पॉजिटिव पेरेंटिंग - बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका

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पॉजिटिव पेरेंटिंग - बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका

मां बच्चे को जन्म देती है और मां के ऊपर ही बच्चे की सारी जिम्मेदारी आती है। बचपन से यही सुनने को मिलता है कि अरे इसकी मां ने इसे कितनी अच्छी परवरिश दी है। या फिर लगता है कि इसकी मां ने इसे कुछ सिखाया नहीं। सब कुछ एक मां की जिम्मेदारी बन जाती है।

  • पैरेंट्स बनने के इस सफर में दोनों की भागीदारी होती है। लेकिन एक मां से ही उम्मीद की जाती है कि वह ही बच्चे को संभाले।
  • अगर वर्किंग मॅाम है तो एक मां को ही अपनी जॅाब छोडनी पडती है। एक पिता को तो नहीं कहा जाता है अरे अब तुम बाप बन गए हो। अपनी नौकरी से ज्यादा बच्चे पर ध्यान दो।
  • ऐसा इसलिए कि सदियों से यही सोच चली आ रही है कि बच्चों की परवरिश में पिता की भूमिका सिर्फ स्कूल की फीस और वीकेंड पर बाहर घूमना है।
  • बच्चा अगर अच्छा करे तो बिल्कुल अपने पापा पर गया है। कुछ गलत सीखे तो मां ने सिखाया नहीं होगा। ऐसा नहीं है कि सबकी सोच ऐसी हो, बहुत सी फैमिली में मां से ज्यादा पिता अपने बच्चे को संभालते है। लेकिन उन्हे इस बात के लिए ताने भी सुनने पडते है कि अरे यह तो इसका मां का काम है तुम क्यों कर रहे हो।
  • यह बात सही है कि एक पिता के ऊपर बहुत जिम्मेदारी रहती है। लेकिन एक मां जो कभी बेटी से बहू और अब मां बन गई है। उसके लिए तो सब कुछ बदल गया है, इसलिए एक पिता होने के नाते कुछ जिम्मेदारी आप भी उठाए।
  • बच्चे के जन्म के बाद एक नई मां के अन्दर शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से परिवर्तन होते है। इसलिए एक पिता के तौर पर आपको अपनी पत्नी का साथ देना चाहिए। बच्चे के डायपर चेंज करने से लेकर सुलाने तक की जिम्मेदार आप भी स्वयं उठाए।
  • अगर आपकी वाइफ वर्किंग है तो उसे यह मत कहे कि तुम नौकरी छोड़ो और बच्चे को संभाले। अगर नौकरी भी करती है तो एक मां के ऊपर ही जिम्मेदारी होती है कि ब्रेकफास्ट, लंच, डिनर सब कुछ मैनेज करना।
    अपनी वाइफ से यह बिल्कुल नहीं कहे कि यह मेरा काम नहीं है बल्कि आप भी घर के कामों में अपनी वाइफ का सपोर्ट करे।
  • प्रेगनेंसी के बाद एक मां के मूड में भी बहुत बदलाव आते है। तो पिता होने के नाते अपनी वाइफ के इस मूड को ठीक करने की कोशिश करे।
  • हो सकता है कि आपकी वाइफ कुछ मोटी हो जाए इस बात को लेकर कभी ताने नहीं दे। क्योंकि फिट रहना ज्यादा जरूरी है, अगर कुछ वजन बढ भी गया है तो कोई बात नहीं। आप अपनी वाइफ यानी कि अपने बच्चे की मां को कुछ जिम्मेदारियों से दूर रखे।
  • घर पर किसी दिन ब्रेकफास्ट नहीं बना हो तो ऐसे में खुद बनाए। ना कि अपनी वाइफ से बोले कि अरे आज तो तुमने कुछ नहीं बनाया। ऑफिस से घर आने पर हो सकता है कि घर कुछ बिखरा सा हो तो ध्यान रखे कि अब आप बैचलर नहीं है। बच्चे के आने के बाद घर पहले जैसा व्यवस्थित नहीं रह सकता है।
  • एक वर्किंग मॉम के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता है घर पर रहना। क्योंकि बहुत कुछ पहले जैसा नहीं रहता है। इसलिए मूड स्विंग होना सामान्य है ऐसे में आप कुछ समय के लिए अपने बच्चे की जिम्मेदारी संभाले और अपनी वाइफ को इस बात के लिए प्रोत्साहित करे कि तुम फिर करियर की शुरुआत करो, मैं तुम्हारे साथ हूं।

एक पिता को भी बच्चों की परवरिश में उतना ही साथ देना चाहिए जितना एक मां देती है। बच्चों हमेशा अपने पेरेंट्स ही सीखते है। बहुत से लोग यह सोचते है कि अरे यह तो पिता है इसका ये काम नहीं है। इन बातों को नजरअंदाज करे और एक पिता जिम्मेदारी समझते हुए अपनी पत्नी का पूरा साथ दे।

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