छोटी दीवाली परंपरा मिथक और तथ्य

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छोटी दीवाली परंपरा मिथक और तथ्य

दीपावली का त्यौहार से जुड़ी कई परंपराएं भी है। दीवाली का त्यौहार पूरे पांच दिन तक चलता है। दीवाली की शुरुआत धनतेरस से होती है। दीवाली में अलग-अलग जगह कई तरह की परंपरा हैं। लेकिन इन परंपराओं के पीछे मिथक और तथ्य भी होते है। आइये जानते हैं छोटी दीवाली से जुड़ी हुई कुछ परंपरा के बारे में-



छोटी दीवाली के दिन की परंपरा

छोटी दीवाली को नरक चतुर्दशी और काली चौदस भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नरक से जुड़े दोष और मुक्ति पाने के लिए इस दिन शाम में घर के मेन गेट पर दीपक जलाया जाता है। इस त्यौहार को रूप चौदस भी कहा जाता है मान्यताओं के अनुसार इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठकर उबटन लगाया जाता है। इस दिन हनुमान जी की भी पूजा करने का विधान है।

 

छोटी दीवाली की पूजा करने की विधि

आज के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ में गणेश जी की भी पूजा की जाती है। इसके अलावा कई जगह मां काली की भी पूजा करने की परंपरा है। एक थाली में स्वास्तिक बनाकर इसमें चारों और 11 मिट्टी के दीपक रखें। इसके बाद फल, फूल, इत्र, धूप आदि से मां लक्ष्मी की आरती करे। कई जगह छोटी दीवाली को यम दिया रखने की भी परंपरा है।

हालिकी किसी भी त्योहार की परंपरा आज से नहीं सदियों से चली आ रही है। इन परंपराओं के पीछे जहां मिथक है वहां तथ्य भी है। दीपावली में साफ-सफाई के पीछे मिथ्य यह है कि लक्ष्मी जी का वास। तथ्य यह है कि दीवाली से ही सर्दियों की शुरुआत हो जाती है। ठंड के मौसम में मच्छर भी बहुत आते हैं सफाई के दौरान बहुत से गंदगी निकल जाती है। जिसकी वजह से मच्छर का आना कम होता है।

त्यौहार के पीछे कई सारी मान्यता होती है, इसलिए अपने अनुसार परंपराओं को माने। दीवाली त्योहार है खुशियों का इसलिए सभी में खुशी बांटे।

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