ऐसा चंद्र ग्रहण 149 साल बाद आ रहा है, जानें क्यों है दुर्लभ योग

इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण मंगलवार 16 जुलाई की रात 1 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगा और 17 जुलाई की सुबह 4 बजकर 30 मिनट पर ग्रहण का मोक्ष यानि समापन होगा। ग्रहण का पर्वकाल 2 घंटा 58 मिनट का रहेगा। इस साल चंद्र ग्रहण और गुरु पूर्णिमा दोनों एक ही दिन पर पड़ने के कारण विशेष योग बन रहा है जो 149 सालों बाद आया है। ज्योतिषियों के अनुसार 12 जुलाई 1870 में गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण साथ- साथ पड़े थे उस समय शनि, चंद्र-केतु के साथ धनु राशि में थे। यह खंडग्रास चंद्रग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण पूरे भारत के अलावा दुनिया भर में एशिया, यूरोप, ऑस्‍ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका के अधिकतर हिस्‍सों में दिखाई देगा।

 

क्यों होता है चंद्र ग्रहण?

  • चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। इसमें सूर्य और चंद्रमा के बीच में पृथ्वी आ जाती है और चंद्र से आने वाला प्रकाश दिखाई नहीं देता है।
  • चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले यानी मंगलवार की शाम को 4:30 बजे लग जाएगा। सूतक का मतलब है- खराब समय। प्रकृति ग्रहण से होने वाले विकिरण के कारण संवेदनशील हो जाती है। इस समय दैनिक कार्य नहीं करने चाहिए।

 

चंद्र ग्रहण में मंदिरों के कपाट बंद

  • ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
  • इस बार गुरु पूर्णिमा होने के कारम दोपहर को ही गुरु पूर्णिमा की विशेष पूजा-अर्चना कर के केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के मंदिरों के साथ-साथ सभी मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
  • 17 जुलाई की सुबह मंदिरों की साफ-सफाई और जलाभिषेक के बाद मंदिर दर्शानार्थियों के खोल दिए जाएंगे।

 

चंद्र ग्रहण की धार्मिक कथा


कहते हैं कि समुद्रमंथन से निकले अमृत को पीने के लिए राहु नामक राक्षस धोखे से देवताओं की पंक्ति में आकर बैठ गया था। ये बात सूर्य और चंद्र ने भगवान विष्णु को बता दी। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से राहु का गला काटकर वध करना चाहा मगर अमृत पीने के कारण वह अमर हो चुका था। इस कारण गला कटने पर भी वह मरा नहीं। उसके शरीर के दो हिस्से हो गए। उसके सिर को राहु और धड़ को केतु कहते हैं। सूर्य और चंद्र को अपना शत्रु मानने के कारण केतु सूर्य को और राहु चंद्र को ग्रसता है मगर उसका शरीर कटा हुआ होने को कारण सूर्य और चंद्र थोड़े समय बाद बाहर निकल आते हैं। इसी को ग्रहण कहते हैं।


धार्मिक मान्यता के अनुसार क्या न करें

  • भारतीय शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान विकिरण से वातावरण पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है इसलिए इस समय भोजन, जल, स्नान, शौच आदि नहीं करना चाहिए।
  • इस समय यात्रा नहीं करनी चाहिए। घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए।
  • शरीर पर तेल आदि नहीं लगाना चाहिए।
  • इस समय गर्भवती महिलाओं को घर पर ही आराम करना चाहिए। उन्हें किसी धारदार चीजों के साथ काम नहीं करना चाहिए।
  • ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाना चाहिए। इस दौरान यदि गर्भ ठहर गया तो संतान शारीरिक या मानसिक रूप से किसी कमी की शिकार हो सकती है।
  • ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं किया जाता है।


धार्मिक मान्यता के अनुसार क्या करें

  • ग्रहण लगने से पहले ही सारे काम निपटा लें।
  • घर में रखे अनाज में तुलसी की पत्तियां डालकर उसे अच्छी तरह ढंक दें।
  • घर में रखे हुए पानी में कुशा डाल देनी चाहिए, इससे पानी दूषित नहीं होता है।
  • ग्रहण के दौरान अति आवश्यक होने पर कच्चे फल-सब्चियां खाई जा सकती हैं। इन पर जल्दी से कोई हानिकारक रासायनिक क्रिया नहीं होती है।
  • ग्रहण के समय भजन-कीर्तन, मंत्र जाप आदि करना चाहिए।


ग्रहण के बाद क्या करें

  • ग्रहण का मोक्ष हो जाने पर चंद्र के शुद्ध बिंब का दर्शन करना चाहिए।
  • स्नान करके मंदिर की सफाई करनी चाहिए। मूर्तियों का जलाभिषेक कर पूजा-आरती करें।
  • घर में गंगा जल छिड़क दें।
  • इस दौरान श्रद्धालु पवित्र नदियों और तीर्थों में स्नान और पूजा करते हैं।
  • ग्रहण के बाद पुरोहित को दान आदि भी दिया जाता है।
  • गरीबों को भी अनाज और वस्त्र आदि का दान दिया जाता है।


नोट: इस लेख में प्रचलित मान्यताओं के आधार पर जानकारी दी गई है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए अपने ज्योतिषी या पुरोहित से सलाह लेनी चाहिए।


इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण


यह इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण है। पहला चंद्र ग्रहण 21 जनवरी को पड़ा था। उसे सुपर ब्लड वुल्फ मून का नाम दिया गया था। ग्रहण के दौरान इस दिन चांद लाल रंग के साथ तांबे के रंग जैसा गहरा नजर आया था।
साल 2019 का आखिरी ग्रहण और तीसरा सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को होगा। यह वलयकार सूर्य ग्रहण होगा जिसे भारत में देखा जा सकेगा।

 

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