गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में मानसिक तनाव

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गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में मानसिक तनाव

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में कई महिलाओं को मानसिक तनाव से गुजरना पड़ता है। क्योंकि इस समय आपका शरीर में कई तरह के परिवर्तन होते है। जैसे कि हार्मोनल बदलाव इसका असर हमारे दिमाग पर भी पड़ता है। गर्भावस्था ऐसा समय होता है जब बहुत कुछ आपके साथ अलग होता है। जिसका अनुभव सिर्फ एक गर्भवती महिला ही समझ सकती है।

 

गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में किस तरह का मानसिक तनाव होता है।

  • आने वाले बच्चे को लेकर मन में घबराहट की सब ठीक होगा या नहीं।
  • बहुत ज्यादा दवाइयां खाने की वजह से मन अजीब सा होना।
  • बढ़ते हुए वजन, पुराने कपड़ों का फिट नहीं होना।
  • पहले जैसे फ्री होकर घूमना- फिरना नहीं।
  • खाने की अनिच्छा होना, कुछ भी अच्छा नहीं लगना।
  • नार्मल और सिजेरियन का डर होना कि क्या सही है क्या गलत है।
  • परिवार और रिश्तों में परेशानी।

 

मानसिक दबाव से कैसे बचे

  • खुद के लिए समय निकालें।
  • योग और मेडिटेशन करें।
  • किसी अपने से बात करें, कि आपकी क्या परेशानी है।

 

डॉक्टर से सलाह ले अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है।

गर्भावस्था ऐसा समय होता है जब मन में कई तरह के सवाल होते है। इसलिए आप काउंसलर की भी सलाह ले सकते है इससे आपको काफी हद तक मदद मिलेगी। गर्भवती महिला के लिए यह समय बहुत ही नाजुक होता है। इसलिए इस समय बहुत ज्यादा सोचना, तनाव लेने का असर आपके गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ता है। अगर आपको ऐसी कोई मानसिक परेशानी है तो अपने पति से बात करे। आपकी हर परेशानी में आपके पति को साथ देना चाहिए। इसलिए अपने ऊपर किसी तरह का मानसिक दबाव नहीं ले। आने वाले बच्चों को लेकर खुश रहे क्योकि यह सफर बहुत रोमांच होता है।

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