क्या आपका बच्चा खाने में मीन-मेख निकालता है?

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क्या आपका बच्चा खाने में मीन-मेख निकालता है?

जब आपका बच्चा छह महीने का हो जाए तो उसे स्तनपान के साथ-साथ ठोस आहार खिलाना शुरू कर देना चाहिए। इस दौरान बच्चे बड़ों का भोजन करना सीख जाते हैं। वे अब अपने आप कटोरी-चम्‍मच से खाना शुरू कर देते हैं। उसके पहले जन्मदिन के बाद से उसके लिए घर पर बने भोजन जैसे अनाज, सब्ज़ियों, फलों, अंडों, मछली, मांस और बीन से ही पोषक शिशु आहार तैयार किए जा सकते हैं। इस समय शिशु को मांस, मछली, अंडे की जर्दी, लीवर, और गहरे हरे रंग की पत्‍तेदार सब्ज़ियां खिलाना शुरू करें जिससे उसके शरीर को पोषक तत्व मिलते रहें।


हम बच्चों को भोजन में किसी प्रकार की कमी होने देना नहीं चाहते हैं, इसके लिए मांएं पूरी कोशिश करती हैं। मगर सारी कोशिश धरी-की-धरी रह जाती है जब बच्चा खाने में ना-नुकूर करता है। उसे कितना भी अच्छा खाना बना कर दो वो हर बार खाने में मीन-मेख निकालता है। आज बच्चा जो शौक से खाता है कल उसकी तरफ देखता भी नहीं।


क्या आपका बच्चा भी ऐसा करता है? तो अपने बच्चे की पसंद-नापसंद को ध्यान में रखते हुए नीचे दिए गए तरीकों से उसकी आदत बदली जा सकती है।



बच्चे को खाने की नई चीज कैसे खिलाएं?



1. जब कोई नई चीज पकाएं तो बच्चे के सामने उसकी तारीफ  करें जिससे बच्चे में भोजन के प्रति उत्सुकता बढ़ती है। इस पर भी अगर ना-नुकूर करे तो उसे बस एक बार देखने के लिए कहें। उसे आश्वत कराएं कि अगर पसंद नहीं आया तो मत खाना।

2. नई डिश को परोसें और उसे छूने के लिए कहें फिर चखने के लिए भी कहें। बच्चे को समझाएं कि खाने को ना बोलने से पहले उसे चख कर देख लेना सही रहता है। बच्चे को बताएं कि अगर वो एक बार खाने को चखेगा तो आपको अच्छा लगेगा।

3. अपने बच्चे को हर बार नया खाना खिलाने के लिए आपको हर बार मेहनत करनी पड़ेगी इसलिए आपको धीरज से काम लेना पड़ेगा।

4. बच्चे में भूखे रहने की आदत न पड़ने दें। न खाने पर अगर आप उसे भूखा रहने देंगी तो बच्चा भूखा रहना सीखेगा, जब तक कि उसे अपना पसंदीदा खाना नहीं मिल जाता। इससे बच्चे में ज़िद और गलत व्यवहार बढ़ता है। इससे बच्चे को लगता है- अगर मैं रोता हूं और ज़िद करूंगा तो मम्मी दे ही देगी।

5. कोशिश करें कि किसी नई या पौष्टिक खाने में उनकी पसंदीदा चीज को भी मिलाकर बनाएं। जैसे फूलगोभी की जगह मसालेवाली ब्रोकली बनाएं।

6. बच्चों के सामने खाने के विकल्प रखें। उन्हें दो-तीन चीजें खाने के लिए पूछें। और अगर वे इसे खा लेते हैं, तो अगले भोजन के समय में इनाम के रूप में उनका पसंदीदा खाना बनाएं। इस तरह वे केवल अपनी ही पसंद का खाना न खाकर आपके हिसाब से भी सेहतमंद चीजें खाएंगे।

7. अपने बच्चे को ऐसी कोई भी चीज न खिलाएं जिसे आप खुद नहीं खाते हैं। यदि आपके पति इसे खाते हैं तो अपने बच्चे को पापा के उदाहरण का पालन करने के लिए कहें। अपने न खाने का भी कारण बताएं। इस तरह बच्चा खुद को अलग-थलग और बुद्धू बन जाना महसूस नहीं करता है और न ही उसे यह लगता है कि मम्मी या डैडी तो खुद नहीं खाते मगर उसे खाने के लिए कहते हैं।

8. बच्चे को अपने साथ सब्जी खरीदने ले जाएं। फिर सब्जी को छीलने-काटने के काम में भी लगाइए और पकाते समय भी उसे अपने साथ रखिए। इस तरह बच्चा करके और देखकर सीखता है। आप खाना पकाते समय आप बच्चे को भी भोजन चखने को दें और उससे पूछें कि सही बना है कि नहीं, कोई कमी तो नहीं है? बच्चे बड़ों की नकल करके कहीं ज्यादा अच्छी तरह सीखते हैं।



हर किसी का अपना-अपना स्वाद होता है। हो सकता है जो आपको पसंद है वो आपके बच्चे को नहीं। हो सकता है उसकी खाने की पसंद और आदतें उसके पापा से या आपके ससुराल वालों से मिलती हों। अगर ऐसा हो तो बच्चे को उनके अनुसार ही खाने को दें। बीच-बीच में उसे बहला-फुसला कर पौष्टिक चीजें और अपनी पसंद की चीजें भी खाने को देती रहें। इस तरह धीरे-धीरे उसके खाने के स्वाद का विस्तार होगा। बचपन में सिखाना ज्यादा आसान रहता है।

 

 

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