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इतना आसां नहीं है बच्चे के जन्म के बाद नौकरी पर जाना

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इतना आसां नहीं है बच्चे के जन्म के बाद नौकरी पर जाना

हिना जब मां बनी तो वह बहुत खुश थी। बच्चे का मुंह देखते ही वह गर्भावस्था की सारी तकलीफें भूल गई। जब से उसकी गोद में नन्ही परी आई है सबकुछ भूल कर बस उसे ही निहारती रहती है। परी, हां हिना और उसके पति साहिल ने बड़े लाड़ से अपनी संतान का नाम परी ही रखा। जब से परी उनकी गोद में आई है, हिना और साहिल की मानो दुनिया ही बदल गई है। दोनों अपनी नन्ही परी का पूरा ध्यान रखते हैं। साहिल भी पत्नी और बेटी का अच्धी तरह ध्यान रखता है। डिलीवरी के समय 3 महीने तक हिना अपनी अपने मायके गई थी। मायके से आने के बाद साहिल के मम्मी-पापा जमशेदपुर से आ गए थे। सास-ससुर के आने के बाद हिना को भी काफी मदद मिल गई थी। वक्त बीतता जा रहा था। अगले महीने हिना की मैटरनिटी लीव खत्म होने वाली थी। बेबी को छोड़कर उसे ऑफिस जाने का समय आने वाला था। सास ने हिना को समझाया कि बच्ची को छोड़ कर काम पर वापस जाने की उसे अभी से तैयारी करनी चाहिए। हिना ने भी अपनी सास के अलावा अपनी मां, बहन और अपनी ननद से टिप्स लेने शुरू कर दिए। कुछ दिनों की मेहनत के बाद हिना ने उन टिप्स पर काम करना शुरू कर दिया। आप भी इनकी मदद ले सकती हैं।

 

डिलीवरी के बाद जब आप काम पर लौटने की योजना बना रही हैं तो आपको महीना पहले ही तैयारी करनी शुरू कर देनी चाहिए। सबसे पहले आप अपने घर, अपने कमरे को व्यवस्थित कर लें। ऑफिस जाने पर अपना डेली रूटीन बना लें और उसके अनुसार काम करना शुरू कर दें। इस समय महिलाओं का वजन बढ़ जाता है इसलिए अपनी पुरानी पोशाकों को अल्टर करवा लें। अपनी चप्पल, बैग आदि चीजें तैयार कर लें।

 

बच्चे को धीरे-धीरे अपना दूध छुड़वाना शुरू करें। अब बच्चे का भी वही रूटीन बनाएं जो आपको ऑफिस जाने के समय रहेगा। अपने डॉक्टर से इस बारे में सलाह करें और उसके निर्देशों का पालन करें। बच्चे को फॉर्मूला मिल्क या गाय के दूध में पानी मिलाकर देना शुरू करें। कुछ दिन बच्चे को दस्त-उल्टी हो सकते हैं। आप घर पर रहकर इसे संभाल सकती हैं। 10-15 दिन में बच्चे को आदत पड़ जाएगी। आपका आधा काम यहीं आसान हो जाएगा।

 

इसके बाद आता है बच्चे को मां के बिना रहने की आदत डालना। आप बच्चे को घरवालों के साथ कुछ समय अकेला छोड़ें। धीरे-धीरे समय बढ़ाती जाएं। जब वह खेल रहा हो, सो जाए या जगा हो उसके सामने न जाएं। जब वह रोए तो भी उसे थोड़ी देर अकेला ही रहने दें जिससे वह अपने आप चुप रहना सीख जाए।

 

अगर आपके लिए सुविधाजनक हो तो आप दिनभर के लिए बच्चे के लिए एक बाई रख लें। आपको उस बाई के साथ बच्चे को रहने की आदत डालनी चाहिए। अगर आप बच्चे को बेबी सिटिंग में छोड़ने वाली हैं तो बच्चे को अभी से वहां कुछ घंटों के लिए छोड़ना शुरू करें। धीरे-धीरे समय बढ़ाती जाएं। 10 पहले से उसे 6-7 घंटे केलिए भी छोड़ा जा सकता है।

 

बच्चे को घर से बाहर ले जाएं। पड़ोसियों और दूसरे बच्चों से भी पहचान कराएं। इस तरह बच्चा बेबी सिटिंग  में दूसरे बच्चों और उनके मां-बाप को देखकर अमजाना पन नहीं महसूस करेगा। पार्क ले जाएं, बच्चों के साथ खेलने की आदत डालें।

 

अगर आपको अभी भी पर्याप्त दूध आ रहा है तो आप एक्सप्रेस्ड ब्रेस्ट मिल्क का विकल्प चुन सकती हैं। आप पंप करके स्तनदूध निकाल कर उसे फ्रिज में जमा कर दें और बेबी सीटर को पहले से ही उसके इस्तेमाल का तरीका बता सकती हैं।

 

बच्चा अगर 6 महीने का हो गया है तो आप उसे दूध के साथ-साथ पूरक आहार देना भी शुरू कर सकती हैं। आपको पहले ही बच्चे को पूरक आहार खाने की आदत डाल देनी चाहिए। बच्चे का नाश्ता, लंच, शाम का नाश्ता, दूध आदि की लिस्ट और साइम टेबल बना कर उसे फॉलो करना शुरू कर दें। अपनी बेबी सीटर या बाई को भी सिखा दें।

 

अब आपको बच्चे सोने-जगने, खेलने, सूसू-पॉटी का भी रूटीन बनाना होगा। बच्चे को सूसू-पॉटी की ट्रेनिंग की शुरुआत करनी होगी। यह सारे काम बच्चा आपके बिना किसी और के साथ कर सके इसकी आदत भी डालनी होगी।

 

आपको बच्चे को उसकी मनपसंद चीजों को पहचान कर लिस्ट बनानी होगी जिसे आप बेबी सीटर के पास रख सकें ताकि मां की अनुपस्थिति में बच्चा उन चीजों के साथ खेलता रहे। आप उसके मनपसंद खिलौने, तकिया, ओढ़ने-बिछाने की चादर, मां का दुपट्टा आदि की पहचान कर लें।

 

ऑफिस जाने पर बच्चे की भूख के समय मां के स्तनों से दूध बहने लगता है। इसलिए मां को चेंजेबल पैडेड ब्रा पहननी चाहिए ताकि वह दूध से गीले पैड बदल सके। आपको ऑफिस में ऐसी ड्रेस पहननी चाहिए जिससे यदि आपके स्तन गीले हो जाएं तो ढके रहें। जैसे- साड़ी, दुपट्टा, जैकेट आदि।

 

ऑफिस में लगभग एक महीने का समय आप लचीला रखें कि आप थोड़ी देर से ऑफिस जाएं और जल्दी घर लौट आएं। बेबी सीटर भी आपके आने तक बच्चे के साथ रहे। पति भी बच्चे को बेबी सीटर के पास बच्चे को छोड़ने और ले आने के लिए समय निकाल सकें।

 

इसके अलावा जैसी जो जरूरत पड़े उसके अनुसार आप और आपके परिवार बच्चे के लिए तैयार रहें। इन बातों पर ध्यान देकर आप अपनी और बच्चे की मुश्किलों को आसान बना सकती हैं। आपका और बच्चे का समय एक-दूसरे के बिना आसानी से गुजरे।

 

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