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क्या हैं बच्चे के लिंग की भविष्यवाणी से जुड़े मिथक व तथ्य ?

क्या हैं बच्चे के लिंग की भविष्यवाणी से जुड़े मिथक व तथ्य ?

20 Mar 2019 | 1 min Read

जैसे ही किसी महिला के माँ बनने की खबर घर में फैलती हैं सबके मन में यही सवाल रहता है कि लड़का होगा या लड़की। लिंग की भविष्यवाणी कुछ ऐसी होती है जो बच्चे के होने से पहले माता-पिता जानने की कोशिश करते हैं। जबकि तथ्य यह है कि परिवार में शामिल होने वाले नया सदस्य का आगमन ही पर्याप्त रोमांचक है। मगर, फिर भी सभी उम्मीद करने वाले माता-पिता अपने बच्चे के लिंग के बारे में उत्सुक होते हैं। जहां पूरे परिवार और दोस्तों का समूह पहले दिन से अनुमान लगाने का काम करता है , गर्भावस्था के दौरान लिंग की भविष्यवाणी के लिए अधिक विश्वसनीय और वैज्ञानिक तरीके आज उपलब्ध हैं। आइए जानते हैं बच्चे के लिंग की भविष्यवाणी के लिए कौन सी तकनीक सबसे मददगार साबित हो सकती है – 

 

शिशु लिंग भविष्यवाणी के लिए सामान्य तकनीक

शिशु के लिंग का पता करने के लिए आजकल कई मेडिकल तकनीकी इस्तेमाल की जाती हैं,हालांकि भारत में भ्रूण का लिंग परीक्षण कानूनन अपराध है।

1. अल्ट्रासाउंड का उपयोग कर लिंग की भविष्यवाणी: –

 

गर्भ के अंदर शिशु के लिंग का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड एक आसान और विश्वसनीय तरीका है। प्रक्रिया के दौरान, महिला को अपनी पीठ पर सपाट लेटना पड़ता है जबकि उसके पेट पर एक जेल लगाया जाता है। पेट के ऊपर एक अल्ट्रासाउंड जांच की जाती है जो ध्वनि तरंगों को प्रसारित करती है। अल्ट्रासाउंड मशीन गर्भ के अंदर बच्चे की छवि बनाने के लिए ध्वनि तरंगों का उपयोग करती है। हालांकि, जननांग क्षेत्र की स्पष्ट दृश्यता वास्तविक प्रक्रिया के दौरान बच्चे के हिलने पर काफी निर्भर करती है। महिला को स्कैन से पहले कई गिलास पानी पीने के लिए कहा जाता है क्योंकि यह एक स्पष्ट छवि प्राप्त करने में मदद करता है।

 

यह प्रक्रिया माँ या भ्रूण के लिए कोई खतरा पैदा नहीं करती है, और माँ को पूर्ण मूत्राशय और पेट पर फ्लैट होने के कारण कुछ असुविधा का अनुभव हो सकता है। हालाँकि, यह प्रक्रिया के तुरंत बाद ठीक हो जाता है।

 

यह लिंग की भविष्यवाणी के सबसे सटीक तरीकों में से एक है।

 

2. विसंगति स्कैन रिपोर्ट से लिंग की भविष्यवाणी: –

 

विसंगति स्कैन रिपोर्ट और सेल-फ्री डीएनए रिपोर्ट 100 प्रतिशत सटीक परीक्षण हैं जो शिशु के लिंग को प्रकट करने में मदद करते हैं। हालांकि, ये परीक्षण शिशु के लिंग-निर्धारण के लिए नहीं, बल्कि विकासशील भ्रूण में दोषों का पता लगाने के लिए संकेत दिए गए हैं। इस पद्धति का उपयोग करके कई प्रमुख आनुवंशिक और विकासात्मक दोषों की पहचान की जा सकती है।

 

इसी तरह, बच्चे में क्रोमोसोमल दोष का पता लगाने के लिए एमनियोसेंटेसिस और कोरियोनिक विलस सैंपलिंग का उपयोग किया जाता है। ये परीक्षण बच्चे के लिंग की सटीक भविष्यवाणी भी कर सकते हैं।

इन सब के अलावा गर्भ में शिशु के लिंग का पता लगाने के लिए कुछ घरेलू पारम्परिक विधियां भी प्रयोग में लाई जाती हैं, आइए, जानते हैं भारतीय विधियों के बारे में – 

कहा जाता है कि आपके गर्भ में लड़की होने की संभावना ज्यादा है, यदि….

कुछ लोकमान्यताएं हमारे भारतीय समाज में प्रचलित हैं जो ये अनुमान लगाने में मदद करती हैं कि गर्भ में लड़का है लड़की। इनपर पूरी तरह विश्वास तो नहीं किया जा सकता क्योंकि ये वैज्ञानिक रूप से परखी हुई जानकरी नहीं है।

  • रात के जगह दिन में  दोपहर में बनाए गए यौन सम्बन्ध से बेटी होने की उम्मीद लगाई जाती है।
  • अगर पति और पत्नी सम (ईवन) दिनों में रतिक्रिया करते हैं तो भी लड़की पैदा होने की सम्भावना रहती है।
  • कहते हैं बिस्तर के नीचे लकड़ी की चम्मच और तकिए के नीचे गुलाबी रिबन रखने से बेटी का जन्म होता है।
  • चटपटा खाने का मन करता है तो यह भी गर्भ में बेटी होने का संकेत होता है।
  • गर्भवती के पेट पर धागे से अंगूठी लटकाई जाती है और अगर वो घूमने लगती है, तो इसे लड़की का संकेत कहा जाता है।

कहा जाता है कि आपके गर्भ में लड़के के होने की संभावना ज्यादा है, यदि…

  • दिन के जगह रात में बनाए गए यौन सम्बन्ध से बेटे होने की उम्मीद लगाई जाती है।
  • अगर पति और पत्नी विषम (ऑड) दिनों में रतिक्रिया करते हैं तो भी लड़का पैदा होने की सम्भावना रहती है।
  • सोते समय महिला के सिर पर थोड़ा नमक छिड़का जाता है। जागने पर, यदि वह किसी पुरुष का नाम लेती है, तो उसके गर्भ में लड़का हो सकता है।
  • गर्भवती के पेट पर धागे से अंगूठी लटकाई जाती है यदि यह एक पेंडुलम की तरह आगे और पीछे घूमती है, तो आप एक लड़के की उम्मीद कर सकते हैं।
  • मीठे खाद्य पदार्थ खाने का मन करता है तो यह भी गर्भ में बेटे के होने का संकेत होता है।

भारत में, पूर्व-गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन पर प्रतिबंध) अधिनियम की शुरुआत के बाद से लिंग भविष्यवाणी पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस प्रकार, आपके बच्चे के जन्म से पहले उसके लिंग का निर्धारण करना भारतीय कानून के अनुसार अवैध है, चाहे आप बच्चे को गर्भपात कराने की योजना बना रहे हों या नहीं। यह अधिनियम भारतीय आबादी में बिगड़े लिंगानुपात को सुधारने के लिए रखा गया है, इसलिए आपको इसका हमेशा पालन करना चाहिए

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