प्यार की निशानी ताज़ महल में बनेगा मां के लिए ‘बेबी फ़ीडिंग रूम’

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प्यार की निशानी ताज़ महल में बनेगा मां के लिए ‘बेबी फ़ीडिंग रूम’

एक मां जब अपने दुधमुंहे बच्चे को लेकर बाहर निकलती है तो उसकी पहली चिंता यही होती है कि रास्ते में वह अपने बच्चे को स्तनपान कैसे कराएगी? सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं को कई बार असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है। इसीलिए डिलीवरी के बाद ज्यादातर महिलाएं कहीं घूमने-फिरने को निकल नहीं पाती है।


महिलाओं की इसी परेशानी के मद्देनज़र आगरा के ताजमहल के परिसर में स्तनपान कराने के लिए जल्द ही बेबी फीडिंग रूम बनाया जाएगा। पहली बार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी वर्ल्ड हेरिटेज स्मारकों में महिलाओं को अपने दुधमुंहे बच्चों को स्तनपान कराने के लिए ‘बेबी फीडिंग रूम’ की सुविधा उपलब्ध हो जाएगी। इस मामले में पहल करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकार ने एक दिन उन्होंने सीढ़ियों के नीचे छुपकर स्तनपान कराती एक मां को देखकर यह विचार आया। तब उनकी पहल पर एएसआई आगरा सर्किल ने दिल्ली मुख्यालय को तीनों वर्ल्ड हेरिटेज स्मारकों में बेबी फीडिंग रूम खोलने का प्रस्ताव भेजा था, जिसे पास कर जल्दी शुरूआत करने को कहा गया है।


अधिकारी वसंत कुमार स्वर्णकार का मानना है कि स्तनपान कराना हर मां का हक है और सार्वजनिक स्थानों पर उनके लिए उचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि ताजमहल में बड़ी संख्या में अंतर्राष्ट्रीय महिला पर्यटक भी आती हैं, जिनसे मिले फीडबैक और स्थिति को देखकर आगरा सर्किल के एएसआई अधिकारियों ने यह प्रस्ताव तैयार किया। ताज में रॉयल गेट पर पश्चिमी हिस्से में एन्क्लोजर बनाकर बेबी फीडिंग रूम बनाया जाएगा। देश में ताजमहल पहला ऐसा स्मारक होगा, जहां फीडिंग रूम की सुविधा होगी। फीडिंग रूम में कुर्सी, मेज, पंखा और लाइट के साथ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं होंगी। इसी तरह आगरा किले में दीवान-ए-आम से पहले प्रवेश द्वार पर ही दाईं ओर एक सेल खाली है, वहां यह रूम बनाया जाएगा। फतेहपुर सीकरी में पंचमहल और जोधाबाई के महल के बीच जगह की तलाश जारी है।


बहरहाल बेबी फीडिंग रूम खोलने का प्रस्ताव तो पास हो चुका है, अब उम्मीद की जाती है कि यह काम जल्द ही हो जाए। सिर्फ आगरे में ही देश के सभी स्मारकों, पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक स्थानों पर फीडिंग रूम तो खोले जाएं साथ ही महिलाओं की अन्य बुनियादी जरूरतों का भी ध्यान रखा जाए। कई मॉल, शॉपिंग सेंटर, सिनेमा हॉल और होटलों ने अपने यहां फीडिंग रूम खोले हैं पर ये नाकाफ़ी हैं। पिछले साल ब्रेस्टफीडिंग से एक मामला कोलकाता के एक मॉल में सामने आया था। मॉल में बच्चे को स्तनपान करा रही महिला को टॉयलेट में जाकर स्तनपान कराने को कहा गया। इसके खिलाफ उस महिला ने शिकायत भी की मगर कोई सुनवाई नहीं हुई तो उस महिला ने मॉल के सामने धरना दिया।
इसीलिए अब सरकार को अपने स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। आखिर स्तनपान कराना महिला का हक है और बच्चे की जरूरत भी।

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