क्या आपके बच्चें को लगातार ऊपरी सांस नलिका में संक्रमण होता है ।

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क्या आपके बच्चें को लगातार ऊपरी सांस नलिका में संक्रमण होता है ।

मेरे पिछले आठ वर्षो के अभ्यास में अक्सर अपर रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट इंफेक्शन वाले कई बच्चें मेरे पास आये और होम्योपैथी ने उन्हे कभी निराश नही किया । यूआरटीआई कई माता-पिता के लिये एक चिंता का विषय है ।


ऊपरी श्वास नलिका के संक्रमण(यूआरटीआई) एक तीव्र संक्रमण के कारण होने वाली बीमारी है जिसमें ऊपरी श्वास में नाक,साइनस,ग्रसनी या स्वर यंत्र शामिल है ।


कुछ सामान्य ऊपरी श्वास संक्रमण हैः

 

  • जुकाम(इसमें एलर्जीक राइनाइटिस,वायरल,बैक्टिरीयल इंफेक्शन आदि शामिल है ।)
  • टान्सिलिटिस
  • ग्रसनी शोथ
  • लेरिंगाइटिस
  • साइनसिसिस
  • ओटिटिसमीडिया आदि


हम एक एक करके यूआरटीआई के कुछ सामान्य लक्ष्णों को देखते हैः

 

  • नाक की रूकावट
  • नाक से डिस्चार्ज निकलना
  • नाक में जलन और खुजली
  • प्रसवोत्तर स्त्राव
  • छिंक आदि
  • गले में जलन,दर्द या लालिमा
  • खांसी
  • भोजन को निगलने में कठिनाई
  • आवाज की कर्कशता या बोलने में कठिनाई आदि
  • कानो में दर्द
  • कानो से डिस्चार्ज होना
  • कम सुनना
  • कानो की रूकावट


प्रत्येक लक्षण और ऊपर बताये अनुसार निदान करने में मदद करते है कभी-कभी ये लक्षण जलन और आँखो,बुखार,अस्वस्थता,शरीर में दर्द,सिर दर्द या कमजोरी से मुक्ति के साथ जुड़े हो सकते है ।

 

यह एलर्जी की समस्या पैदा करने वाली प्रतिक्रियाशील प्रतिक्रिया है,वायरल संक्रमण,जीवाणु संक्रमण ।


प्रोटिन की कमी वाले आहार कम पोषण नींद की कमी,खराब स्वच्छता,आसपास का वातावरण आदि जैसे कई कारको के कारण है ।


हमने देखा है कि बच्चों को स्कूल जाने के बाद बार-बार संक्रमण  हने लगता है ।


रोकथाम..


प्रतिरक्षा में सुधार किया जा सकता है और संक्रमणो को सरल उपायो द्वारा रोका जा सकता है ।
उचित संतुलिस पोषण और अच्छी भोजन की आदतें ।
शारिरीक गतिविधि(बाहर खेलना)
पर्याप्त नींद
हाइजेनिक परिवेश
मानसिक कल्याण
उपचार..
होम्योपैथिक उपचार में संक्रमणों के कारण जानने के लिये सभी कारको को समझना जरूरी है । बच्चें के व्यक्तित्व को समझने के बाद,होम्योपैथिक दवा दी जा सकती है । होम्योपैथिक उपचार एक दिन के बच्चें को भी दिया जा सकता है । यह बहुत ही सुरक्षित है ।
सम्वर्ती संक्रमणों के लिये होम्योपैथिक कैसे काम करती है ।
होम्योपैथिक का उपयोग न केवल तीव्र संक्रमण के ईलाज के लिये किया जाता है,बल्कि संक्रमण की आवर्ती और तीव्रता को कम करने के लिये भी किया जाता है । यह बच्चें की प्रतिरक्षा में सुधार करता है ताकि बच्चा बार-बार संक्रमित न हो और उसकी सहज क्षमता विकसित हो ।


मैने बच्चों को हर बार एंटीबायोटिक दवाओ को अनगिनत बार लेते देखा है,भले ही उन्हे एलर्जी हो,जो बच्चें की प्रतिरक्षा को और कमजोर करता है एक बात जो माता-पिता को ध्यान में रखनी चाहियेः

 

  • भले ही आप एलोपेथिक दवाओ का उपयोग कर रहे हो,हर व्यक्ति की जांच रिपोर्ट एक सी नही होती ।
  • वायरल संक्रमण का इलाज कुछ मामलो में लक्षण सम्बन्धी या एंटीवायरल दवाओ के साथ किया जाना चाहिये ।
  • एलर्जी के लक्षणो का उपचार एलर्जी विरोधी और रोग सूचक उपचार से किया जाना चाहिये ।
  • यदि संक्रमण केवल बैक्टीरिया का है तो इसका इलाज एंटीबायोटिक से किया जाना चाहिये,एंटीबायोटिक दवाइयो का कोर्स पूरा करे इसे आधे मे न छोड़े यह बैक्टीरिया को प्रतिरोधी बनाता है ।

 

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