क्या हैं गर्भावस्था से जुड़े अजीबो-गरीब मिथक और उनकी सच्चाई

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क्या हैं गर्भावस्था से जुड़े अजीबो-गरीब मिथक और उनकी सच्चाई

एक स्त्री के गर्भ धारण करते ही उसे बहुत-सी सलाहें और हिदायतें दी जाती हैं। उस पर कई पाबंदियां भी लगा कर होने वाली मां को डरा दिया जाता है। गर्भावस्था का दौर शुरू होते ही बहुत सी धारणाएं दिमाग में घूमने लग जाती हैं। ऐसे में बहुत सी बातें बेवजह ज़ेहन में मंडराने लगती हैं।

    

करीना कपूर खान ने अपनी गर्भावस्था के दौरान बड़े ही गर्व के साथ अपने बेबी बम्प के साथ रैंप वॉक की । साथ ही साथ ऐक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी अपने शरीर की फिटनेस पर गर्भावस्था के दौरान भी ध्यान दे पाईं। वो अपने व्यायाम (exercise) रूटीन पर ध्यान देने से खुद को नही रोक पाईं। कॉर्पोरेट जगत में महिलाएं अपनी गर्भावस्था के दौरान पुरुषों के साथ काम करती देखी जाती हैं, वो उन सभी समस्याओं को नजरअंदाज करती हैं , जिनसे वो इस दौरान गुजर रही होती हैं। खिलाड़ी सेरेना विलियम्स जैसी महिलाओं ने गर्भावस्था के दौरान विम्बलडन खेलते हुए बहुत हद तक तारीफ हासिल की है। अब वो बीते दिनों की बात हो गई जब यह माना जाता था कि 'एक गर्भवती महिला को ज्यादा भारी काम नहीं करना चाहिए या यूं कहें कि केवल आराम करना चाहिए।'

यकीन मानिए ऐसा कोई काम नही है जो आप गर्भावस्था के वक़्त नहीं कर सकतीं!

 

गर्भावस्था के समय केवल ये ही मूल मंत्र होना चाहिए- 'अपने डॉक्टर की सलाह और उनकी निगरानी में ही कोई कार्य करें।'

 

हां, ये भी तथ्य है कि गर्भावस्था के साथ जिम्मेदारी और सेहत के प्रति सजगता आती है। गर्भवती स्त्री के जीवन में पोषण और जीवनशैली में कुछ बदलाव आते हैं, फिर भी आपको अपना रोजाना की दिनचर्या जीना कभी नही छोड़ना चाहिए।

 

आइए, आज गर्भावस्था के दौरान जीवनशैली के प्रति कुछ मिथकों को खत्म करने की कोशिश करते हैं और आप सभी के सामने उन सभी तथ्यों को भी रखते हैं ताकि आप एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकें उस समय भी जब आपका बच्चा आपके गर्भ में पल रहा होता है!

 

मिथक # 1:: गर्भवती महिलाओं को मिठाई नहीं खानी चाहिए!

 

सत्य: महिलाओं को गर्भावस्था में मीठा खाने की इच्छा हो सकती है। मीठा खाना तब तक ठीक है जब तक आप उन अतिरिक्त कैलोरी को जलाने के लिए सही तरीके से एक्सरसाइज़ कर रही हैं और संतुलित आहार ले रही हैं। सही मूल मंत्र यही है कि खाना हमेशा कम मात्रा में थोड़े अंतराल में खाना चाहिए।

 

मिथक # 2:: अगर पहले एक्सरसाइज़ नहीं करती थीं तो गर्भावस्था में एक्सरसाइज़ नहीं करना चाहिए!

 

सत्य: ये गर्भावस्था में सबसे प्रचलित मिथक है। गर्भावस्था ही सबसे सही वक्त होता है जब आप एक्सरसाइज़ की शुरुआत कर सकती हैं भले ही आपने पहले कभी भी व्यायाम नहीं किया हो। आप धीरे-धीरे व्यायाम शुरू कर सकती हैं और फिर वो व्यायाम आप 30 मिनट् तक कर सकती हैं। आप एक हफ्ते में पांच दिन अपनी सहूलियत के अनुसार एक्सरसाइज़ कर सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान सैर करना, तैराकी करना और योगासन को आप धीरे-धीरे थोड़ी-थोड़ी अवधि में शुरू कर सकती हैं जितना कि आप आराम से कर पाएं।

 

मिथक # 3:: कंप्यूटर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए!

 

सत्य: बहुत-सी गर्भवती महिलाएं इस बात से चिंतित रहती हैं कि कंप्यूटर  मॉनिटर से निकलने वाली कम बिजली के चुंबकीय क्षेत्र (गैर-आयनीकरण) से होने वाले बच्चे को नुकसान हो सकता है या गर्भपात का कारण हो सकता है। यह सुन कर आपको ताज्जुब होगा कि किसी भी अध्ययन के अनुसार ऐसा कुछ सिद्ध नहीं हो सका है कि इससे कोई नुकसान हो सकता है। हाँ, ये सलाह जरूर दी जाती है कि बहुत लंबे समय तक आपको कंप्यूटर के सामने कुर्सी पर नहीं बैठना चाहिए।  आपको कुछ कुछ समय के अंतराल में उठ जाना चाहिए नहीं तो आपको कमर में दर्द हो सकता है।


मिथक # 4:: हमें गर्भावस्था के दौरान दो जनों की खुराक चाहिए!

 

सत्य: दो जनों की खुराक लेने से आपका वजन बहुत तेजी से बढ़ सकता है। बच्चे की सेहत और विकास के लिए आपको कुछ हद तक ही कैलोरीज़ चाहिए होती है। गर्भावस्था में जरूरत से ज्यादा वज़न का बढ़ना गर्भवती महिला के लिए और होने वाले बच्चे की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता है। हमेशा सही मात्रा में न्यूट्रीशन से भरपूर आहार लेने से और सप्लीमेंट्स के लेने से जैसे- मदर्स हॉर्लिक्स, जो 100% जरूरी पोषक तत्वों से बना होता है। यह एक स्वस्थ और सेहतमंद बच्चे के पैदा होने का भरोसा देता है।

 

मिथक # 5:: गर्भावस्था में हॉरर फिल्में नहीं देखनी चाहिए!

 

सत्य: हमारे धर्म में गर्भावस्था के दैरान हॉरर फिल्म देखना निषेध माना गया है। लेकिन ये भी सच है कि आजतक इस तथ्य को प्रमाणित नहीं किया जा सका है कि हॉरर फिल्म देखने से बच्चे पर इसका कोई गलत असर हुआ हो। लेकिन हां इसे देखने से ऐसी स्थिति जरूर पैदा हो सकती है जिसके कारण ब्लडप्रेशर कम या अधिक हो सकता है। वैसे तो तेज आवाजों से होने वाले बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है क्योंकि बच्चा गर्भ में तरल द्रव्य (एम्नियोटिक फ्लूइड) से घिरा हुआ होता है, जो बच्चे को ऊंची आवाज से नुकसान नहीं पहुंचने देता। इसका मूल मंत्र ये हुआ कि किसी भी चीज़ को न करना, कोई हल नहीं होता।

 

मिथक # 6:: गर्भावस्था में यात्रा नहीं करनी चाहिए!

 

सत्य: ये माना जाता है कि गर्भावस्था के शुरुआती वक़्त में गर्भवती महिला को ऐसे उबड़-खाबड़ रास्तों से सफर करने से मना किया जाता है। इम रास्तों पर धक्के- झटके आदि लगने से गर्भ में बच्चे को नुकसान हो सकता है। गर्भवती महिला को ऐसी यात्रा को नजरअंदाज करना चाहिए। एक गर्भवती महिला डिलीवरी के बाद के दिनों में आराम से सफर कर सकती है अगर गर्भावस्था में कोई शारीरिक परेशानी न रही हो या हो रही हो।

 

मिथक # 7:: गर्भवती महिला को मछली या मछली के तेल का सेवन नहीं करना चाहिए!

 

सत्य: अगर आप शाकाहारी नही हैं तो आपको ऐसी अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। ये बात बिल्कुल सच है कि गर्भवती महिलाओं के लिए मछली और शेलमछली बहुत ही लाभदायक मानी जाती है। मछली और शेलमछली में ऊंची किस्म के प्रोटीन और डीएचए जैसे अन्य जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, ये संतृप्त वसा ( saturated fats ) में कम होते हैं और इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं। हालांकि कुछ मछली और शेलमछली में पारा ( mercury ) के उच्च स्तर पाए जाते हैं जो राजा मैकेरल जैसे तंत्रिका-तंत्र को विकसित करने वाले अजन्मे बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। मदर्स हॉर्लिक्स एक बहुत ही महत्वपूर्ण सप्लीमेंट है जिसमें डीएचए और 25 महत्वपूर्ण पोषक तत्वों  का सम्मिश्रण पाया जाता है। यह उन गर्भवती महिलाओं के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक है जो मछली नहीं खाती हैं।

 

मिथक # 8::  गर्भावस्था में खेल नहीं खेलने चाहिए!

 

सत्य: ये सही नहीं है।अगर गर्भावस्था में कोई शारीरिक असुविधा या कोई शारीरिक परेशानी नहीं है तो शारीरिक रूप से चुस्त रहना और खेल खेलने को बढ़ावा देना चाहिए। इन सबसे माँ और होने वाले बच्चे को कई तरह से शारीरिक फायदे मिलते हैं। हालांकि गर्भवती महिला को खेल में इतना भी मशगुल नहीं हो जाना चाहिए कि गलती से गिर जाए या कोई झटका लग जाए। थोड़ा-थोड़ा और अपनी सहूलियत से खेलना और साथ ही इस बात का ध्यान जरूरी है कि गर्भवती महिला को और होने वाले बच्चे को किसी भी तरह का कोई नुकसान न पहुंचे।

 

मिथक # 9:: गर्भावस्था में शारीरिक संबंध बनाने से गर्भ में शिशु को नुकसान हो सकता है।

 

सत्य: गर्भ में शिशु एम्नीओटिक थैली में बहुत ही अच्छे ढंग से सुरक्षित रहता है। गर्भवती महिला का पति संभोग के समय शिशु तक पहुंचने में सक्षम नहीं होता जब तक गर्भाशय ग्रीवा ( cervix ) का मुँह बंद होता है। हालांकि एक गर्भवती महिला को विशेष रूप से अपनी डॉक्टर से गर्भावस्था के पहले और तीसरे चरण में संभोग के बारे में जो भी जिज्ञासा हो पूछ लेनी चाहिए।

 

गर्भावस्था अपने-आप में एक बेहद खूबसूरत यात्रा है। आपके बच्चे के इस दुनिया में आते ही आपकी जिंदगी एक बहुत ही बड़ी छलांग लेती है। आप अपनी गर्भावस्था के सफर को बहुत ही सर्वश्रेष्ठ बनाइए और इस पड़ाव को खुशनुमा तरीके से जीएं। अपने को इसमें बंधा हुआ, असहाय और पाबंदियों में जकड़ा हुआ न समझें। ऊपरवाले का शुक्रियादा कीजिये कि उसने आपको इतनी प्यारी नेमत बख्शी है!

 

सूचना: किसी तरह की दवाई, कोई भी न्यूट्रिएंट्स या कोई भी चीज़ लेने से पहले बेहतर होगा कि आप अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

 

इस लेख में व्यक्त सभी विचार और परामर्श पूर्ण रूप से लेखक के हैं और ये केवल एक शैक्षिक सहायता रूप में पेश किए गए हैं।

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