करवा चौथ व्रत मनाने का बदलता ट्रेंड

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करवा चौथ व्रत मनाने का बदलता ट्रेंड

करवा चौथ इस दिन का इंतजार हर पत्नी बड़ी बेसब्री से करती है। सुबह तैयार होकर निर्जला व्रत रखना, चंद्रमा को देखकर व्रत तोड़ना। यह सब परंपरा आज से नहीं बल्कि सदियों से चली आ रही हैं। लेकिन इन सबका ट्रेंड पूरी तरह से बदल चुका है। अगर आज के ट्रेंड की बात करें तो पति भी पत्नी के साथ व्रत रखना पसंद करते हैं। क्योंकि आज पति-पत्नी के बीच में आपसी सम्मान, आत्मसम्मान और विश्वास की परिभाषा बदल गई है।

देखा जाए तो आज के समय में पत्नियों हर तरह से अपने पति को सपोर्ट करती हैं। घर चलाना है, बाहर के काम, आफिस पत्नियों की भी बराबर की भागीदारी रहती है। आज के समय में परंपरा वही है लेकिन उनका तरीका बदल गया है।

आज पति भी हर तरह से पत्नी का सहयोग करते हैं। आज के समय में करवा चौथ मनाने का ट्रेंड कुछ अलग हो गया है। आखिर हो भी क्यों ना हो इस दिन की रौनक ही अलग होती है। सबसे खास बात यह है कि आजकल अविवाहित जोड़े भी एक दूसरे के लिए व्रत रखते हैं। यह अपने-अपने प्यार को परिभाषित करने का तरीका है।

लेकिन अगर हम आज से 20 साल की बात करें तो करवा चौथ व्रत की रौनक कुछ और ही होती हैं। घरों में हफ्ते भर पहले से तैयारी करना, अपनी मां को सजते संवरते देखने। बाजारों में करवें और पूजा का सामान देखना। इन सबकी बात ही अलग होती है उस समय करवा चौथ पार्टियों को ट्रेंड ही नहीं था और ना ही स्मार्टफोन का जमाना था। खैर ट्रेंड बदलना सही होता है और समय के साथ चलना भी चाहिए। आज बात ही कुछ और हो गयी है, हमारे देश के अलावा विदेशों में भी करवा चौथ की धूम रहती है।

लेकिन इन सबके बीच पति-पत्नी के रिश्ते की बात ही कुछ और होती है। एक अच्छी और सफल शादी का के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है भरोसा, एक-दूसरे का सम्मान, भावनाओं की कद्र करना। असल मायने में करवा चौथ का व्रत का यही मतलब है। क्योंकि जब पति का चेहरा छलनी से देखा जाता है तो चंद्रमा की किरणों का यही अर्थ होता है कि अब ऐसे ही पति-पत्नी का रिश्ता इस रोशनी की तरह ही मजबूत रहे। क्योंकि एक पति-पत्नी का रिश्ता कितना बेहतर होगा। उसका असर उनके बच्चों पर पड़ेगा इसलिए इस रिश्ते में सबसे ज्यादा मजबूती होना जरुरी है।

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