ट्रेन में फंसी 9 गर्भवती महिलाओं के लिए कयामत की रात थी 26 जुलाई!

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ट्रेन में फंसी 9 गर्भवती महिलाओं के लिए कयामत की रात थी 26 जुलाई!

बीती 26 जुलाई को आसमान फिर कहर बरसा रहा था और वही 26 जुलाई 2005 के सैलाब वाले इतिहास दोहराने को बेकाबू था। मगर प्रशासन समय रहते ही चाक-चौबंद हो गया। महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसी 9 गर्भवती महिलाओं के साथ 1050 यात्रियों को एनडीआरएफ की टीम ने बड़ी कुशलता से बचा लिया।


26 जुलाई को महाराष्ट्र में सुबह से ही झमाझम बरसात शुरू हो गई थी। दोपहर बीतते-बीतते बरसात ने विकराल रूप ले लिया। लोगों ने जल्दी घर पहुंचने में ही अपना भलाई समझी। मगर जो बाहर रह गए वे बड़ी मुश्किलों से अपने घर लौट पाए। ऐसे ही महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे यात्रियों के लिए 26 जुलाई की रात किसी कयामत से कम नहीं थी। इसके यात्री ताउम्र ये खौफ़नाक मंज़र नहीं भूल पाएंगे।

 

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कोल्हापुर जाने वाली महालक्ष्मी एक्सप्रेस 26 जुलाई की रात को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से रवाना हुई मगर आगे जाते-जाते 70 किलोमीटर जाकर कल्याण स्टेशन से जब आगे बढ़ी तो बदलापुर और वांगनी स्टेशनों के बीच जाकर फंस गई। रात तो मदद के इंतजार में जैसे-तैसे कट गई। सुबह पता होते ही मुंबई से दिल्ली तक सारा सरकारी अमला हरकत में आ गया। यात्रियों को रात में ही खाने-पीने की सामग्री पहुंचा दी गई। धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता जा रहा था। फिर भी इन यात्रियों की मदद के लिए स्थानीय रेलवे विभाग तैनात रहा।

 

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सुबह होते ही यात्रियों की मदद की गुहार सभी जगह ट्रेंड करने लगी। इसी में सबसे बड़ी चिंता की बात निकली कि महालक्ष्मी एक्सप्रेस के डी-1 कोच में एक गर्भवती महिला रेशमा कांबले इस तनाव को झेल नहीं पाई और उसे लेबर पेन शुरू हो गया। इस महिला की करूण पुकार पर जैसे सारा मुंबई द्रवित हो गया। सात महीने की गर्भवती यह महिला डिलीवरी के लिए कोल्हापुर जा रही थी। फिर पता चला कि रेशमा के अलावा कुल 9 गर्भवती महिलाएं उस ट्रेन में मौजूद थीं। इन सबके लिए लोगों की चिंता बढ़ती जा रही थी।

 

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आकिरकार इस घटना पर प्रधानमंत्री कार्यालय हरकत में आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की देखरेख में यह पूरा ऑपरेशन अंजाम दिया गया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने कमान संभाली और एनडीआरएफ के साथ नेवी, इंडियन एअरफोर्स को फंसे यात्रियों को बचाने में तैनात कर दिया। रेलवे ट्रैक पर 3 से 5 फुट पानी भर गया था और ट्रेन के अंदर भी पानी भरने लगा था जिससे यात्रियों में डर बढ़ गया था। करीब 11 घंटे चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में सभी यात्रियों को बचा लिया गया। नेवी ने नावों के जरिए सबसे पहले गर्भवती महिलाओं को सकुशल बाहर निकाला उसके बाद बच्चों फिर बुजुर्गों को। फिर धीरे-धीरे सारे यात्रियों को सफलता पूर्वक निकाल लिया गया।

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गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित निकल आने पर सबने राहत की सांस ली। रेशमा कांबले के बारे में पूछने पर सेंट्रल रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ए. के. जैन ने बताया कि रेशमा कांबले को तुरंत ही बदलापुर के एक अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था। समय पर चिकित्सा मिलने पर एक अप्रिय घटना टल गई।

 

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महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों के लिए सबकी दुआएं काम आईं और अगले दिन वे सकुशल अपने गंतव्य को रवाना हो गए। सबकी तरह बेबीचक्रा की चिंता भी गर्भवती औरतों के लिए थी। उन सभी को बेबीचक्रा की ओर से शुभकामनाएं!

 

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