प्रेगनेंसी में मानसिक तौर से मजबूत रहना क्यों है आवश्यक

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प्रेगनेंसी में मानसिक तौर से मजबूत रहना क्यों है आवश्यक

पहली बार माॅं बनने का अनुभव ही अलग होता है। प्रेगनेंसी के शुरुआत से लेकर बच्चे के जन्म तक मन में बहुत सारी उलझने और सवाल होते है। जैसे ही डिलीवरी का समय नजदीक आता है मन में डर और चिंता होना सामान्य है। लेकिन अक्सर यह चिंता और तनाव इतना अधिक हो जाता है कि इसका असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ने लगता है।

ऐसे समय में फैमिली और पति का सपोर्ट सबसे ज्यादा जरुरी होता है। यह सहयोग एक माॅं को मानसिक रुप से मजबूत बनाता है।

  • एक माॅं होने के नाते आपकी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा बढ़ जाती है कि आपको मेंटली कैसे स्ट्रांग रहना है।
  • नार्मल डिलीवरी हो या फिर सिजेरियन घबराने की जरुरत नहीं है। जो भी होगा अच्छा होगा जल्द ही डिलीवरी से रिकवर होना है। यह सोच हमेशा रखिए और मन से मजबूत रहे।
  • डिलीवरी के दौरान अक्सर गर्भवती महिला को यह चिंता होती है कि कैसे मैं बच्चे को सभांलूगी। इसलिए यह चिंता बिल्कुल मत करिए, बल्कि आपके पति और फैमिली को पूरी तरह से सपोर्ट करना होगा।
  • वजन बढ़ना यह चिंता सबसे ज्यादा होती है, डिलीवरी के बाद वजन बढ़ता है लेकिन उसे कम भी किया जा सकता है।
  • अगर आप वर्किंग है तो आप यही सोचती होगी कि मैं कैसे सब कुछ बैलेंस करुं। इसकी चिंता मत करे सभी आफिस में मैटरिनिटी लीव मिलती है।
  • बच्चे के जन्म के बाद माॅं को सबसे ज्यादा परेशानी नींद की होती है। इसलिए इस बात से घबराएं नहीं जब आपका शिशु सो जाए आप भी तभी अपनी नींद पूरी कर ले।
  • गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग होगा यह सब सामान्य है। इसलिए खुद को बिजी रखिए, आप चाहे तो अपना एक रुटीन बना ले। अच्छी किताबे पढ़े, पॅाजिटिव सोच रखे, रोजाना वॅाक करे लेकिन डॅाक्टर की सलाह पर। इस तरह से आप स्वंय को बिजी रख सकती है।

डिलीवरी से पहले अपने आप को स्ट्रांग रखे, अकेले में बिल्कुल भी नहीं रहे। अपने फैमिली मेंबर, पति या फिर अपनी फ्रेंड से बात करे। किसी भी बात को मन में नहीं रखे क्योंकि किसी भी तरह का तनाव आपकी और बच्चे की सेहत के लिए सही ठीक नहीं है।

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