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ऐसे करें अपने शिशु के गर्भनाल की देखभाल

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ऐसे करें अपने शिशु के गर्भनाल की देखभाल

एक शिशु के जन्म लेने से पूरे परिवार में उत्साह की नई लहर छा जाती है। खुशी मनाने के साथ-साथ बहुत ज़रूरी है कि हम नवजात शिशु की सही तरह से देखभाल करें। पर्याप्त मात्रा में और सही समय पर उनका पेट भरने के साथ शरीर को स्वच्छ रखना भी ज़रूरी है।

 

ऐसा ही एक हिस्सा है गर्भनाल (अम्बिलिकल कॉर्ड) जिसका देखभाल अनिवार्य है। शिशु जब गर्भ में होता है तो उसे माँ से पोषण गर्भनाल द्वारा ही मिलता है जो उसके नाभि से जुड़ा होता है। यही वह कड़ी है जो शिशु का गर्भ में उसके माँ के साथ संपर्क बनाए रखता है।

 

जन्म के बाद गर्भनाल का कोई काम नहीं होता है और डॉक्टर इसे काट कर बंद कर देते हैं। कुछ हफ़्तों बाद यह खुद ही पूरी तरह से सूख जाता है और इसका अवांछित हिस्सा गिर जाता है।

 

एक नवजात बच्चे में रोग प्रतिरोधक शक्ति यानि कि संक्रमण से लड़ने की क्षमता बहुत कमज़ोर होती है। इसलिए गर्भनाल का सही तरह ध्यान रखना ज़रूरी है और आपको इसके लिए पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

 

 

आइए जानें कि आप अपने बच्चे के गर्भनाल की कैसे देखभाल कर सकती हैं।

गर्भनाल की देखभाल के लिए कुछ विशेष बातें



 

स्वच्छ और सूखा


गर्भनाल को हमेशा साफ़ और सूखा रखें। नाल और पेट की दिवार के बीच कभी भी किसी प्रकार का रिसाव दिखे तो उसे तुरंत साफ़ करें। बच्चे के नहाने, स्पंज और नैपी बदलते समय नाल को चेक करना ना भूलें।

 

साफ़ करने का सही तरीका


गर्भनाल की चमड़ी के ऊपरी हिस्से को साफ़ करने के लिए उबला हुआ ठन्डा पानी लें। इसमें साफ़ कॉटन बड या बॉल भिगा कर नाल के आर पार की चमड़ी पोछें। एक ही का इस्तेमाल न करते हुए आप अनेक कॉटन बड या बॉल भिगो कर लें ताकि नाल अच्छी तरह साफ हो जाए। आखिर में स्टंप को पोंछ दें। यह कार्य धीरे करें, रगड़े नहीं और सावधानी बरतें कि स्टंप से खून न निकल जाए।

 

डॉक्टर के सलाह के बिना कुछ न लगाएं
डॉक्टर की सलाह के बिना नाल पर आपको पाउडर, तेल, दवा, प्लास्टर इत्यादि नहीं लगाना चाहिए।

 

नाल को पट्टी से न ढकें
नाल का नेचुरल तरीके से सूखना ज़रूरी है और इसके लिए आप इसे किसी प्रकार की पट्टी से न ढकें।

 

स्टंप गिरते समय नैपी में खून दिखना सामान्य है
अगर आप अपने शिशु के नैपी में कुछ खून के धब्बे देखें तो घबराइए नहीं। जब तक नाभि पूरी तरह से सूख न जाए, इसे उबले हुए ठन्डे पानी और रुई से पोंछ कर साफ़ करते रहें। जब रिसाव आना बंद हो जाए, इसका मतलब घाव भर चूका है और आपको कुछ करने की आवश्यकता नहीं है।

 

नैपी कस कर न पहनाएं

ध्यान दें कि नैपी ज़्यादा कस कर नहीं बांधे और नैपी को हमेशा गर्भनाल के नीचे ही रखें। ऐसा करने से गर्भनाल को नेचुरल तरह से सूखने में मदद मिलेगी और वह अनावश्यक रगड़ या घिसाव से बचा रहेगा।

 

नहाते समय नाभि सूखा रखने की कोशिश करें
जब डॉक्टर आपके नवजात शिशु को नहलाने के लिए हामी भर दें और अगर स्टंप गिर कर सूखा नहीं हो, तो कोशिश करें कि नाभि के आस पास की त्वचा नहाते समय गीली न हो। सूखने के बाद भी साबुन से नाभि को रगड़े नहीं। हलके हाथ से साफ़ कर के सावधानी बरतें।

 

नाल को अपने आप झड़ने दीजिए
नाल का झड़ कर गिर जाना प्रकृति का कार्य है। अगर यह एक धागे जैसे चमड़ी से भी लटका रह गया है तो भी इसे छेड़ना या खींचना नहीं चाहिए। झड़ने के बाद इस में से बार-बार खून आए तो डॉक्टर से सलाह ले कर ही कोई एंटीसेप्टिक क्रीम लगाएं।

 

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अगर गर्भनाल के आस-पास का क्षेत्र लाल हो गया हो या सूजन दिखाई दे रही हो, तो ढील न बरतें। इनके साथ-साथ नाभि से बुरा गंध आना या पीप जैसा द्रव्य जमा हो जाना भी संक्रमण का संकेत है।

अगर नाल से ज़यादा खून बहने लगे तो विलम्ब नहीं करनी चाहिए।

अगर नाभि के आस-पास के त्वचा को छूने से बच्चा रोने लगता है तो समझ जाइए ये संक्रमण की शुरुआत है।

बच्चे को इस दौरान बार-बार बुखार आता है तो इसका कारण भी गर्भनाल में संक्रमण हो सकता है। ये जांच के बाद डॉक्टर ही बता पाएंगे।

 

सही देखभाल है सुखद मातृत्व का आधार!
इन बातों को पढ़ कर आप जान गए होंगे कि आखिर वे क्या चीज़े है गर्भनाल की देखभाल के बारे में जिनका आपको विशेष रूप से ध्यान रखना है। याद रखें सावधानी बरतने में ही समझदारी है।

 

अपने नवजात शिशु को हर मायने में सही देखभाल और  पोषण दें। सिर्फ़ गर्भनाल ही नहीं, उसके हर अंग को साफ़ सुथरा रखें, कॉटन के ढीले कपडे पहनाये, ठण्ड से दूर रखें, और हर वो हिदायत का पालन करें को जन्म के समय आपके डॉक्टर से मिली होगी। इन सब ज़रूरी बातों का पालन करने से आप सही मायने में मातृत्व का आनंद ले पाएंगी। 

 

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