गुड टच और बैड टच क्यों जरुरी है Toddler के लिए भी जानना

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गुड टच और बैड टच क्यों जरुरी है Toddler के लिए भी जानना

सिया अपनी फ्रेंड गौरी के घर पर खेलने गई। जाते समय सिया काफी खुश थी लेकिन जैसे ही घर आई जोर-जोर से रोने लगी। मम्मा मुझे नहीं जाना मुझे नहीं खेलना। सिया के अंकल बिल्कुल नहीं अच्छे, सिया जो कि महज 4 साल की थी।

उसके बगल वाले फ्लैट में उसकी फ्रेंड गौरी भी रहती थी। सिया ज्यादातर गौरी के साथ ही खेलती, उस दिन गौरी के अंकल भी घर पर थे। उन्होनें गलत तरीके से सिया को किस किया। जो सिया को बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा। यही वजह थी सिया के रोने की, सिया के अलावा ऐसे बहुत से बच्चे है जिन्हें गुड टच और बैड टच के बारे में पता नहीं होता है। अपने बच्चों को जैसे आप सारी चीजे सिखाते हैं वैसे ही इसके बारे में भी बताए।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका बच्चा अभी Toddler ही है। आप अभी से समझाए गुड टच और बैड टच के बारे में।

  • 2 साल की उम्र में बच्चे प्ले स्कूल या डे केयर जाना शुरु करते है। हालिकी इस समय बच्चों के लिए यह बातें समझना बहुत मुश्किल होता है। आप बच्चों को खेल-खेल में गुड टच और बैड टच के बारें में बताए।
  • बच्चों को बताए कि अगर तुम्हारे गाल या लिप्स पर तुम्हारें मम्मी पापा के अलावा कोई किस करे तो आप पहले बोलो नो तुम बैड टच कर रहे हो।
  • बच्चे चाहे 1 साल का हो या फिर 5 साल का बच्चे अच्छे बुरे का स्पर्श अच्छी तरह से समझते है।
  • हमारे शरीर के प्राइवेट पार्ट है जिन्हें कोई नहीं टच कर सकता है। इसके बारे में सीधे और खुले शब्दों में बच्चों को बताए।
  • बच्चे को उनकी शारीरिक बनावट के बारे में समझाए।
  • बच्चों को ना कहना सिखाएं, आप घर का फैमिली मेंबर या फिर कोई फ्रेंड के साथ बच्चों को ऐसे अकेले मत जाने दे।
  • एक पैरेंटस होने के नाते सबसे ज्यादा जरुरी है अपने बच्चों का दोस्त बनना।
  • बच्चों से एकदम फ्रेंडली रहे, उनकी बातों पर भरोसा कीजिए। उन्हे समझाए कि कोई कुछ भी गलत करता है तो मुझसे सबसे पहले बोलो।
  • ना कहने की आदत बच्चों में जरुर डाले, बच्चों को पूरी तरह से निडर बनाए।

सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग तो आजकल 3 से 5 साल तक बच्चों को भी दी जाती है। अपने बच्चों को इस बात के लिए प्रोत्साहित करे। बच्चों को आवाज उठाना सिखाए, अगर आपका कोई करीबी ऐसा करने की कोशिश करे तो बच्चा फौरन चिलाएं।

सबसे ज्यादा जरुरी है पैरेंटस का अपने बच्चे पर विश्वास, अपने बच्चे पर पूरी तरह से भरोसा करे। उनके साथ कभी भी डॅाट कर चिल्लाकर बात नहीं करे। दोस्त बनने के बाद बच्चा हर बात सबसे पहले अपने पैरेंटस ही शेयर करता है। इन सब बातों का ध्यान रखे और अपने बच्चे को एक सुरक्षित माहौल दें।

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