सिंगल पैरेंटिंग क्या सही और क्या गलत

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सिंगल पैरेंटिंग क्या सही और क्या गलत

माता-पिता बनना इस दुनिया का सबसे सुखद एहसास होता है। एक बच्चे की परवरिश में मां और पिता दोनों की भूमिका बराबर होती है। लेकिन बहुत से पेरेंट्स ऐसे भी है। जो किसी कारणवश अपने बच्चे को अकेले परवरिश दे रहे हैं। फिर चाहे वह अकेली मां हो या पिता दोनों अच्छी परवरिश देना चाहते हैं। लेकिन सिंगल पैरेंटिंग को आज भी सही क्यों नहीं मानी जाती है।

 

सिंगल पैरेंटिंग में सही क्या है और गलत यह जानना जरुरी है

पति-पत्नी के बीच के आपसी तनाव का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। बच्चे अपने पेरेंट्स के रोज-रोज के लड़ाई झगडे देखकर स्वंय डिप्रेशन में आ जाते हैं उन्हें लगता है कि मुझे तो इनके साथ रहना ही नहीं है। इन झगडों से बेहतर है कि आप अलग ही रहे। जब एक मां अपने बच्चे के साथ अलग होती है। तो वह पूरी तरह से स्वतंत्र होती है कि उसे क्या करना है। एक बच्चे की अच्छी परवरिश में मां की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। एक मां के पास पूरे अधिकार होते है, कि वह अपने बच्चे की सही तरह से परवरिश कर सके। वैसे ही एक पिता अगर अपने बच्चे को अकेले संभाल रहा है उसके ऊपर ही पूरी जिम्मेदारी आती है। सिंगल पैरेंटिंग उन मायनों में सही जब पति-पत्नी के बीच के तनाव का बच्चों पर पड़ता है। लेकिन सिंगल पैरेंटिंग में बच्चों को बहुत कुछ झेलना ही पड़ता है। क्योंकि बच्चों के लिए माता-पिता दोनों का साथ होना आवश्यक है। फिर चाहे वह स्कूल हो, या फिर घर बच्चे हर जगह खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं। आप चाहे बच्चों को कितनी भी अच्छी परवरिश दे, लेकिन बच्चे यही चाहते हैं कि उनके पेरेंट्स साथ में खुश रहे। बहुत से बच्चों का व्यवहार टीनएजर तक आते- आते बदल जाता है। या तो वह बहुत शांत रहते है या फिर जिद्दी। इसका कारण कहीं ना कहीं पेरेंट्स का अलगाव ही होता है। इसलिए कोशिश यही करें कि अपने लिए ना सही लेकिन बच्चों के लिए अपने रिश्ते को बनाए रखें।

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