अभिभावक बनने से पहले इन 5 सलाह को अवश्य मानें

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अभिभावक बनने से पहले इन 5 सलाह को अवश्य मानें

गर्भधारण के साथ है बेहतर माता-पिता बनने के लिए आप अपनी तैयारी शुरू कर देते हैं परंतु सच तो यह है कि जब तक हम अनुभव नहीं करते तब तक हमारी तैयारी पूरी नहीं होती। गर्भधारण सिर्फ एक महिला में शारीरिक बदलाव नहीं लाता बल्कि यह अभिभावकों के जीवनशैली और मानसिक व्यवहार में भी परिवर्तन लाता है। माता-पिता बनना अपने आप में एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। होने वाले अभिभावकों की जीवनशैली, पोषण तथा संपूर्ण स्वास्थ्य में आमूलचूल बदलाव दिखने लगता है। लेकिन यह बदलाव सच में बहुत खूबसूरत है

होने वाले अभिभावकों को गर्भधारण के समय से ही क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इस बारे में सचेत हो जाना चाहिए। चलिए देखते हैं कि वे कौन से पांच महत्वपूर्ण बदलाव है जो आप के अभिभावक बनने के  सफर में सहायक है।

प्रसन्न माता-पिता के बच्चे भी प्रसन्नचित्त होते हैं

माता-पिता बनने का सुखद समाचार अपने साथ मिश्रित भावनाएं लेकर आता है, जहां डर और प्रसन्नता का सामान भाग होता है। गर्भधारण से लेकर बच्चे के जन्म तक का समय हंसी खुशी रहना चाहिए। तनाव को दूर रखें और सकारात्मक विचारों के साथ अपने इस सफर को पूरा करें। यह होने वाली माता तथा बच्चे के संपूर्ण विकास में सहायक होने के साथ ही दंपति के प्यार और विश्वास को भी बढ़ाता है।

जीवन शैली में बदलाव

 यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि गर्भधारण से पहले होने वाले माता तथा पिता दोनों का शरीर स्वस्थ होना चाहिए। गर्भावस्था के समय माता का स्वस्थ शरीर एक स्वस्थ शिशु के जन्म में सहायक होता है। होने वाले पिता की जीवन शैली का मां तथा बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ता है स्वस्थ खानपान के साथ ही व्यायाम, आराम तथा एक दूसरे के साथ समय बिताना यह अत्यंत आवश्यक है। अव्यवस्थित दिनचर्या तथा हानिकारक आदतें जैसे धूम्रपान और अत्याधिक शराब का सेवन को अलविदा कह कर तथा स्वस्थ दिनचर्या को अपनाकर अपने शरीर के स्वस्थ बनाना चाहिए। बच्चे के समग्र विकास के लिए हमारे आसपास का वातावरण निसंदेह प्रभाव डालता है परंतु अपने शरीर को स्वस्थ बनाकर बच्चे के स्वस्थ विकास के लिए हम सहायक हो सकते हैं।

 

पोषक तत्त्वों का पोषण

होने वाले अभिभावक खासकर होने वाली मां को गर्भ धारण करने से पहले अपने शरीर में जरूरी पोषक तत्वों के बारे में ख्याल रखना शुरू कर देना चाहिए। जैसे ही आपको पता चलता है कि आपके घर में एक नन्हा मेहमान आने वाला है अभिभावक अपने होने वाले बच्चे के स्वास्थ्य और विकास के बारे में चिंतित होना शुरू हो जाते हैं। यह बहुत जरूरी है कि होने वाली मां अपने खान-पान का ध्यान रखना शुरु कर दे। स्वस्थ खान-पान और स्वस्थ जीवन शैली बच्चे के विकास में सहायक होता है। गर्भावस्था के समय होने वाली माताओं के शरीर में विटामिंस की सही मात्रा का होना अत्यंत आवश्यक है। सप्लीमेंट्स (पूरक पोषण) के जरिए आप इस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं जैसे कि मदर्स हॉरलिक्स में 25 तरह के महत्वपूर्ण विटामिंस होते हैं, संतुलित आहार के साथ ही ये पूरक विटामिंस स्वस्थ गर्भावस्था के साथ-साथ स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक है।

बने एक दूसरे के सहायक

गर्भावस्था में हार्मोन के बदलाव के कारण उदासी, सुस्ती तथा भावनाओं में अति उतार-चढ़ाव होना सामान्य बात है। होने वाली माता का सारा ध्यान पति तथा परिवार से हटकर सिर्फ और सिर्फ अपने बच्चे पर केंद्रित हो जाता है। कई बार भावनाओं का यह उतार-चढ़ाव और बच्चे का अतिरिक्त ध्यान दंपति के जीवन में तनाव का कारण बन जाती है और नए-नए बनने वाले पिता को लगता है कि मुझे नजरअंदाज किया जा रहा है।

एक दूसरे के साथ समय बिता कर, पत्नी की जरूरतों और भावनाओं को समझ कर तथा ऐसे समय में शारीरिक सहयोग के साथ ही मानसिक सहयोग व सुरक्षा प्रदान करना अत्यंत आवश्यक है। बच्चे के जन्म के बाद यह सहयोग की भावना उसके विकास में सहायक होगी।

बचत करना शुरू कर दें

व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन से परिवार की वित्तीय आवश्यकताओं के बारे में सोचना शुरू करने का यह सही समय है। आवश्यकताओं के अनुरूप सही वित्तीय प्रबंधन करना अच्छी आदत होती है। बच्चे के जन्म के समय तथा जन्म के बाद के खर्चों का ध्यान रखकर सही जगह में निवेश करें जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर आपको परेशान ना होना पड़े।

अभिभावक बनना (खासतौर से पहली बार) जीवन में प्रसन्नता के साथ जिम्मेदारी भी देती है। माता-पिता बनने के बाद आपका जीवन पूरी तरह से तो नहीं लेकिन आंशिक तौर पर तो बदल जाता है। थोड़ी सी जागरूकता और योजना बनाकर अगर तैयारी करें तो बच्चे के जन्म के समय तथा उसके बाद के कुछ वर्षों तक आप चिंता मुक्त रह सकते हैं।



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