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लद्दाख समेत जम्मू-कश्मीर में नई सुबह का आगाज़

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लद्दाख समेत जम्मू-कश्मीर में नई सुबह का आगाज़

अगस्त महीने में फिर देश में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है। 6 अगस्त की सुबह 130 करोड़ देशवासियों की बरसों की इच्छा पूरी हुई- जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करके अखंड भारत में विलय। 6 अगस्त की सुबह लद्दाख के लिए नई सुबह थी क्योंकि लद्दाख की जनता बरसों से अपने लिए जम्मू-कश्मीर से अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रही थी। लद्दाख अखंड भारत का हिस्सा बनना चाहता था, वह विकास चाहता था जोकि जम्मू-कश्मीर के कारण लद्दाख मुख्य धारा में शामिल नहीं हो पाता था। लद्दाख की राह में सबसे बड़ा रोड़ा था जम्मू-कश्मीर की धारा 370 और 35ए। लद्दाख इससे बाहर निकलने के लिए कबसे संघर्ष कर रहा था।

 

5 अगस्त सोमवार को राज्य के अधिकतर जिलों में धारा 144 लगा दी गई। सभी स्कूल-कॉलेज और शिक्षण संस्थान बंद रखने के आदेश दे दिए गए। इसी के साथ राज्यसभा में हंगामे के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ऐलान कर दिया गया। अनुच्छेद 370 के कई खंड लागू नहीं होंगे। सिर्फ खंड एक बचा रहेगा। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा खत्म हो गया। जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया गया। लद्दाख को बिना विधानसभा केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है।

 

7 अगस्त, बुधवार की सुबह जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए नई सुबह का पैगाम लेकर आई।
राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बन गए। अब दोनों ही प्रदेशों में एक संविधान, एक निशान और एक प्रधान का सपना सच हो गया। अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश से अलग करने वाले काले कानून का अंत हो गया। इस बात का जश्न पूरे देश में मनाया गया।

 

राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित राज्य बन गए। एकीकृत जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के राज्यपाल सत्यपाल मलिक का पद भी उपराज्यपाल में बदल गया। उनकी सलाहकार परिषद भी समाप्त हो गई। राज्य का ध्वज भी नहीं रहेगा और राज्य का संविधान भी प्रभावी नहीं होगा। यह दोनों अब इतिहास का हिस्सा बन गए हैं। इससे जम्मू-कश्मीर की सियासत का रंग भी बदल गया है। अलगाववादी नेताओं के हाथ की कठपुतली बना जम्मू-कश्मीर अब देश की राजनीति की मुख्य धारा में शामिल हो गया है। यह देश के इतिहास में तीन तलाक बिल के बाद एक और ऐतिहासिक फैसला है जिसका जनता ने दिल खोलकर स्वागत किया है।

 

नई व्यवस्था के अनुसार संसद के दोनों सदनों ने राज्य को अलग संविधान और अलग निशान प्रदान करने वाले राष्ट्रीय संविधान के सभी प्रावधानों को समाप्त करने पर मुहर लगा दी है। लद्दाख को अलग केंद्र शासित राज्य और जम्मू व कश्मीर प्रांत को एक साथ रखते हुए इसे भी केंद्र शासित राज्य बनाया गया है। संसद के दोनों सदनों की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव अब अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजे गए हैं और उनके हस्ताक्षरों के बाद यह प्रस्ताव लागू हो जाएंगे।



अब लद्दाख का जम्मू कश्मीर से संवैधानिक, प्रशासनिक रूप से अलग हो गया। यह एक अलग केंद्र शासित राज्य के रूप में भारत के नक्शे पर उभरेगा। लद्दाख के लिए एक अलग उपराज्यपाल होगा। केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में भी उपराज्यपाल होगा। जम्मू कश्मीर का लाल रंग का एक हल, धान की फलियां और तीन डंडे वाला झंडे को नागरिक सचिवालय समेत सभी संवैधानिक संस्थानों से उतार लिया गया है। अब वहां तिरंगा शान से फहरा रहा है। अगला आदेश आने तक मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक फिलहाल राज्य में बने रहेंगे, लेकिन राज्यपाल का पद उपराज्यपाल में बदल जाएगा। उनके पास जम्मू कश्मीर के अलावा केंद्र शासित लद्दाख के उप राज्यपाल की जिम्मेदारी भी अगले आदेश तक बनी रहेगी।



आखिरकार अब कश्मीर से कन्याकुमारी तक अखंड भारत का सपना पूरा हुआ। अगस्त महीने में ही देश को आज़ादी मिली थी और वह अगस्त महीना ही था जब गांधी जी ने 9 अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो क्रांति का बिगुल बजाया था। अपना देश भी 15 अगस्त 1947 को आज़ाद हुआ था। और 6 अगस्त 2019 में धारा 370 और 35ए हटाकर जम्मू-कश्मीर को भी अखंड भारत में शामिल कर दिया गया। इसलिए इस बार का अगस्त महीना भी खास है और इस साल आज़ादी का जश्न भी खास होगा।

 

बैनर छवि: livelaw

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