्रोटीन होता है जिसे Rh फ़ैक्टर कहते हैं. ये किसी में होता है (Rh पॉज़िटिव), किसी में नहीं होता (Rh नेगेटिव). अगर आप Rh नेगेटिव हैं और आपका बच्चा Rh पॉज़िटिव, तो ये मेल सही नहीं होता। Rh फ़ैक्टर से लड़ने के लिए माँ के शरीर में एंटीबॉडी बनती हैं और ये बच्चे के लाल ब्लड सेल के लिए सही नहीं होगा। हालांकि पहली प्रेगनेंसी में इसका कोई असर नहीं होता लेकिन दूसरी प्रेगनेंसी में ये बच्चे को नुक्सान पहुँचा सकता है, इसलिए इसका चेकउप होना ज़रूरी है.

 

3. STI (सेक्सुअली ट्रांस्मिटेड इन्फेक्शंस) और HIV के लिए टेस्ट

गर्भवती महिलाओं को प्रेगनेंसी की शुरुआत में ही STI और ऎड्स का टेस्ट करवा लेना चाहिए। क्योंकि ये दोनों ही संक्रमण बच्चे और माँ के लिए मुश्किल खड़ी करते हैं. अगर माँ HIV पॉज़िटिव है, तो बच्चे को इस सिंड्रोम से बचने की पूरी कोशिश की जाती है.

 

4. हेपेटाइटिस B,C, टीबी और रूबेला के लिए टेस्ट

 

रूबेला इन्फेक्शन की वजह से बच्चे में जन्मजात डिफ़ेक्ट हो सकते हैं और हेपेटाइटिस B और C के वायरस बच्चे में प्रेगनेंसी के दौरान जा सकते हैं. बच्चे को इससे बचाने के लिए ये टेस्ट समय पर हो जाने चाहिए, साथ ही माँ को अगर TB का ख़तरा है तो उसका समय पर टेस्ट और इलाज होना चाहिए।

 

ब्लड टेस्ट के अलावा पहली तिमाही में कई तरह के यूरिन टेस्ट किये जाते हैं.

 

1. यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट

 

बीटा-HCG का टेस्ट किया जाता है, जो पीरियड्स न होने के पहले हफ़्ते में ही होता है. अगर ये एब्सेंट है, तो आप प्रेग्नंट हैं. ये एक तरह से प्रेगनेंसी को सुनिश्चित करता है.

 

2. यूरिन एनालिसिस

 

रेड ब्लड सेल्स देखने के लिए ताकि पता चल सके कि मूत्र मार्ग में कोई बीमारी न हो.

वाइट ब्लड सेल्स के लिए ताकि मूत्रमार्ग में कोई संक्रमण न हो.

ग्लूकोस चेक करने के लिए ताकि शुगर न हो.

प्रेगनेंसी के शुरुआत और बाद में प्रोटीन लेवल चेक किये जाते हैं, ताकि प्रीक्लेम्पसिया न हो. ये एक गंभीर अवस्था है जो प्रेगनेंसी के बाद के स्टेज में उभर कर आती है और कई बार डिलीवरी के बाद भी.

 

3. यूरिन कल्चर

 

यूरिन में बैक्टीरिया होना यानी संक्रमण की निशानी, इसका इलाज होना ज़रूरी है.


पहली तिमाही में स्क्रीनिंग टेस्ट

इसमें अल्ट्रासाउंड सबसे पहला टेस्ट होता है, जो 11 से 13वें हफ़्ते के बीच हो जाना चाहिए। इसे डिलीवरी की डेट, कितने बच्चे हैं, और प्रेगनेंसी की किसी बीमारी का पता चलता है.

प्रेगनेंसी में डायग्नोस्टिक ब्लड टेस्ट

 

ये जन्म से जुड़े विकार पता लगाने में मदद करता है, अगर आपकी फ़ैमिली में कोई डिफ़ेक्ट रहा हो, तो ये टेस्ट उसका पता लगाता है. कुछ ख़ास नस्ल के लोगों में  भी कुछ डिफ़ेक्ट होते हैं, जो डायग्नोस्टिक टेस्ट की मदद से पता लगाए जाते हैं.

 

प्रेगनेंसी में करवाए जाने वाले सभी ब्लड टेस्ट थोड़े मुश्किल भरे होंगे, लेकिन ये आपकी मदद के लिए ही हैं. इस दौरान डॉक्टर के निर्देशों का पालन ज़रूर करें।

 

डिस्क्लेमर: इस लेख का मकसद किसी भी तरह से  मेडिकल सलाह, परिक्षण या डॉक्टरी जाँच को नज़रअंदाज़ करना नहीं है, किसी भी तरह की परेशानी में सबसे पहले डॉक्टरी सलाह लें.

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