सिजेरियन या नार्मल डिलीवरी का निर्णय

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सिजेरियन या नार्मल डिलीवरी का निर्णय

क्या आप अपने बड़े दिवस, अपनी डिलीवरी की प्लानिंग कर रहे है और सीज़ेरियन या नॉर्मल डिलीवरी दोनों के बारे में जानने के लिए उत्सुक है? क्या आप भी सोच में है की दोनों में से बेहतर और सुरक्षित विकल्प कौन सा है? परेशान न हो। इस अनुच्छेद के माध्यम से आप नॉर्मल और सिज़ेरियन डिलीवरी के बिच में अंतर और उनकी ज़रूरत समझ सकते है।


नॉर्मल डिलीवरी


नार्मल डिलीवरी का मतलब है बच्चा वेजाइना से गर्भाशय के संकुचन या कॉन्ट्रैक्शन के कारण बाहर आता है। इसमें पहले बच्चे का सिर बाहर आता है फिर सिर को पकड़कर पूरी बॉडी को बाहर खींचा जाता है।


नार्मल डिलीवरी प्रक्रिया


इस प्रक्रिया में महिला के शरीर में सभी हारमोंस का अच्छी तरह बनना और स्त्रावित होना ज़रुरी है जिससे यह प्रक्रिया सामान्य तौर पर हो पाती है। इसके अलावा भी अन्य शारीरिक क्षमताओं की भी आप को आवश्यकता होती है जैसे कॉन्ट्रैक्शन में होने वाला दर्द सहने की क्षमता। इसके लिए घर की बड़ी महिलाएं गर्भावस्था की शुरुआत से ही आप को तैयार करने लगती है। इस तरह नार्मल डिलीवरी में बच्चे और आप दोनों ही सुरक्षित और स्वस्थ रह पाते है।


नार्मल डिलीवरी के फायदे


इस प्रक्रिया में होने वाले परिवर्तन बच्चे के लिए बहुत लाभकारी होते है क्योंकि इसमें बच्चे का जन्म उस द्रव के निकलने के साथ होता है जो गर्भाशय में पहले से उपस्थित था। इसलिए उसमें बच्चे के शरीर में हेल्दी बैक्टीरिया पहुँचने की पूर्ण सम्भावना रहती है और बच्चा जन्म से ही कई सारी बीमारियों से लड़ने की क्षमता रखता है।


नार्मल डिलीवरी से आगे जीवन में बच्चे की आँतों में पनपने वाले बैक्टेरिया की अच्छी-खासी पॉपुलेशन मिल जाती है। इस तरह वह अपने जीवन की कई कठिनाइयों को चुटकी में पार कर लेता है।


माँ को मिलने वाले फायदे


इसके अलावा माँ को बच्चे के जन्म के तुरंत बाद सामान्य स्थिति में वापस जाने में कम समय लगता है। आप अपने बच्चे को तु्रन्त स्तनपान(ब्रेस्ट फीडिंग ) करवा सकती है और हार्मोंन्स के अच्छे संतुलन के कारण आप खुद में अच्छा महसूस करती है।


सी- सेक्शन या सिजेरियन डिलीवरी?


नॉर्मल डिलीवरी के दर्द और प्रक्रिया सुनने के बाद बहुत सी ऐसी महिलायें है जो सोचती है की सिजेरियन डिलीवरी में दर्द नहीं होगा, पर ऐसा नहीं है। आइए आपको हम ये बताये की सिज़ेरियन डिलीवरी की क्या प्रक्रिया है और उसके उपरान्त होने वाली दिक्कते के बारो में।


सिज़ेरियन डिलीवरी की प्रक्रिया


जब आप की स्थिति सामान्य स्थितियों से अलग हो तो डॉक्टर सी- सेक्शन या सिज़ेरियन डिलीवरी का विकल्प चुनते है। यदि आप ओवरवेट हों, बच्चा पैरो की और से निचे की तरफ है, या फिर आपकी फिजियोलॉजिकल कंडीशन सही न हो तो सिज़ेरियन बेबी डिलीवरी का आप्शन लिया जाता है।


इसमें आप को निश्चेतक (एनेस्थीसिया) दिया जाता है और गर्भाशय तक चीरा लगाकर बच्चे को निकाला जाता है।


सिजेरियन डिलीवरी के नुकसान


सिज़ेरियन डिलीवरी में बच्चा और आप दोनों ही सुरक्षित रहते है। अगर कोई भी रिस्क फैक्टर होता है तो डॉक्टर और माता-पिता दोनों ही सिज़ेरियन डिलीवरी की अनुमति ली जाती है।


सिज़ेरियन डिलीवरी में आप की रिकवरी होने में ज्यादा समय लगता है, तुरंत बच्चे को ब्रैस्ट फीडिंग नहीं करवाई जा सकती और बच्चा माँ के शरीर से मिले बैक्टीरिया का लाभ नहीं उठा पाता। इस कारण कम उम्र में इन्फेक्शन का रिस्क ज़्यादा होता है।


एक सफल डिलीवरी


चाहे सिज़ेरियन हो या नार्मल, इन दोनों परिस्थितियों में आपके डॉक्टर के मार्गदर्शन से आप बच्चे और अपनी स्थिति की जांच कर सही  डिलीवरी के तरीके का निर्णय ले सकती है।

 

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