नवजात शिशु और मां का स्पर्श

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नवजात शिशु और मां का स्पर्श

नवजात शिशु सबसे ज्यादा मां का स्पर्श समझता है। क्योंकि बच्चे और मां के बीच एक अलग ही तरह का संबंध होता है। जिसे सिर्फ मां ही महसूस कर सकती है। एक बच्चे के लिए मां का स्पर्श कई तरह से फायदेमंद होता है।

 

  • नवजात शिशु के जन्म के बाद डॉक्टर सबसे पहले यही कहती है कि शिशु को चिपकाएं क्योंकि इससे शिशु को गर्माहट मिलती है। मां के संपर्क में आने पर शिशु स्वयं को बहुत ही सुरक्षित महसूस करता है।
  • जब भी शिशु मां के स्पर्श महसूस करता है तो शिशु कम रोता है। ऐसा अक्सर होता है कि बच्चा मां की गोदी से अलग होने पर रोना शुरु कर देता है। क्योंकि नवजात अपने मां के स्पर्श को बहुत अच्छी तरह से समझता है।
  • शिशु के लिए मां का स्पर्श नींद के लिए भी फायदेमंद होता है। मां के पास सोने से शिशु अच्छी और गहरी नींद सोता है।
  • नवजात शिशु को अगर किसी और के पास छोड़ा जाए तो अक्सर वह बेचैन हो जाता है। इसकी वजह है कि शिशु अपने मां के स्पर्श को भली भांति पहचानते हैं।
  • माँ का स्पर्श शिशु के ऊपर मानसिक प्रभाव भी डालता है।
  • बच्चे हमेशा यही चाहते हैं कि उनकी मां उनके आस-पास रहे। लेकिन अगर आप अपने शिशु से दूर हैं तो शिशु इस बात को बहुत आसानी से समझता है। आप चाहे कितने भी करीबी के पास अपने बच्चे को छोडें लेकिन शिशु उतना सहज महसूस नहीं करेगा। जितना वह अपनी मां को देखते ही लिपट जाता है।
  • अगर एक मां अपने शिशु से दूर रहती है तो शिशु चिडचिडा महसूस करता है। क्योंकि मां से ही शिशु को भावनात्मक लगाव महसूस होता है। इसलिए शिशु के लिए मां का साथ होना बहुत ही आवश्यक होता है।
  • शिशु जितना अपनी मां के करीब होता है उतना किसी के भी नहीं। शिशु और मां के रिश्ता गर्भ से ही शुरु हो जाता है। शिशु अपनी मां की आवाज को पहचानता है। शिशु को यह आभास हो जाता है कि उसकी मां उसके करीब या नहीं। मां का स्पर्श और साथ शिशु के ऊपर मानसिक असर डालता है। अगर मां अपने शिशु को अनदेखा करती है तो शिशु मां की तरफ अपना ध्यान आकर्षित करता है। इसलिए एक मां होने के नाते अपने शिशु को समझना बहुत ही आवश्यक है। क्योंकि मां और बच्चे का रिश्ता हर तरह से अलग और अनोखा है।
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