क्या आप #EqualParent हैं?

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क्या आप #EqualParent हैं?

आज का युवा पिता एक ऐसा जीवनसाथी है जो समानता पर विश्वास करता है और उसे निभाता भी है। वह अपनी पत्नी की आकांक्षाओं, जरूरतों को भी महत्व देता है। वह वास्तव में पितृत्व को समझता और यह भी जानता है कि एक पिता के रूप मे यह उसकी भी साझा जिम्मेदारी है जितना कि मां की होती है। आइए, इस ‘फादर्स डे’ पर हम उन्हें और जानें…

देश का सबसे बड़ा पैरेंटिंग ऐप है- बेबीचक्रा


बेबीचक्रा पर हर महीने लगभग 2 मिलियन माता-पिता अपने अनुभव साझा करते हैं, ऐप पर मौजूद माता-पिता एक-दूसरे की समस्याएं भी सुलझाते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं। यहां पर मांओं ने अपना समुदाय बनाया हुआ है जिसमें वे सभी एक आपसी रिश्ते में जुड़ी हुई हैं। जहां गर्भवती, नई-नई मांएं और बढ़ते बच्चों की मांएं बच्चों की परवरिश से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार और अनुभव साझा करती हैं। बेबीचक्रा इन मांओं के सामने देश भर की पालन-पोषण की विभिन्न संस्कृतियों की दुनिया खोलता है! बेबीचक्रा ने देश के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, संस्कृतियों, पालन-पोषण के तरीकों पर चर्चा करने के लिए एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है। मां समुदायों में मां और बच्चे के रिश्तों पर चर्चाओं के दौरान हमें एक उभरते हुए ट्रेंड का पता चला है।

यंग इंडिया का नया ट्रेंड- इक्वल पैरेंट


हमने अपने ऐप पर होने वाले पापा को अपनी गर्भवती पत्नी के लिए परवाह करते देखा है। वे भी अपनी पत्नी की गर्भावस्था से जुड़ी परेशानियों का हल ढूंढते देखा है। नए पापा को अपने बेबी के लिए स्तनपान के नए विकल्पों की तलाश करते या फिर अपने बढ़ते बच्चे के लिए नई-नई रेसिपी, अपने बच्चे के लिए विकासात्मक गतिविधियों की जानकारी के लिए पूछते देखा है। एक और मजेदार चीज भी देखने में आई कि कुछ पिता सोते समय बच्चे को कहानी सुनाने के लिए किसी स्टोरी बुक के बारे में भी पूछते हैं। इससे यह पता चलता है कि आज के पिता क्या कर रहे हैं और वे क्या चाहते हैं। अब वह अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल और अपने बच्चे की परवरिश में अपनी समान भागीदारी को समझने लगा है। वह जानता है कि नौकरी के लिए उसकी पत्नी को घर से बाहर रहना पड़ता है। अब वह पत्नी की गैरहाजिरी में अपने बच्चे का ध्यान भी रखता है और जन्मदिन की पार्टियों में बच्चे को लेकर जाता है। इस पर हमें एक विचार आया कि देश में कितने #EqualParent हैं? कैसे वे साथ मिलकर इक्वल पैरेंट की भूमिका को निभाएं?



इससे भी महत्वपूर्ण बात यह समझना है कि इक्वल पैरेंट की चुनौतियां क्या हैं? और यह भी कि हम एक ऐसे सामाजिक परिवेश का निर्माण करें जहां एक पिता को #EqualParent की जिम्मेदारी निभाने पर कोई उसकी हंसी न उड़ाए।


2019 में, बेबीचक्रा ने इन सवालों के जवाब देने के लिए अपने समुदाय में गहराई से झांका है। यहां हमने पाया कि-


इक्वल पैरेंट की चुनौतियां


पिता के लिए केवल काम और खेल नहीं! :


हमारे समाज में माना जाता है कि घर की जरूरतों को पूरा करना, परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना पिता का फर्ज़ होता है। आज महिला सशक्तिकरण के दौर में शिक्षित होने के नाते एक मां भी इक्वल पैरेंट की भूमिका अपनी मर्जी से निभाने के लिए आगे आती है। हम जानना चाहते थे कि- क्या डैड भी अपने बच्चे के साथ उसके स्कूल कार्यक्रम और समारोहों में शामिल होने के लिए अपने ऑफिस के समय में बदलाव करते हैं? बच्चे के बीमार होने पर क्या वे छुट्टी लेते हैं? यह सही मायनों में अपनी पत्नी के जीवनसाथी बनने की शुरुआत है।

 



डायपर बदलना नेरा काम नहीं!:


आपने कितने पिताओं को नाक सिकोड़े हुए खुशी से गीली नैपी और पॉटी वाली डायपर बदलते देखा है? मॉल में अपने बेटे को पुरुष वॉशरूम में ले जाते हुए कितनी बार देखा है? क्यों हमेशा मां ही बच्चे को सूसू-पॉटी करवाती है? इसलिए हमने बेबीचक्रा ऐप पर शामिल पिताओं की जांच की कि वे क्या करते हैं!


मैं पापा हूं, कोई बेबीसिटर नहीं:


हम ऑफ़लाइन जाकर पिताओं पर नज़र रखी! यह एक तरह का रहस्योद्घाटन था! शादियों, पार्टियों में पापा अपने छोटे बच्चों को खाना खिलाते हैं, जबकि मां रिश्तेदारों और सहेलियों में मशगूल दिखी। मां के काम के सिलसिले में शहर से बाहर होने पर पापा बच्चों को सप्ताहांत में बाहर खाने के लिए जाते हैं, बच्चे के साथ खेलते हैं। लेकिन जब हमने उनसे बात की, तो हमें थोड़ा दुख हुआ। इन पिताओं को शिकायत थी कि बच्चे की इस तरह देखभाल करने के कारण कुछ उन पर बेबीसिटर होने को तंज कसते हैं। क्या लोगों को इस बारे में अपना नज़रिया बदलने की जरूरत नहीं है?

 

 


बेहतर भविष्य की आशा के लिए बदलाव !:


परंपरागत पिता मुख्य रूप से सक्रिय भूमिकाओं से दूर रहे हैं क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि उनकी जीवन शैली और दिनचर्या बदल जाए। हालाँकि, हमने जो पाया वह दिल को छू लेने वाला था। आर का पिता पूरी तत्परता के साथ अपने पितृत्व को निभा रहे हैं, बल्कि खुद को जागरूक माता-पिता भी बना रहे हैं। यह अगली पीढ़ी को मिलने वाली परवरिश का संकेत है और वह दुनिया है जिसे हम भविष्य के लिए बना रहे हैं।

 

 


ऊपर की बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि हम एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहां पिता खुशी-खुशी अपने पिता होने की भूमिका स्वीकार करे। जहां पिता चुनाव कर सकें #EqualParent होने का! नीचे दिए गए बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए एक अच्छा पिता बना जा सकता है और दूसरे पिताओं को प्रेरित किया जा सकता है:

 

  • पितृत्व अवकाश नीति
  • लचीली कार्य नीति
  • भूमिका निभाने के लिए तैयार
  • कार्यस्थल और घर पर खुली बातचीत के माध्यम से रूढ़िवादी बाधाओं को तोड़ना
  • डिजिटल पैरेंटिंग ऐप्स
  • पैरेंटिंग फोरम और प्रभावी संप्रेषण
  • स्कूलों द्वारा माता-पिता की भागीदारी पर जोर



उपरोक्त कारकों ने निश्चित रूप से पैरेंटिंग में शामिल पिता के आंकड़ों को बढ़ाने में मदद की है। समाज से एक सुसंगत समर्थन, इस बारे में जागरूकता और अवधारणा में ईमानदारी से विश्वास की अभी भी बड़ी कमी है। हालांकि, यह धारणा धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है और हम एक ऐसी पीढ़ी के निर्माण के लिए तैयार हैं जो पालन-पोषण के दृष्टिकोण को बदल देगी और अभिभावक भूमिकाओं के मानदंड को फिर से परिभाषित करेगी। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पिता बच्चों के लिए समान रोल मॉडल हैं। पिता अपने बच्चे के लिए एक सकारात्मक उदाहरण स्थापित कर रहा है जो इसे आनेवाली पीढ़ियों में आगे बढ़ाएगा!


इस रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े समुदाय और सामग्री संलग्नक के एक इन-ऐप के शोध से लिए गए हैं।

 

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