गर्भावस्था में पोषण से जुड़े मिथक और यथार्थ

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गर्भावस्था में पोषण से जुड़े मिथक और यथार्थ

जैसे ही आपको पता चलता है कि आप माँ बनने वाली हैं आपका शरीर हार्मोनल परिवर्तन, भोजन की इच्छा/अनिच्छा और तरह-तरह के शारीरिक बदलावों से गुजरता है। गर्भावस्था के दौरान आपके शुभचिंतक अपनी राय देना शुरू कर देते हैं, 'ये करो और ये न करो'। गर्भावस्था में उचित पोषणयुक्त आहार लेने के लिए सबसे ज्यादा सलाह दी जाती है, इस समय 'क्या खाया जाए' और 'क्या नहीं'। इन सलाहों में कुछ तो मददगार साबित होते हैं पर कुछ मिथक होते हैं जो आपको भ्रम में डाल सकते हैं।

गर्भावस्था में पोषण से जुड़े ऐसे ही नौ मिथकों के बारे में आज बात करते हैं जिन्हें खारिज किया जाना चाहिए।

मिथक #१: गर्भ धारिणी को मछली तथा मछली के तेल से दूरी बनानी चाहिए।

यथार्थ: ये सत्य नहीं है। मछली तथा समुद्री जीवों जैसे ऑयस्टर स्वस्थ आहार के महत्वपूर्ण अंग है। मछली तथा समुद्री जीवो में उच्च प्रोटीन तथा जरूरी पोषण जैसे डीएचए और लो सैचुरेटेड फैट जैसे कि ओमेगा 3 फैटी एसिड्स पाए जाते हैं। हालांकि कुछ जलीय जीवो में मरकरी की उच्च मात्रा पाई जाती है जो कि अजन्मे बच्चे के तंत्रिका तंत्र के लिए नुकसानदायक होते हैं। इसलिए मछली तथा समुद्री जीवो का इस्तेमाल करते समय ध्यान रखना चाहिए कि उच्च मरकरी की मात्रा वाले किंग मैकेरेल की जगह जिन जलीय जीवो में मरकरी के निम्न मात्रा होती है जैसे कि टुना और सालमन इनका उपयोग किया जाए।

 

मिथक #2: स्वस्थ गर्भावस्था के लिए मांस का सेवन करें।

यथार्थ: ऐसे बहुत सारे शाकाहारी भोज्य पदार्थ है जिनमें पोषण तत्व होते हैं तथा यह स्वस्थ गर्भावस्था और बच्चे के लिए पर्याप्त है। दुग्ध उत्पाद, फोर्टीफाइड सेरेल्स और सप्लीमेंट जैसे कि मदर हॉर्लिक्स और प्रीनेटल विटामिंस शाकाहारी गर्भ धारिणी की प्रोटीन, विटामिन और मिनरल की आवश्यकताओं को पूरा करती है।

मिथक #3: पपीते का सेवन गर्भपात का कारण होता है।

यथार्थ: कच्चे पपीते में एंजाइम (काइमोपैपेन) पाया जाता है जोकि गर्भपात या समय पूर्व प्रसव का कारण बन सकता है। परंतु पका पपीता हानिकारक नहीं होता। पका पपीता विटामिन ए का मुख्य स्रोत होता है। अतः उचित मात्रा में यदि पके पपीते का सेवन किया जाए तो यह मां तथा बच्चे दोनों के लिए लाभकारी होता है।

 

मिथक #4:  मॉर्निंग सिकनेस का मतलब है कि मेरे बच्चे को उचित मात्रा में पोषण नहीं मिल रहा है।

यथार्थ: गर्भावस्था में शरीर तरह-तरह के हार्मोनल बदलावों से गुजरता है, जिसकी वजह से मॉर्निंग सिकनेस एक आम समस्या है। इस अवस्था में भोजन की गंध, भोजन के बारे में सोचना अथवा देखना ही परेशान कर देता है। जब तक डिहाइड्रेशन या वेट लॉस जैसे शारीरिक लक्षण ना हो तब तक डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार भोज्य सप्लीमेंट अवश्य लेते रहे।

मिथक #5: गर्भावस्था में कॉफी का उपयोग प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

यथार्थ: कम परिमाण में यदि कॉफी का सेवन किया जाए तो बच्चे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। परंतु एक दिन में तीन कप से ज्यादा कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए। अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन बच्चे की लो बर्थ वेट का कारण बन सकता है।

मिथक #6: सिर्फ विटामिन की कमी से जूझती औरतों के लिए ही प्रीनेटल विटामिन आवश्यक है।

यथार्थ: यह सत्य नहीं है। गर्भावस्था के लिए अपने शरीर को तैयार करना हो या गर्भावस्था के समय उचित पोषण तत्व की मात्रा को बढ़ाना हो इसके लिए उचित पोषण युक्त भोजन लेने के साथ ही प्रीनेटल विटामिंस की भी आवश्यकता होती है। स्वस्थ बच्चे के विकास के लिए जरूरी है कि विटामिन और मिनरल से युक्त भोजन लिया जाए। आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड का उच्च मात्रा में उपयोग स्वस्थ गर्भावस्था की कुंजी है।

मिथक #7: गर्भावस्था में अधिक गर्म तथा मसालेदार भोजन गर्भपात का कारण बनता है।

यथार्थ: उचित मात्रा में मसाला तथा गर्म भोजन होने वाले बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। परंतु गर्भावस्था में अधिक मात्रा में तैलीय तथा मसालेदार भोजन से सीने में जलन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

 

 

मिथक #8: गर्भावस्था में अचार तथा आइसक्रीम खाने की इच्छा होती है।

यथार्थ: गर्भावस्था में कभी-कभी किसी खास चीज को खाने की इच्छा बढ़ जाती है परंतु यह हमेशा सत्य नहीं होता तथा यह सब पर लागू भी नहीं होता है। दरअसल इस समय होने वाली मां के मन में अचार खाने की इच्छा शरीर में नमक की अतिरिक्त कमी को पूरा करने के लिए होता है। गर्भावस्था में अतिरिक्त मिनरल की आवश्यकता होती है। इसी तरह कुछ माताएं जंक फूड जैसे आइसक्रीम खाना पसंद करती है जो कि सिर्फ कंफर्ट के लिए होता है। मीठे भोज्य पदार्थों में चीनी की मात्रा होती है जो कि शरीर में सेरेटिन की मात्रा बढ़ाता है और यह पदार्थ होने वाली मां को अच्छा महसूस करवाता है।

मिथक #9: गर्भावस्था में अधिक खाना चाहिए क्योंकि आप 2 लोगों के लिए खाना खा रहे हैं।

यथार्थ: स्वस्थ बच्चे के सही विकास के लिए गर्भावस्था में आपको अधिक कैलोरी की आवश्यकता नहीं होती है। प्रथम ट्राइमेस्टर में शरीर को अधिक कैलोरी की आवश्यकता नहीं होती है। द्वितीय तथा तृतीय ट्राइमेस्टर में अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है।

 द्वितीय ट्राइमेस्टर में करीब 340 अधिक कैलोरी प्रतिदिन तथा तृतीय ट्राइमेस्टर में 500 अधिक कैलोरी प्रतिदिन की आवश्यकता होती है, जो कि स्वस्थ बच्चे और होने वाली मां के लिए पर्याप्त है। गर्भावस्था में जरूरत से ज्यादा ऐसा भोजन नहीं करना चाहिए जो कि उच्च पोषण तत्वों से युक्त ना हो। इसके परिणाम स्वरूप बच्चे का विकास सही प्रकार से नहीं होगा और जन्म के समय बच्चा लो वेट होगा।

अधिकतर औरतों के लिए गर्भावस्था एक प्रकार से आवश्यक पोषणयुक्त आहार की चेतावनी होती है। आपके आसपास के लोग तथा शुभचिंतक पोषण संबंधी तरह-तरह की सलाह देते रहते हैं परंतु आपको अपने डॉक्टर की सलाह के अनुसार चलना चाहिए। इससे आपकी गर्भावस्था स्वस्थ एवं खुशहाल बनी रहेगी।

अस्वीकरण: भोजन में पोषक तत्वों और उसकी खुराक लेने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

इस लेख में सभी विचार केवल लेखक के हैं और यह जानकारी के रूप में व्यक्त किए गए हैं।

 

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