क्या आप भी बच्चे को ऐसे डांटती हैं?

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क्या आप भी बच्चे को ऐसे डांटती हैं?

न बच्चे पैदा करना आसान होता है और न ही बच्चों को पालना। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं उनकी समझ बढ़ती है और उनकी भावनाएं बदलने लगती हैं क्योंकि इस समय शारीरिक विकास के साथ-साथ बच्चे का मानसिक और संज्ञानात्मक विकास भी हो रहा होता है। इसलिए उनकी हर चीज जानने की उत्सुकता बढ़ती जाती है। वे बड़ों की तरह हर काम को खुद करना चाहते हैं। वे हर चीज का अनुभव लेना चाहते हैं। इस समय उन्हें सही-गलत, अपने-पराए का भान नहीं होता। वे अपने आस-पास, घर में, दुकान में, टीवी में, दोस्तों के पास जो भी चीज देखते हैं वो सब उन्हें चाहिए होती है। इस समय अपने अनुभव को बढ़ाने के लिए वे हर काम करते हैं। किचन में चीजों को छूना, गिराना, खिलौनों के तोड़ना-फोड़ना, आक्रामक हो जाना भी। इस समय बच्चों को हर समय कोई चाहिए जो उनके मन के अनुसार और जरूरत के अनुसार काम कर सके। बच्चे ऐसे में जो भी काम करते हैं तो नुकसान होने पर या गलत होने पर मां-बाप उन्हें गलत समझते हैं या उनकी शैतानी। 

इसलिए मां-बाप को एक बार बैठ कर सोचना चाहिए कि अब उनका बच्चा पालने  में झूलने वाला नहीं रह गया है वह अब बड़ा हो गया है। जब वे बच्चे थे तो इस समय वे क्या सोचते थे और उनकी कैसी भावनाएं थीं। इसलिए जब आपके बच्चे से कुछ गड़बड़ हो जाए तो आप उसे इस तरह न डांटें जिससे कि उसके कोमल मन पर बुरा असर पड़े। आइए देखते हैं कि अक्सर पैरेंट्स अपने बच्चों को कैसे डांटते हैं। 

‘रोना बंद करो!’

बच्चे जब बोलना नहीं जानते हैं तो वे रोकर अपनी फीलिंग्स को जाहिर करते हैं। अगर उस समय मां-बाप काम में व्यस्त रहते हैं या वे बच्चे की इच्छा पूरी नहीं कर पाते हैं तो उसे झिड़क देते हैं। उसे डांट देते हैं- रोना बंद करो। 

ऐसे में मां-बाप को चाहिए कि पहले वे समझें कि बच्चे के रोने का क्या कारण है? बच्चे की तकलीफ को समझें। अगर उसकी मांग पूरी नहीं पो सकती तो उसे प्यार से समझाएं।

‘दूसरे बच्चे को देखो!’

पैरेंट्स अकसर अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। अपना बच्चा जब भी कुछ करे तो उसे दूसरे बच्चों को उदाहरण देते हैं। उसे डांटते हैं- जरा दूसरे बच्चों को देखो। और वह दूसरे बच्चे को अच्छा बताकर अपने बच्चे में हीन भावना पैदा करते हैं। असल में  इन शब्दों से आप अपने बच्चे को नकारात्मक तरीके से प्रभावित कर रहे हैं। उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को ठेस पहुचाने का काम रहे हैं। हमेशा इस बात को याद रखें, आपका बच्चा हर किसी से अलग है और उसकी अपनी प्रतिभा है! उनकी भावनाओं और सपनों का सम्मान करें।

‘चलो, घर पर बताती हूं!’

जब हम बच्चे के साथ कहीं बाहर होते हैं और बच्चा कुछ शरारत करे या कुछ खरीदने की जिद करे तो पैरेंट्स उसे वहां डांटते तो हैं ही, साथ में धमकाते भी हैं- चलो, घर पर बताती हूं! इससे बच्चा डर जाता है। उसे लगता है कि अब तो घर जाकर मार भी पड़े। इससे बच्चे के मानसिक स्तर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। क्योंकि घर वह जगह है जहां आप उन्हें दंडित करने जा रहे हैं। इस तरह के एक धमकी भरे शब्द का उपयोग ना करें। बल्कि उन्हें साफ-साफ समझाएं कि वे जो कर रहे हैं वह गलत है। या उनकी मांग अभी पूरी नहीं की जा सकती।

‘लालची मत बनो!’

अक्सर आप जब अपने बच्चे को कोई खाने की चीज देते हैं बच्चा किसी के साथ शेयर ना करके अकेले ही खाने लगता है। कभी दूसरों के घर में या किसी और की चीजें या होटेल में इस तरह खाने लगे कि जैसे उसने कभी खाया ही न हो या सब अकेले ही खा जाए तो पैरेंट्स उसे वहां डांटते हैं- लालची मत बनो!  जो कि गलत है आप ऐसे शब्दों का उपयोग ना करें। बच्चे को अपनी चीजें शेयर करने के लिए प्यार से सिखाएं और शेयरिंग की जरूरत बताएं। अगर बच्चे को खाने में कोई चीज बहुत पसंद हो तो एक बार उसे मन भर के खिला दें जिससे कि उसके मन में उस चीज का लालच खत्म हो जाए।

‘कहां से सीखा ये सब?’

बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो  बाहर की दुनिया से, बाहर के लोगों से उनका वास्ता पड़ता है। हर बच्चा अलग होता है। विकास के क्रम में बच्चों से अक्सर गल्तियां होती रहती हैं। गलत काम करना बहुत आसान होता है। बच्चे आपस में मिलकर शरारते भी करते हैं। बिगड़े बच्चों या बड़ों की गंदी आदतें वे खुद भी आजमा के देखना चाहते हैं। इसलिए जब अपने बच्चे को झूठ बोलना, या चोरी करना या मार-पीट करना जैसी गलत बात करते हुए मां-बाप देखते हैं तो वे डांटते हैं- ये क्या कर रहे हो? कहां से सीखा ये सब ?? इसलिए जब पहली बार आपका बच्चा कोई गलत हरकत करे तो उसे समझाएं। वापस गलत हरकत करने पर उसे कड़े शब्दों में समझाएं।

इसलिए, अगली बार जब आपका बच्चा गल्ती करे तो डांटने से पहले समझने की कोशिश करें कि बच्चे ने ऐसा क्यों किया। आपको भी बच्चे को हर बार डांटने से पहले उस पर प्यार और ध्यान देने की जरूरत है। बच्चे को जब सही करण देकर आप उसकी गलती समझाएंगी तो अगली बार बच्चा गल्ती करने से बचेगा। इस तरह पैरेंट्स और बच्चे में प्यार,विश्वास और समझदारी का रिश्ता बढ़ेगा।

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