मिलिए, 94 साल की स्टार्टअप फाउंडर - हरभजन कौर से!

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मिलिए, 94 साल की स्टार्टअप फाउंडर - हरभजन कौर से!

ये स्टार्टअप्स को दौर है। जब हम बात करते हैं स्टार्टअप की तो हमारी आंखों के सामने किसी आईआईटियन या आईआईएम पढ़े किसी युवा की तस्वीर आंखों में घूम जाती है।

 

मगर आज हम बात कर रहे हैं एक अनोखे  स्टार्टअप शुरू करने वाली महिला की, जो न सिलिकॉन वैली या बेंगलुरू की हैं और उनकी उम्र न तो 25 साल, 30 साल या 35 साल की है। उनकी कुल जमा उम्र है- 94 साला। जी हां, हम बात कर रहे हैं चंडीगढ़ की 94 वर्षीया हरभजन कौर की।

 

 

हरभजन कौर इस बात की मिसाल हैं कि किसी भी अच्छे काम की कभी भी शुरुआत की जा सकती है। हरभजन कौर ने अपने पति और परिवार के साए में ताउम्र गुजार दी। उनके पास क्या नहीं था- बेटा-बेटी, नाती-पोतों वाला एक भरा-पुरा परिवार। और अब तो उम्र भी हो चली थी, जीवन के 90 बसंत वे देख ही चुकी थीं। किसको पता था कि उनके मन में कुछ चाहतें अब भी बाकी रह गई थीं, कुछ अरमान अब भी अपने पूरे होने की राह देख रहे थे। 

 

एक दिन बातों-ही-बातों में बेटी रवीना ने उनसे पूछा कि इतनी लंबी उम्र गुजार देने के बाद कहीं उनकी कोई इच्छा बाकी तो नहीं रह गई? 

 

मौका देख कर हरभजन जी बोल पड़ीं कि बस एक ही मलाल रह गया है कि वे कभी खुद एक पैसा नहीं कमा पाईं।

 

 

बेटी ने सोच कर पूछा कि वे क्या करना जानती हैं। मां ने बताया कि उन्हें खाना बनाना आता है और वे बेसन की बर्फी बहुत ही स्वादिष्ट बनाती हैं। बेटी ने मां का मन रखने के लिए शहर में लगने वाले साप्ताहिक ऑर्गेनिक बाजार में बेचने के लिए ऑर्डर ले लिया। पहली बार 5 किलो की बर्फी बनाई और पहली बिक्री पर मिले 2000रुपये। बेटी को लगा कि मां पहली कमाई पाकर संतुष्ट हो जाएंगी। 

 

मगर हरभजन कहां रुकने वाली थीं। उनके पास तो जैसे पूरा बिजनेस प्लान रेडी था।

 

देखते-देखते उनकी  ‘ ऑर्गेनिक बेसन की बर्फी’ की शोहरत शहर भर में फैल गई। उन्हें अब नियमित ऑर्डर मिलने लगे। हरभजन कौर ‘ऑर्डर’ पर अपने घर की रसोई में और कई चीज़ें भी बनाने लगीं। बादाम का शरबत, लौकी की आइसक्रीम, टमाटर चटनी, दाल का हलवा, अचार वगैरह की तैयारी वे अपने हाथों से करती हैं। अपनी रसोई में वे किसी को फटकने भी नहीं देतीं। 

 

उनके इस जुनून, समर्पण को देख उनकी नातिन ने उनके व्यंजनों को एक ब्रांड बनाने की सोची और नाम दिया-  ‘हरभजन’ साथ ही एक खूबसूरत-सी टैगलाइन भी – ‘बचपन याद आ जाए’

 

अब नानी हरभजन कौर पिछले चार सालों में एक ऑन्ट्रप्रेन्योर तो बन ही चुकी हैं। उनके इस जज़्बे की कहानी भी सब जगह छप भी चुकी है। अब वे एक उद्यमी के तौर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं। पिछले दिनों ‘गोइंडिया’ में उन पर छपे एक फीचर ने महिंद्रा ग्रुप के आनंद महिंद्रा का ध्यान अपनी ओर खींचा। हरभजन कौर की कहानी से प्रभावित होकर उन्होंने अपने एक ट्वीट में हरभजन कौर को चंडीगढ़ शहर का एंटरप्रेन्योर ऑफ द ईयर बताया। जो बात अपने आप में एकदम सही भी है।

 

 

महिलाओं के ऐप ‘बेबीचक्रा’ की संस्थापक-सीईओ नैया सागी हरभजन कौर के इस जज़्बे के बारे में कहती हैं, “हरभजन कौर की कहानी हमें यह बताती है कि स्टार्टअप शुरू करने के लिए कभी देर नहीं होती और इससे यह भी पता चलता है कि हमारे देश में कितनी छुपी हुई प्रतिभाएं हैं! हर मां में एक ऑन्ट्रप्रेन्योर छुपी हुई है, उन्हें बस बाहर निकलने का एक मौका चाहिए।  उनके लिए अपने परिवार का सहयोग ही किसी पूंजी या कैपिटल से कम नहीं है जो उनके हुनर और और जुनून को किसी कामयाब बिजनेस में बदल सकता है।”

 

आप भी इस बात को मानते ही होंगे!

 

वे सभी महिलाएं, जिनको लगता है कि उनके काम की कोई कद्र नहीं है वे भी इस दिशा में कोशिश कर सकती हैं। ...बस जरूरत है एक मजबूत इच्छाशक्ति की!

 

कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता

एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों..'

 

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