भारत के शीर्ष दस पूरक आहार

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भारत के शीर्ष दस पूरक आहार

वीनिंग एक शिशु के आहार में संक्रमणकालीन अवधि होती है जब मां धीरे-धीरे  दूध के अलावा अन्य खाद्य पदार्थ शुरू करने लगती है। यही वह समय है जब आप अपने बच्चे को पहला खाना देते हैं जो ठोस होता है और बच्चे को लंबे समय तक तृप्त रखता है और आपके बच्चे के स्वाद कलिकाओ को विकसित करने में मदद करता है।

 

बच्चे के लिए पूरक आहार कैसे शुरू करे?

शिशुओं को धीरे धीरे पूरक आहार से परिचित कराना चाहिए और अलग-अलग स्वाद और बनावट वाले खाद्य पदार्थ देना चाहिए।  आदर्श रूप से, एक समय में आपके बच्चे के आहार में केवल एक नई खाद्य वस्तु दी जानी चाहिए। अगली नई खाद्य वस्तु तभी दें जब आप सुनिश्चित हों कि आपका बच्चा पहली चीज़  का आदी हो चूका है और उससे कोई असहिष्णुता या एलर्जी नहीं दिख रहा है।

शिशु को चार मुख्य खाद्य समूहों से विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों से अवगत कराया जाना चाहिए:

  • चावल और विकल्प (उदाहरण के लिए, अनाज, आलू, रोटी)
  • सब्जियां
  • फल
  • मांस और विकल्प (उदाहरण के लिए, मछली, चिकन, सेम, दही)

जैसे बच्चे के चबाने और काटने की क्षमता विकसित होने लगती है, भोजन थोड़ा गाढ़ा  हो सकता है (उदाहरण के लिए, मैश किए हुए, थोड़ी मोटी बनावट वाले , सूखे भोजन) , इससे बच्चे अनेक प्रकार के भोजन का अनुभव कर पायंगे। कुछ माता पिता छह महीने की उम्र से ही फिंगर फ़ूड शुरू करते है।  बच्चे को वीनिंग शुरू करने से उन्हें खाने का पता चलता है और वो विभिन्न प्रकार के भोजन कम उम्र से ही खाना शुरू करते है।

 

बच्चो के लिए शीर्ष दस पूरक आहार क्या हैं ?

  • परंपरागत रूप से चावल पहले पूरक आहार में शामिल किया गया है क्योकि इससे एलर्जी होने की सम्भावना ना के बराबर होती है।  चावल का स्वाद सादा होता है इसलिए बच्चे इसे स्वीकार कर लेते है विशेषकर जब स्तन के दूध के साथ मिश्रित हो। यह उस समय आवश्यक लोहा भी प्रदान करता है जब शिशु में  लोहे का स्तर कम हो जाता है - यह आमतौर पर लगभग छह महीने की उम्र में होता है।
  • शकरकंद विटामिन और फाइबर का अच्छा  स्रोत है। प्यूरी करने पर इसकी बनावट चिकनी होती है जिसके वजह से ये दूसरे  सब्जिओं के साथ अच्छे से मिल सकता है।
  • गाजर स्वाभाविक रूप से मीठे होते हैं और उत्कृष्ट आहार में शामिल है  क्योंकि वे विटामिन ए में समृद्ध होते हैं।
  • पालक विटामिन (फोलेट और ए, सी, और के), लौह, और कैल्शियम में समृद्ध है।
  • घर पर  बना सब्जी  का सूप आपके बच्चे को खनिज और विटामिन  प्रदान करने में मदद करता है।
  • सेब  और नाशपाती आपके बच्चे के पहले फल के रूप में बहुत अच्छे है क्योकि पकने और प्यूरी करने के बाद ये पचने योग्य हो जाते है।
  • केले और पपीते को पकाने की जरूरत नहीं है, चम्मच या कांटे  से ये आसानी से मैश हो जाता है। केले को पूरा भी दिया जा सकता है क्योंकि बच्चे इसे आराम से पकड़ और चबा सकते हैं।
  • चावल, जौ, या जई जैसे अनाज को स्तन के दूध या फार्मूला दूध के साथ मिश्रित कर के  एक पोषक आहार बनाया जा सकता है।
  • फलियाँ (उदाहरण के लिए, दाल, चना) प्रोटीन, विटामिन (ए, सी, और फोलेट), फाइबर, और खनिज (कैल्शियम और लौह समेत) में समृद्ध होते हैं, और आमतौर पर लगभग आठ महीने की उम्र में दिए  जाते हैं, क्योंकि वे पचने में मुश्किल हो सकते है।
  • पानी और फलो का रस : हालांकि शिशु पूरक आहार शुरू  करने के बाद भी बहुत सारा दूध पीते हैं, फिर भी वे भोजन के दौरान अन्य तरल पदार्थ पी सकते हैं। अच्छी तरह से फलों के रस को जलमिश्रित (एक भाग ताजा फल के रस में 10 भाग उबला हुआ ठंडा पानी) कर के दे सकते हैं और  उनके भोजन के साथ पानी भी दिया  जा सकता है।

 

पूरक आहार शुरू करना क्यों जरूरी है?

आपका बच्चा पहले वर्ष में बहुत तेजी से बढ़ता है। आपको शायद यह नहीं पता होगा कि एक बच्चे का वजन छह महीने में जन्म के वजन से दोगुना हो जाता है और एक साल तक तिगुना हो जाता  है। इस वृद्धि का समर्थन करने के लिए, इस समय के दौरान बच्चों को बहुत पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है। छह  महीने स्तन पान के बाद आपके बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए खाद्य पदार्थ आवश्यक है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके बच्चे को पर्याप्त पोषण मिलता है, एक  योजना तैयार करें जिसमें दूध के साथ सभी समूहों के खाद्य पदार्तो को शामिल करें और अपने चिकित्सक से परामर्श लें।

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