करवा चौथ की पूजा का समय जानिए छलनी से ही चंद्रमा को क्यों देखा जाता है

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करवा चौथ की पूजा का समय जानिए छलनी से ही चंद्रमा को क्यों देखा जाता है

कार्तिक महीने की चतुर्थी तिथि को पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है। इस बार करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त 06: 55 से लेकर 08:51 तक है। चंद्रमा निकलने का समय रात 8 बजकर 11 मिनट पर है।

 

करवा चौथ पूजा विधि

करवाचौथ में सबसे पहले सुबह सरगी खाने की परंपरा है। इसके बाद पत्नी पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस व्रत में भगवान शिव, मां पार्वती, कार्तिकेय, गणेश और चंद्र देवता की पूजा की जाती है। करवा चौथ की कथा भी सुनी जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा को अर्ध्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इसके अलावा देश के अलग-अलग राज्यों में करवा चौथ पूजा घर की परंपरा के अनुसार की जाती है।
करवा चौथ के पूजन में धातु के करवे को सबसे अच्छा माना गया है। इसके अलावा मिट्टी के करवे से भी पूजा करने का विधान है। पूजा की थाली में श्रृंगार का सामान, फल, फूल, मिठाई रखी जाती है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए जल, अक्षत, रोली, सिंदूर साथ में रखा जाता है।

 

छलनी से ही क्यों चंद्रमा देखने की परंपरा है

सदियों से यही परंपरा चली आ रही है कि महिलाएं अपने पति का चेहरा छलनी से देखती है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार छलनी से निकालने वाला चंद्रमा का प्रकाश पति को सभी बुरी नजरों से बचाता है। साथ ही पति-पत्नी के बीच के आपसी रिश्तों को और मजबूत बनाता है।

 

अगर गर्भवती है तो करवा चौथ के व्रत के दौरान इन बातों का ध्यान रखें

अगर आप प्रेगनेंसी की पहली तिमाही में है तो डॉक्टर की सलाह लेकर ही व्रत रखे।

  • सुबह सरगी में आप हेल्दी चीजें खायें जैसे कि फल, ड्राई फ्रूट, मखाने, काजू, फैनी, खीर, पनीर की सब्जी एक बैलेंस डाइट को सरगी में शामिल करे। साथ ही खूब सारा पानी पीजिए, इसके अलावा नारियल पानी का सेवन करे।
  • हालिकी सरगी में सुबह जल्दी उठकर खाया जाता है। इसलिए सुबह-सुबह इतनी भूख नहीं लगती है। लेकिन फिर भी अच्छी तरह से खाना आवश्यक है।
  • अगर आपको सिर दर्द, चक्कर जैसी समस्या है तो डॉक्टर से अवश्य बतायें।
  • व्रत के दौरान बहुत ज्यादा काम नहीं करे, थकान भरे काम तो बिल्कुल भी नहीं। व्रत खोलने के लिए सबसे पहले आप पानी के साथ कुछ मीठा ले। उसके बाद फ्रूट और उन चीजों का सेवन करें जिनसे आपको तुरंत एनर्जी मिले।
  • हालिकी गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु की सेहत का ध्यान रखते हुए व्रत नहीं रहने की सलाह दी जाती है। इसलिए पहले आप इन सब बातों का ध्यान रखें। प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही के दौरान अक्सर बहुत ज्यादा भूख लगती है। इसलिए व्रत रखते समय बहुत सावधानी रखें। क्योंकि आपके नहीं खाने का असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है।

 

व्रत में होने वाली परंपरा आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही हैं। लेकिन अपनी सुविधानुसार अपनी हेल्थ का ध्यान रखते हुए व्रत रखें। करवा चौथ व्रत पति-पत्नी के बीच प्यार को मजबूत करता है। पति को भी अपनी पत्नी का सम्मान करना चाहिए।

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