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बच्चों में मोटापा – टोडलर्स में चिन्ता का कारण

बच्चों में मोटापा – टोडलर्स में चिन्ता का कारण

2 May 2019 | 1 min Read

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बच्चों के मोटापे ने पूरे परिवार के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है ।

’’बच्चों में मोटापा’’ बाल रोग चिकित्सको के लिये चुनौती बन गयी है । बच्चों में मोटापा ज्यादातर अमेरिका में देखा जाता था । अब यह भारत में भी प्रचलित है और टोडलर्स में फैल रहा है । असल में भारत में दुनिया के दूसरे सबसे अधिक मोटे बच्चें है, जबकि अनुवांशिकी इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । बचपन में वजन के ग्राफ को बढ़ाने के लिये किसी भी व्यवहार एवं कारको को नजरअंदाज नही करना चाहिए ये सामान्य चिन्ताएं है ।

मोटापा बनाम अधिक वजन – एक बच्चें का वजन उसके स्वास्थ्य को प्रकट करता है । अधिक वजन और मोटापे में ज्यादा अन्तर नही है । 85 वीं प्रतिशतक से अधिक बीएमआई का मतलब अधिक वजन है , जबकि 95 प्रतिशत से अधिक बच्चों को मोटापे से ग्रस्त माना जाता है, जिससे दिल की बीमारी और मधुमेय जैसी बीमारियो का खतरा बढ़ जाता है । गंभीर मोटापा 95 प्रतिशत से 120 प्रतिशत बीएमआई है ।

बच्चों में मोटापे का खतरा बढ़ने के कारणः

गलत भोजन की आदतेः आज के समय में बच्चें फास्ट फूड,जंक फूड,भोजन फूड ज्यादा पंसद करते है । इन सभी भोजन में कार्ब्स अत्यधिक होता है जिसमें पोषण की कमी होती है और यह दिल की बीमारी और कॉलेस्ट्रॉल,डायबीटिज के स्तर में वृद्धि करता है ।

व्यायाम की कमीः

 

शहरी क्षेत्रो में,खेल मैदानो की कमी और सुरक्षा के डर के कारण,आउटडोर गेम खेलने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी आई है । इससे बच्चों के शारीरिक विकास पर बड़ा प्रभाव पड़ता है । दो साल से छोटे बच्चों को शारीरिक गतिविधि के साथ स्क्रीन पर चिपके हुए घर के अंदर रखा जाता है ।

मिसिंग ग्रोथ चार्टः

 

कम से कम 6 साल की उम्र तक जन्म से विकास चार्ट बनाये रखना बच्चों के विकास और विकास को ट्रैक करने के लिये बहुत जरूरी है । गोल मटोल बच्चें हमेशा प्यारे लगते है लेकिन मोटापा अस्वस्थता की निशानी है, हमें बच्चों के वजन और ऊँचाई के अनुपात पर नजर रखनी चाहिये । चिकित्सा की दृष्टि से इसे बॉडी मांस इण्डैक्स बीएमआई कहा जाता है जो शरीर का मोटापा मापने का उपाय है । यदि शुरूआत मे इसे नजरअंदाज कर दे तो कुछ ही समय बाद अधिक वजन मोटापे का कारण बन सकता है य़।

सेडेंटरी लाइफस्टाइलः

 

सेडेंटरी एक पुराना शब्द था जो पुराने लोगो से था । जंक फुड खाने और स्क्रीन देखने से उनका इंडोर टाइम बढ़ रहा है और बाहरी शारीरिक गतिविधि में काफी कमी आई है । जबकि रोग नियंत्रण और रोकथाम केन्द्रो ने और समुदायों ने इस पर काम किया है ताकि वे बचपन में अधिक वजन और मोटापे से बचने के लिये और उपाय करें । कुछ निवारक उपाय है जिन्हें हम अपने बच्चों के साथ घर पर कर सकते हैः
ज्यादा खाने से बचेः माताओ को हमेशा लगता है कि उन्होने अपने शिशुओ को पर्याप्त भोजन नही दिया है हम हमेशा अपने बच्चों को अलग-अलग तरीको से ज्यादा खाना खाने के लिये मजबूर करने की कोशिश करते है । हमें अपने बच्चें के आहार का सम्मान करना चाहिये और उसे ज्यादा खिलाने से बचना चाहिये ।

संतुलित स्वस्थ आहारः

 

फाइबर,प्रोटिन और वसा में 30 प्रतिशत से अधिक नही होने के लिये एक स्वस्थ ताजा और संतुलित आहार देना बहुत जरूरी है जब हम अपने बच्चों को ठोस आहार देना शुरू करते है तब हमें एक सचेत आहार देना चाहिये ।

 

नो टू हाई कैलोरीः

 

टोडलर्स को ज्यादा कैलोरी न दे उनका आहार फल और सब्जियो से भरपूर होना चाहिये जब बच्चें दो साल के हो जाये तो दूध को स्कीम मिल्क से बदलें, दूध में वसा अधिक पाया जाता है और मोटापे के मामले में इसकी प्रमुख भूमिका है ।

सक्रिय प्ले को प्रोत्साहित करेः

 

बच्चों को आउटडोर खेल और सक्रिय खेल के लिये प्रोत्साहित करें, खेल के मैदान की गतिविधियां परिवार और दोस्तो के साथ नियमित रूप से खेलना अनिवार्य होना चाहिये ।
एक व्यापक दृष्टिकोण निश्चित रूप से बचपन में मोटापे को सम्बोधित करता है  इसमे देखभाल करने वाले,माता-पिता,स्कूलो और अन्य सम्बन्धित समुदायों के सदस्यों के साथ पोषण शारीरिक गतिविधि के मुद्दो को चर्चित रखें लेकिन इसकी शुरूआत अपने घर से ही करें क्योंकि माता-पिता सतर्क और जागरूक रहे तो कम उम्र से ही सही उपाय किया जा सकता है ।

 

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