डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के कारण

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डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के कारण

प्रसव के बाद के पहले कुछ दिनों और हफ्तों में, एक नई माँ विभिन्न भावनाओं से भर जाती है। वह भय, खुशी, और आनंद सहित कई अद्भुत भावनाओं को महसूस करती है।

 

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन होना बहुत स्वाभाविक होता है। इसे 'पोस्टपार्टम डिप्रेशन' कहा जाता है। प्रसव या जन्म देने के कुछ दिनों के भीतर ही ज़्यादातर महिलाओं में भावनात्मक बदलाव महसूस होता है जिनको 'बेबी ब्लूज़ ' कहते हैं। इस दौरान आप उदास या खाली महसूस कर सकती हैं। कई महिलाओं के लिए, बेबी ब्लूज़ 3 से 5 दिनों में चले जाते हैं। पर यदि आप एक सप्ताह से ज़्यादा समय से उदास, निराशाजनक, या 2 सप्ताह से अधिक समय तक खाली महसूस कर रही हैं, तो आपको डिलीवरी के बाद डिप्रेशन या पोस्टपर्टम डिप्रेशन हो सकता है। प्रसन्न होने के बाद निराश या खाली महसूस करना माँ होने का नियमित या अपेक्षित हिस्सा नहीं है।

 

डिलीवरी के बाद आपके शारीरिक, भावनात्मक, और व्यवहारिक स्वभाव में परिवर्तन होता है, जो की शोधकर्ताओं के अनुसार डिलीवरी के बाद 4 सप्ताह के भीतर ही शुरू हो जाता है।

 

सात में से एक महिला को नार्मल बेबी ब्लूज़ की तुलना में कुछ अधिक भावनाओं का अनुभव होता है। ऐसी महिलाएं जो उदास है या कई हफ्तों या उससे अधिक के लिए चिंता के साथ संघर्ष करती हैं, उनमें डिलीवरी के बाद डिप्रेशन या पोस्टपार्टम डिप्रेशन (या पीपीडी) हो सकता है। डिलीवरी के बाद बेबी ब्लूज़ पीपीडी की तुलना में जल्दी से गुज़रते हैं जबकि पीपीडी लम्बे समय तक चलने वाला और गंभीर रूप से महिला की दैनिक दिनचर्या से गुज़रने की क्षमता को प्रभावित करने वाला डिप्रेशन है।

 

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के संकेत और लक्षण


यह देखने में आया है की 20 प्रतिशत से ज़्यादा नयी माँओ में डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के लक्षण देखे गए है। उनमें से कुछ लक्षण निम्नलिखित है :

  • कई हफ्तों या उससे अधिक दिनों के लिए उदास रहना या महसूस करना।
  • परिवार और दोस्तों से दूरी का अनुभव करना।
  • घर में होने वाली किसी भी गतिविधियों में रुचि ना होना।
  • खाने और सोने की आदतों में परिवर्तन।
  • हमेशा थका हुआ महसूस करना।
  • गुस्से या चिड़चिड़ाहट होते रहना।
  • चिंता, डर , परेशानी या बेमतलब के विचार आना।

 

कई बार डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के संकेत जल्दी ही दिखना शुरू हो जाते है पर बहुत बार ऐसा भी देखा गया है की डिलीवरी के एक महीने बाद तक इस प्रकार के लक्षण मिलते रहते हैं। मानसिक परिवर्तन के अलावा डिप्रेशन के अन्य कारण भी होते है जैसे की :

  • प्रसव के कारण होने वाले हार्मोनल परिवर्तन।
  • भावनात्मक तनाव, वित्तीय तनाव, इत्यादि।
  • सामाजिक संबंधों में परिवर्तन या एक मज़बूत सपोर्ट नेटवर्क की कमी।
  • विशेष ज़रूरतों वाले एक बच्चे को जन्म देना या एक शिशु जिसका देखभाल करना चुनौतीपूर्ण है।
  • मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों का पारिवारिक इतिहास होना।

 

डिलीवरी के बाद डिप्रेशन को कैसे ठीक किया जा सकता है ?


यदि आपमें डिलीवरी के बाद डिप्रेशन के लक्षण हैं, तो अपने डॉक्टर या मेन्टल हेल्थ स्पेशलिस्ट से बात करें। आपका  डॉक्टर आपको नियमित रूप से काउंसलर से मिलने या एंटीड्रिप्रेसेंट दवाएं लेने की सलाह दे सकते है। अक्सर, दवाई और काउंसलिंग एक साथ करने की सलाह दी जाती है। हालाँकि डिलीवरी के बाद डिप्रेशन कई बार अपने आप ही दूर जाता है, पर यदि ना हो तो आमतौर पर दवा और टॉक थेरेपी की मदद से आप डिलीवरी के बाद डिप्रेशन पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।

 

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