गर्भावस्था के दौरान लोह की कमी जो भ्रूण वृद्धि में बाधा डाल सकती है

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गर्भावस्था के दौरान लोह की कमी जो भ्रूण वृद्धि में बाधा डाल सकती है

आपकी पहली तिमाही के अंत तक डॉक्टर आपको कुछ नए प्री-नेटल सप्लीमेंट्स लेने को कह सकते हैं, इसके अलावा आपको फोलिक एसिड की खुराक जारी रखनी है जो गर्भावस्था के शुरुआत से ही सुनिश्चित की गई होगी। इन सप्लीमेंट्स में मुख्य रूप से लोह और कैल्शियम की खुराक शामिल है इसके अलावा आपके स्वास्थ्य अनुसार कुछ और सप्लीमेंट्स भी बढ़ाये जा सकते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि गर्भावस्था के दौरान आपके शरीर की लोह आवश्यकता लगभग दोगुना हो जाती है, और शरीर में मौजूदा लोह भंडार और आहार में किये गए बदलाव इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होते। इन पूरक तत्वों को लेना और अपने आहार में लोह समृद्ध खाद्य पदार्थ शामिल करना महत्वपूर्ण है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान हुईं लोह की कमी के कारण एनीमिया हो सकता है, जो भ्रूण वृद्धि और गर्भवती माँ के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।


गर्भावस्था के दौरान लोह-कमी एनीमिया

आपके रक्तप्रवाह में जो लाल रक्त कोशिकाएं होती है वो हीमोग्लोबिन नाम के प्रोटीन से बनी होती है, जो लोह से बना होता है और ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगो तक पहुचाने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान गर्भ को ऑक्सीजन पहुचाने के लिए खून की मात्रा बढ़ाने के लिए लोह की दोगुनी मात्रा की जरूरत होती है। जब शारीरिक लोह इसकी पूर्ति नही कर पाता तब जो स्थिती उत्पन्न होती है उसको एनीमिया कहते है और यह भ्रूण की वृद्धि में बाधा डाल सकती है।

 

यह जानना महत्वपूर्ण है कि गर्भावस्था के दौरान होने वाली लोह की कमी और लोह की कमी के कारण एनीमिया होना ये एक जैसा नही होता है। गर्भावस्था में लोह की कमी होना एक साधारण अवस्था होती है जो ज्यादातर गर्भवती महिलाएँ महसूस करती है। लोह की मात्रा का थोड़ा कम होना आपके बच्चे के विकास के लिए हानिकारक नही माना जाता है। मगर यह कमी अगर बढ़ते हुए चरमसीमा तक पहुचती है तो ये लोह की कमी के कारण एनीमिया भी हो सकता है जो एक गंभीर समस्या बन सकती है।

 



गर्भावस्था के दौरान लोह की तीव्र कमी कैसे भ्रूण के विकास को बाधित कर सकती है

गर्भावस्था के दौरान लोह की कमी अगर तीव्रता से हो रही हो तो यह बच्चे के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जटिलता पैदा कर सकती है। इससे समय से पहले जन्म होने की संभावना बढ़ जाती है, जन्म के वक़्त शिशु का वजन कम हो सकता है आैर कुछ मामलों में नवजात शिशु की मौत भी हो सकती है। शोध के अनुसार गर्भावस्था में लोह की कमी से शिशु को स्वलीनता या आटिज्म होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। प्रतिरक्षा कार्य, न्यूरोट्रांसमीटर उत्पादन और माइलिनेशन में योगदान करके लोह शिशु के प्रारंभिक मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और यह तीनों ही मार्ग ऑटिज्म से निकटता से जुड़े हैं।



गर्भावस्था के दौरान लोह की तीव्र कमी की पहचान करना

एेसा माना जाता है कि ज्यादातर गर्भवती महिलाओं में थोड़ी - बहुत तो लोह की कमी पाई जाती है। मगर गर्भावस्था में तीव्रता से लोह की कमी के लक्षण निरंतरता से जांचते रहना अनिवार्य है, क्योंकि यह भ्रूण के विकास मे बाधा बन सकती है। जैसे कि थकान एवं कमजोरी, चक्कर आना, अनियमित दिल की धड़कन, छाती में दर्द, साँसों की कमी, सरदर्द, ठंडे पैर और हाथ। अगर आप इन में से कुछ भी अनुभव करती हैं तो आपको अपने डॅाक्टर से इस बारे में चर्चा करनी चाहिए, जो कि गर्भावस्था में तीव्रता से लोह की कमी से होने वाले एनीमिया की जाँच करने के लिए आपको रक्त परीक्षण की सलाह दे सकते है।

 

गर्भावस्था के दौरान, आपके शरीर को प्रति दिन 27 मिलीग्राम लोह की आवश्यकता होती है। बाहर से लेने वाले लोह की मात्रा आपके शरीर में उपलब्ध लोह की मात्रा पर आधारित होती है। इसलिए आपके डाॅक्टर ही इसका सही निर्णय ले सकते है कि गर्भावस्था में आपको कितनी लोह की आवश्यकता होगी। हालांकि गर्भावस्था के दौरान लोह की कमी भ्रूण वृद्धि में बाधा डाल सकती है, फिर भीे सही पोषण और पूरकतत्वों के साथ इन जटिलताओं से बचना संभव है।
अन्ततः गर्भवती स्त्रियों के लिए इस लेख का संदेश यह है कि वह इन स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओ  से बचने के लिए अपने डॉक्टर की सलाह का सटीक पालन करें।

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